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प्रदर्शन कर नर्सों ने की हड़ताल
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Fri, 26 Feb 2016 11:21 PM IST
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सातवें वेतन आयोग की प्रस्तावित सूची में नाम न होने से नाराज सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल और मेडिकल कालेज चक्रपानपुर की नर्सें शुक्रवार को हड़ताल पर चली गईं। नर्सों ने स्वास्थ्य सेवाओं को ठप कर अस्पताल गेट पर जमकर प्रदर्शन किया और मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।
सुबह नौ बजे अस्पताल पहुंचने के बाद नर्सों ने कागजी कोरम पूरा किया और ठीक दस बजे काम ठप कर हड़ताल पर चली गई। नर्सों की हड़ताल के कारण मरीज इंजेक्शन आदि लगवाने के लिए परेशान रहे। एक तरफ जहां मरीज परेशान रहे वहीं स्टाफ नर्स मांगों के समर्थन में अस्पताल परिसर में प्रदर्शन करती नजर आई।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि स्टाफ नर्स को प्रस्तावित सातवें वेतन आयोग की सूची में शामिल न करना नाइंसाफी है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यहां अस्पताल में सभी महिला कर्मचारियों को आवास भी नहीं मिला है। कुछ को चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का आवास आवंटित कर दिया गया है। जिन्हें आवास नहीं मिला है उन्हें आवासीय भत्ता भी नहीं दिया जा रहा है।
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नियुक्ति को सात साल होने के बाद भी हमें अब तक एरियर नहीं मिला। नाइट एनाउंस, वर्दी, भत्ता भी नहीं दिया जा रहा है। यदि सरकार हमारी मांग तत्काल पूरा नहीं करती है तो आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। प्राचार्य डा. गणेश कुमार का कहना है कि नर्सों को नर्सिंग हास्टल में आवास दिया गया है लेकिन ज्यादातर नर्स उसमें जाने के लिए तैयार नहीं है।
जहां तक एरियर की बात है तो बिल तैयार कर शासन को भेजा गया है। बजट मिलते ही भुगतान कर दिया जाएगा। महिला कर्मचारियों द्वारा सातवें वेतन आयोग के संबंध में जो भी मांगे हैं वह जायज हैं लेकिन यह केंद्र का मामला है इसमें राज्य सरकार या प्राचार्य स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता है। अस्पताल में कार्यरत 120 नर्सों के हड़ताल पर जाने से अस्पताल में भर्ती मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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सुबह नौ बजे अस्पताल पहुंचने के बाद नर्सों ने कागजी कोरम पूरा किया और ठीक दस बजे काम ठप कर हड़ताल पर चली गई। नर्सों की हड़ताल के कारण मरीज इंजेक्शन आदि लगवाने के लिए परेशान रहे। एक तरफ जहां मरीज परेशान रहे वहीं स्टाफ नर्स मांगों के समर्थन में अस्पताल परिसर में प्रदर्शन करती नजर आई।
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प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि स्टाफ नर्स को प्रस्तावित सातवें वेतन आयोग की सूची में शामिल न करना नाइंसाफी है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यहां अस्पताल में सभी महिला कर्मचारियों को आवास भी नहीं मिला है। कुछ को चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का आवास आवंटित कर दिया गया है। जिन्हें आवास नहीं मिला है उन्हें आवासीय भत्ता भी नहीं दिया जा रहा है।
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नियुक्ति को सात साल होने के बाद भी हमें अब तक एरियर नहीं मिला। नाइट एनाउंस, वर्दी, भत्ता भी नहीं दिया जा रहा है। यदि सरकार हमारी मांग तत्काल पूरा नहीं करती है तो आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। प्राचार्य डा. गणेश कुमार का कहना है कि नर्सों को नर्सिंग हास्टल में आवास दिया गया है लेकिन ज्यादातर नर्स उसमें जाने के लिए तैयार नहीं है।
जहां तक एरियर की बात है तो बिल तैयार कर शासन को भेजा गया है। बजट मिलते ही भुगतान कर दिया जाएगा। महिला कर्मचारियों द्वारा सातवें वेतन आयोग के संबंध में जो भी मांगे हैं वह जायज हैं लेकिन यह केंद्र का मामला है इसमें राज्य सरकार या प्राचार्य स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता है। अस्पताल में कार्यरत 120 नर्सों के हड़ताल पर जाने से अस्पताल में भर्ती मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।