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शारदा, बनबसा बैराज से छोड़ा गया पानी
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Sun, 07 Aug 2016 12:14 AM IST
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अंबेडकरनगर के राजेसुल्तानपुर मांझा क्षेत्रों में उफनाई सरयू नदी।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरांचल वासियों के लिए परेशानी सबब बनी घाघरा खतरा बिंदू से नीचे आने का नाम नहीं ले रही है। विगत तीन दिनों से नदी जलस्तर स्थिर है। लेकिन कटान तेज होने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। कटान होने से कृषि योग्य भूमि घाघरा में समा रही है। सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा देवारावासियों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई है। नदी का जलस्तर विगत तीन दिनों से स्थिर है लेकिन कटान तेज हो गई हैं।
नदी तेजी से कृषि योग्य भूमि को अपने आगोश में लेती जा रही है। स्थिर होने के बाद भी नदी बराबर खतरा बिंदू से ऊपर बनी हुई है। वहीं अभी शारदा और बनबसा बैराज से हजारों लीटर पानी नदी में छोड़ा गया है। इस पानी के आने से नदी का जलस्तर और बढने की संभावना है। क्षेत्र के 15 गांवों के संपर्क मार्गों पर चढ़ा बाढ़ का पानी अभी रास्तों पर लगा है। नाव की कमी के कारण लोग ओवरलोड नावों में सफर करने को विवश हैं। वहीं प्रशासन सबकुछ नाविकों के ऊपर छोड़कर चद्दर ताने सो रहा है। अगर कोई दुर्घटना होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा यह बताने वाला कोई नहीं है।
देवारा खास राजा के मुराली का पुरा में नदी की कटान तेज हो गई है। इस पुरे के 65 घरों में लगभग 400 लोग निवास करते हैं। घाघरा की कटान से लालबचन, रामबृक्ष, तीर्थराज, मुराली, परसन पूजन यादव, राधेश्याम यादव, लालधर प्रकाश, छत्रधारी आदि 12 लोगों की 36 रिहायशी मड़ई कटान के कारण घाघरा के मुहाने पर पहुंच चुकी है। जो कभी भी घाघरा की धारा में विलीन हो सकती हैं। इस कटान को रोकने के लिए प्रशासन की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। जबकि 2012 में चक्की हाजीपुर जब कट रहा था तो उस समय तत्कालीन जिलाधिकारी प्रांजल यादव ने इंमरजेंसी लागू कर कटान को रोका था।
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उन्होंने आदेश जारी किया था कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी मौके से भागता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिसका परिणाम हुआ कि काफी मशक्कत के बाद कटान को रोका गया। लेकिन आज मुराली का पूरा को बचाने के लिए ऐसा कोई प्रयास होता नहीं दिखता है। शनिवार की शाम चार बजे घाघरा का जलस्तर डिघिया गेज पर 71.08 मीटर और बदरहुंआ गेज पर 71.99 मीटर दर्ज किया गया।
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नदी तेजी से कृषि योग्य भूमि को अपने आगोश में लेती जा रही है। स्थिर होने के बाद भी नदी बराबर खतरा बिंदू से ऊपर बनी हुई है। वहीं अभी शारदा और बनबसा बैराज से हजारों लीटर पानी नदी में छोड़ा गया है। इस पानी के आने से नदी का जलस्तर और बढने की संभावना है। क्षेत्र के 15 गांवों के संपर्क मार्गों पर चढ़ा बाढ़ का पानी अभी रास्तों पर लगा है। नाव की कमी के कारण लोग ओवरलोड नावों में सफर करने को विवश हैं। वहीं प्रशासन सबकुछ नाविकों के ऊपर छोड़कर चद्दर ताने सो रहा है। अगर कोई दुर्घटना होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा यह बताने वाला कोई नहीं है।
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देवारा खास राजा के मुराली का पुरा में नदी की कटान तेज हो गई है। इस पुरे के 65 घरों में लगभग 400 लोग निवास करते हैं। घाघरा की कटान से लालबचन, रामबृक्ष, तीर्थराज, मुराली, परसन पूजन यादव, राधेश्याम यादव, लालधर प्रकाश, छत्रधारी आदि 12 लोगों की 36 रिहायशी मड़ई कटान के कारण घाघरा के मुहाने पर पहुंच चुकी है। जो कभी भी घाघरा की धारा में विलीन हो सकती हैं। इस कटान को रोकने के लिए प्रशासन की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। जबकि 2012 में चक्की हाजीपुर जब कट रहा था तो उस समय तत्कालीन जिलाधिकारी प्रांजल यादव ने इंमरजेंसी लागू कर कटान को रोका था।
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उन्होंने आदेश जारी किया था कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी मौके से भागता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिसका परिणाम हुआ कि काफी मशक्कत के बाद कटान को रोका गया। लेकिन आज मुराली का पूरा को बचाने के लिए ऐसा कोई प्रयास होता नहीं दिखता है। शनिवार की शाम चार बजे घाघरा का जलस्तर डिघिया गेज पर 71.08 मीटर और बदरहुंआ गेज पर 71.99 मीटर दर्ज किया गया।