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खुद की बिजली से रोशन हुआ सठियांव चीनी मिल
ब्यूरो/अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Wed, 30 Mar 2016 11:48 PM IST
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चीनी मिल से बिजली उत्पादन भी शुरू
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दी किसान सहकारी चीनी मिल सठियांव में बुधवार की दोपहर से पांच मेगावाट बिजली का उत्पादन भी शुरू हो गया। बुधवार की दोपहर में पहली बार चीनी भी बनी। जिसे देख कर्मचारियों का उत्साह बढ़ गया।
3500 डीसी क्षमता वाली चीनी मिल के साथ कोजन प्लांट का भी उद्घाटन 22 मार्च को हुआ था। 15 मेगावाट बिजली पैदा करने वाली टरबाइन की टेस्टिंग बुधवार दोपहर 11 बजे से दो बजे तक हुई। सफलता के बाद पांच मेगावाट बिजली की क्षमता टरबाइन को दी गई।
इसके बाद पूरे मिल में पावर सप्लाई को लोड उस पर दे दिया गया और मिल सुचारु रूप से चल रही है। 10 मेगावाट बिजली और पैदा करने के संबंध में प्रधान प्रबंधक एएस पोरस ने बताया कि धीरे-धीरे लोड बढ़ाया जाएगा। उसके बाद बाहर सप्लाई दी जाएगी। बुधवार तक 40 हजार कुंतल गन्ने की क्रसिंग की जा चुकी थी और दोपहर में चीनी निकलना भी शुरू हो गया।
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इसको लेकर कर्मचारी काफी चिंतित थे कि चीनी कब तक निकलेगी। चीनी निकलने के आते ही कर्मचारियों में जैसे खुशी की लहर दौड़ पड़ी, आसपास के स्टेशनों के कर्मचारी चीनी देखने के लिए आ रहे थे।
चीनी की गुणवत्ता परखने के लिए कर्मचारी से लेकर अधिकारी भी कंप्यूटराइज्ड मशीन से लगातार निगरानी करते नजर आए। कई बार ब्रेकडाउन के बाद 28 मार्च की शाम पांच बजे से मिल की पेराई शुरू हुई तो 30 मार्च की शाम तक कहीं कोई व्यवधान नहीं आया और सुचारु रूप से पेराई चलती रही। बुधवार की दोपहर टरबाइन टेस्टिंग के लिए तीन घंटे पेराई कार्य बाधित रहा।
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3500 डीसी क्षमता वाली चीनी मिल के साथ कोजन प्लांट का भी उद्घाटन 22 मार्च को हुआ था। 15 मेगावाट बिजली पैदा करने वाली टरबाइन की टेस्टिंग बुधवार दोपहर 11 बजे से दो बजे तक हुई। सफलता के बाद पांच मेगावाट बिजली की क्षमता टरबाइन को दी गई।
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इसके बाद पूरे मिल में पावर सप्लाई को लोड उस पर दे दिया गया और मिल सुचारु रूप से चल रही है। 10 मेगावाट बिजली और पैदा करने के संबंध में प्रधान प्रबंधक एएस पोरस ने बताया कि धीरे-धीरे लोड बढ़ाया जाएगा। उसके बाद बाहर सप्लाई दी जाएगी। बुधवार तक 40 हजार कुंतल गन्ने की क्रसिंग की जा चुकी थी और दोपहर में चीनी निकलना भी शुरू हो गया।
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इसको लेकर कर्मचारी काफी चिंतित थे कि चीनी कब तक निकलेगी। चीनी निकलने के आते ही कर्मचारियों में जैसे खुशी की लहर दौड़ पड़ी, आसपास के स्टेशनों के कर्मचारी चीनी देखने के लिए आ रहे थे।
चीनी की गुणवत्ता परखने के लिए कर्मचारी से लेकर अधिकारी भी कंप्यूटराइज्ड मशीन से लगातार निगरानी करते नजर आए। कई बार ब्रेकडाउन के बाद 28 मार्च की शाम पांच बजे से मिल की पेराई शुरू हुई तो 30 मार्च की शाम तक कहीं कोई व्यवधान नहीं आया और सुचारु रूप से पेराई चलती रही। बुधवार की दोपहर टरबाइन टेस्टिंग के लिए तीन घंटे पेराई कार्य बाधित रहा।