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मुआवजे के लिए बढ़ गया पेच
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Wed, 02 Nov 2016 11:50 PM IST
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राष्ट्रीय राजमार्ग 233 को फोरलेन बनाने के लिए अधिग्रहीत जमीन के मुआवजा बंटवारे में फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद प्रशासन ने नया नियम बनाया है। इसके तहत, जिन किसानों को सहखातेदार और ग्राम प्रधान की रिपोर्ट भी लगवानी होगी। ऐसे में किसानों को अब मुआवजा लेने के लिए पेच बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि रिपोर्ट के नाम पर परेशान भी किया जा रहा है।
वाराणसी से लुंबनी तक बौद्ध परिपथ के लिए 2013 में राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन बनाने का प्रस्ताव स्वीकार हुआ। किसानों ने मुआवजा बंटवाने में अनियमितता का आरोप लगाते हुए डीएम से शिकायत की। आरोप था कि भूमि अध्याप्ति कार्यालय में तैनात कर्मचारियों अपने कुछ चहेतों को लाभ पहुंचाया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। नए नियम के तहत मुआवजा के लिए फार्म प्रकाशित कराया गया है। लेखपालों को उपलब्ध कराए गए ये फार्म लाभार्थी किसानों से भरवाए जा रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत मुआवजे के लिए जमीन के सभी खाताधारकों का हस्ताक्षर, प्रधान की स्वीकृति, लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार, एसडीएम की रिपोर्ट आवश्यक है। ऐसे में किसानों को यह नया कोरम पूरा करने के लिए कई चौखठों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
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जिस जमीन के खातेदार खाड़ी देशों में हैं, संबंधित किसानों को उन्हें घर बुलाना पड़ रहा है। सभी कोरम पूरा न करने की स्थिति में किसानों को मुआवजे से वंचित होना पड़ सकता है या उन्हें लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है।
रिपोर्ट के नाम पर परेशान करने का आरोप
काश्तकारों की मानें तो तहसील में पूरा रिकार्ड मौजूद होने के बाद भी नए सिरे से फाइल तैयार करवाई जा रही है। फार्म में जिन-जिन लोगों की रिपोर्ट मांगी गई है, उनकी रिपोर्ट लगवाने के लिए मशक्कत हो रही है। कभी अधिकारी, कर्मचारी मिलते है तो कोई कमी बता दी जाती है तो कभी नदारद रहते हैं। किसानों का कहना है कि रिपोर्ट लगाने के नाम पर परेशान किया जा रहा है।
मुआवजा बंटवारे में अनियमितता न हो और लेखपालों की गड़बड़ी आसानी से पकड़ी जा सके, इसके लिए नई व्यवस्था की गई है। जो किसान मुआवजा नहीं ले सके, उन्हें नया फार्म जमा करना अनिवार्य है। 12 गांवों के किसानों का अभी मुआवजा निर्धारित नहीं हो सका है। इसके लिए एनएचएआई को रिपोर्ट भेजी गई है। - दिवाकर सिंह, भूमि अध्याप्ति अधिकारी
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वाराणसी से लुंबनी तक बौद्ध परिपथ के लिए 2013 में राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन बनाने का प्रस्ताव स्वीकार हुआ। किसानों ने मुआवजा बंटवाने में अनियमितता का आरोप लगाते हुए डीएम से शिकायत की। आरोप था कि भूमि अध्याप्ति कार्यालय में तैनात कर्मचारियों अपने कुछ चहेतों को लाभ पहुंचाया।
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जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। नए नियम के तहत मुआवजा के लिए फार्म प्रकाशित कराया गया है। लेखपालों को उपलब्ध कराए गए ये फार्म लाभार्थी किसानों से भरवाए जा रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत मुआवजे के लिए जमीन के सभी खाताधारकों का हस्ताक्षर, प्रधान की स्वीकृति, लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार, एसडीएम की रिपोर्ट आवश्यक है। ऐसे में किसानों को यह नया कोरम पूरा करने के लिए कई चौखठों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
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जिस जमीन के खातेदार खाड़ी देशों में हैं, संबंधित किसानों को उन्हें घर बुलाना पड़ रहा है। सभी कोरम पूरा न करने की स्थिति में किसानों को मुआवजे से वंचित होना पड़ सकता है या उन्हें लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है।
रिपोर्ट के नाम पर परेशान करने का आरोप
काश्तकारों की मानें तो तहसील में पूरा रिकार्ड मौजूद होने के बाद भी नए सिरे से फाइल तैयार करवाई जा रही है। फार्म में जिन-जिन लोगों की रिपोर्ट मांगी गई है, उनकी रिपोर्ट लगवाने के लिए मशक्कत हो रही है। कभी अधिकारी, कर्मचारी मिलते है तो कोई कमी बता दी जाती है तो कभी नदारद रहते हैं। किसानों का कहना है कि रिपोर्ट लगाने के नाम पर परेशान किया जा रहा है।
मुआवजा बंटवारे में अनियमितता न हो और लेखपालों की गड़बड़ी आसानी से पकड़ी जा सके, इसके लिए नई व्यवस्था की गई है। जो किसान मुआवजा नहीं ले सके, उन्हें नया फार्म जमा करना अनिवार्य है। 12 गांवों के किसानों का अभी मुआवजा निर्धारित नहीं हो सका है। इसके लिए एनएचएआई को रिपोर्ट भेजी गई है। - दिवाकर सिंह, भूमि अध्याप्ति अधिकारी