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तीन फर्जी शिक्षकों का वेतन रोक जांच बिठाई
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Wed, 08 Nov 2017 10:44 PM IST
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ईडी ने नारंग की दो करोड़ उनतीस लाख चवालीस हजार से ज्यादा की संपत्ति एवं बैंक धनराशि को जब्त किया है।
आजमगढ़। समाज कल्याण विभाग के स्कूलों में तैनात फर्जी शिक्षकों का मामला अमर उजाला की ओर से उठाने के बाद बैकफुट पर आए विभाग ने कार्रवाई करते हुए तीन शिक्षकों का वेतन रोककर जांच बैठा दी गई है।
भारतीय मानवाधिकार आयोग संगठन के सदस्य अरुण कुमार सिंह ने निजामाबाद तहसील के वजीरमलपुर स्थित हरिजन कन्या प्राइमरी विद्यालय में तैनात शिक्षिका आशा देवी पत्नी हरीलाल, हरिजन बाल विद्या मंदिर सैदपुर में तैनात शिक्षक देवेंद्र कुमार सिंह, राजेश कुमार सिंह के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों और तथ्यों को छिपाकर नौकरी पाने की शिकायत कई बार की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
पिछले दिनों इसकी शिकायत कमिश्नर तक पहुंची और अमर उजाला ने भी मुद्दे को समय-समय पर प्रमुखता से उठाया। मामला सुर्खियों में आने के बाद विभागीय अधिकारियों ने तीनों शिक्षकों का वेतन रोक कर जांच कमेटी बैठा दी।
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लेकिन आरोपियों को बचाने की पूरी कोशिश की गई है। इसलिए जांच और कार्रवाई पर पहले ही सवाल उठाने लगे हैं। मसला ये है कि फर्जी दस्तावेज से नौकरी हासिल करने और पहले की शिकायतों में जांच की पुष्टि और कार्रवाई के आदेश होने के बाद इसी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलभगत से इन्हें वेतन जारी किया जाता रहा।
ऐसे में जब इन्हें ही जांच अधिकारी बनाया जाएगा, तो जांच कितनी पाक-साफ होगी इसे समझा जा सकता है।
केस-1
मिलीभगत से चलती रही नौकरी
समाज कल्याण विभाग से संचालित हरिजन बाल विद्या मंदिर सैदपुर में सहायक अध्यापक के रूप में तैनात देवेंद्र कुमार सिंह पुत्र पौहारीशरण सिंह 1992 से नियम विरुद्ध और फर्जी तरीके से नौकरी कर रहे थे।
जिस कॉलेज से उन्होंने डीपीएड की डिग्री दिखाई थी उसे उस वर्ष में इसे जारी करने की मान्यता ही नहीं थी। नियुक्ति के समय उनके पिता उस स्कूल के प्रबंध समिति के सदस्य थे। साक्ष्य के साथ मामले की शिकायत कई बार विभाग से की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
कमिश्नर से शिकायत के बाद मामले की जांच डीडी समाज कल्याण को सौंपी गई। समाज कल्याण अधिकारी ने मामले की जांच विभाग के सुपरवाइजर मुक्तिनाथ सिंह और सुनील कुमार राय को ही सौंपी गई है।
केस-2
आदेश दरकिनार कर करतीं रही नौकरी
निजामाबाद तहसील के वजीरमलपुर स्थित हरिजन कन्या प्राइमरी विद्यालय में तैनात शिक्षिका आशा देवी पत्नी हरी लाल की वर्ष 2002 में शिकायत हुई। विभाग की ओर से इनके दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया तो पता चला कि इनकी ओर से लगाई गई हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद की डिग्री अमान्य है।
रिपोर्ट मिलने के बाद तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी आरपी शुक्ल ने प्रबंधक को आदेश जारी किया कि शिक्षिका को तुरंत विद्यालय से विरत किया जाए। पर तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी आरपी शुक्ल के यहां से स्थानांतरण के बाद आरोपी शिक्षिका के पति जोकि विद्यालय के प्रबंधक भी थे, उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से वेतन फिर से शुरू करा दिया।
इसकी भी जांच समाज कल्याण अधिकारी ने विभाग के सुपरवाइजर मुक्तिनाथ सिंह और सुनील कुमार राय को ही सौंपी है।
केस-3
नौकरी को कोटे की दुकान एक साथ
समाज कल्याण विभाग से संचालित हरिजन बाल विद्या मंदिर सैदपुर में सहायक अध्यापक के रूप में तैनात राजेश कुमार सिंह ने वर्ष 2003 में अपने मूल निवास गांव बरही तहसील चौरी चौरा जिला गोरखपुर में अपने नाम से कोटे की दुकान आवंटित करा ली।
2014 तक इसे संचालित कराते रहे। इसके साथ ही विद्यालय में 2006 से नौकरी करते हुए वेतन भी पाते रहे। मामले में जिलाधिकारी के निर्देश पर दो सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है। इसमें जिला समाज कल्याण अधिकारी राजीव रत्न सिंह और अपर सांख्यीकि अधिकारी सुनील सिंह को रखा गया है।
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भारतीय मानवाधिकार आयोग संगठन के सदस्य अरुण कुमार सिंह ने निजामाबाद तहसील के वजीरमलपुर स्थित हरिजन कन्या प्राइमरी विद्यालय में तैनात शिक्षिका आशा देवी पत्नी हरीलाल, हरिजन बाल विद्या मंदिर सैदपुर में तैनात शिक्षक देवेंद्र कुमार सिंह, राजेश कुमार सिंह के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों और तथ्यों को छिपाकर नौकरी पाने की शिकायत कई बार की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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पिछले दिनों इसकी शिकायत कमिश्नर तक पहुंची और अमर उजाला ने भी मुद्दे को समय-समय पर प्रमुखता से उठाया। मामला सुर्खियों में आने के बाद विभागीय अधिकारियों ने तीनों शिक्षकों का वेतन रोक कर जांच कमेटी बैठा दी।
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लेकिन आरोपियों को बचाने की पूरी कोशिश की गई है। इसलिए जांच और कार्रवाई पर पहले ही सवाल उठाने लगे हैं। मसला ये है कि फर्जी दस्तावेज से नौकरी हासिल करने और पहले की शिकायतों में जांच की पुष्टि और कार्रवाई के आदेश होने के बाद इसी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलभगत से इन्हें वेतन जारी किया जाता रहा।
ऐसे में जब इन्हें ही जांच अधिकारी बनाया जाएगा, तो जांच कितनी पाक-साफ होगी इसे समझा जा सकता है।
केस-1
मिलीभगत से चलती रही नौकरी
समाज कल्याण विभाग से संचालित हरिजन बाल विद्या मंदिर सैदपुर में सहायक अध्यापक के रूप में तैनात देवेंद्र कुमार सिंह पुत्र पौहारीशरण सिंह 1992 से नियम विरुद्ध और फर्जी तरीके से नौकरी कर रहे थे।
जिस कॉलेज से उन्होंने डीपीएड की डिग्री दिखाई थी उसे उस वर्ष में इसे जारी करने की मान्यता ही नहीं थी। नियुक्ति के समय उनके पिता उस स्कूल के प्रबंध समिति के सदस्य थे। साक्ष्य के साथ मामले की शिकायत कई बार विभाग से की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
कमिश्नर से शिकायत के बाद मामले की जांच डीडी समाज कल्याण को सौंपी गई। समाज कल्याण अधिकारी ने मामले की जांच विभाग के सुपरवाइजर मुक्तिनाथ सिंह और सुनील कुमार राय को ही सौंपी गई है।
केस-2
आदेश दरकिनार कर करतीं रही नौकरी
निजामाबाद तहसील के वजीरमलपुर स्थित हरिजन कन्या प्राइमरी विद्यालय में तैनात शिक्षिका आशा देवी पत्नी हरी लाल की वर्ष 2002 में शिकायत हुई। विभाग की ओर से इनके दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया तो पता चला कि इनकी ओर से लगाई गई हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद की डिग्री अमान्य है।
रिपोर्ट मिलने के बाद तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी आरपी शुक्ल ने प्रबंधक को आदेश जारी किया कि शिक्षिका को तुरंत विद्यालय से विरत किया जाए। पर तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी आरपी शुक्ल के यहां से स्थानांतरण के बाद आरोपी शिक्षिका के पति जोकि विद्यालय के प्रबंधक भी थे, उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से वेतन फिर से शुरू करा दिया।
इसकी भी जांच समाज कल्याण अधिकारी ने विभाग के सुपरवाइजर मुक्तिनाथ सिंह और सुनील कुमार राय को ही सौंपी है।
केस-3
नौकरी को कोटे की दुकान एक साथ
समाज कल्याण विभाग से संचालित हरिजन बाल विद्या मंदिर सैदपुर में सहायक अध्यापक के रूप में तैनात राजेश कुमार सिंह ने वर्ष 2003 में अपने मूल निवास गांव बरही तहसील चौरी चौरा जिला गोरखपुर में अपने नाम से कोटे की दुकान आवंटित करा ली।
2014 तक इसे संचालित कराते रहे। इसके साथ ही विद्यालय में 2006 से नौकरी करते हुए वेतन भी पाते रहे। मामले में जिलाधिकारी के निर्देश पर दो सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है। इसमें जिला समाज कल्याण अधिकारी राजीव रत्न सिंह और अपर सांख्यीकि अधिकारी सुनील सिंह को रखा गया है।