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सरकारी बंगलों नेताओं का कब्जा, प्रशासन लाचार

Sat, 30 Jun 2018 11:50 PM IST
Azamgrah
Azamgrah Updated Sat, 30 Jun 2018 11:50 PM IST
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Occupation of government bungalows, administration helpless
रैदोपुर स्थित अंग्रेजों के जमाने का सरकारी बंगला, जिस पर अवैध कब्जा है। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
आजमगढ़। सरकारी बंगलों पर कब्जा करने में जिले के नेता भी पीछे नहीं है। इसके लिए वे हर तरह का दांवपेंच अपना रहे हैं। किसी के पट्टे की अवधि समाप्त हो चुकी है तो किसी ने इसे बेच दिया है तो कोई ऐसे ही इन बंगलों में काबिज है। ये बंगले उन्हें इस शर्त के साथ आवंटित हुए थे कि जरूरत होने पर वे इसे खाली कर देंगे, लेकिन राजनीतिक पकड़ के कारण आज तक इन्हें खाली नहीं कराया जा सका।
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शासन के निर्देश पर एक बंगले की हाल ही में हुई जांच में आवंटन निरस्त करने की संस्तुति की गई है। इससे सरकारी बंगलों में अवैध ढंग से रहनेवालों में खलबली है।
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अंग्रेजों के जमाने में सरकारी उपयोग के लिए शहर में पांच बंगले बनाए गए थे। इसमें दो ध्वस्त हो चुके हैं। तीन बंगलों पर भाजपा नेता एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी जनार्दन सिंह गौतम, कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री दलसिंगार यादव और जिले के पूर्व डीजीपी स्व. रामधीन राम के परिजन काबिज हैं।
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एसडीएम सदर प्रकाश चंद्र ने बताया कि 1927 में इन इमारतों को पट्टे पर दिया गया था। बाद में 50 साल के लिए रीन्यूवल कर दिया गया। वर्तमान में सभी के आवंटन की अवधि खत्म हो चुकी है। इन्हें इस शर्त के साथ आवंटन किया गया था कि प्रशासन को जरूर पड़ने पर उन्हें इसे खाली करना पड़ेगा।

लेकिन राजनीति ठसक के कारण ये लोग न सिर्फ इस पर काबिज हैं बल्कि एक बंगले का तो बैनामा भी कर दिया गया है। नजूल की जमीन का बैनामा कैसा हुआ, इसे रोकने की कोशिश क्यों नहीं हुई इस बारे में संबंधित विभाग के पास भी कोई जवाब नहीं है। आवंटन की अवधि खत्म होने के बाद आवंटी कोर्ट की शरण में पहुंचे और बंगले पर अभी तक काबिज हैं।

इस बीच जनार्दन सिंह गौतम ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बंगले (मकान नंबर-6390) का आवंटन 99 साल के लिए अपने नाम करने की बात कही। इस पर मुख्यमंत्री के सचिव मृत्युंजय कुमार नारायण ने डीएम से एक सप्ताह के भीतर जांच कर आख्या मांगी है। मामले की जांच एसडीएम सदर को सौंपी गई। एसडीएम ने जांच के बाद रिपोर्ट सौंप दी है। उनका कहना है कि पूर्व आवंटी बंगले पर गलत तरीके से काबिज हैं। उन्हें बंगला आवंटित करने का कोई औचित्य नहीं है।
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आवंटन की गुहार लगाने से ही मुकरे
भाजपा नेता जर्नादन सिंह गौतम ने कहा कि कोर्ट में सरकार ने मान लिया है कि बंगला मेरा है। मैं लोकसभा चुनाव में टिकट का सशक्त दावेदार हूं। मेरी छवि खराब करने की कोशिश का जा रही है। उन्होंने यहा तक कहा कि मैंने आवंटन के लिए सीएम को कोई पत्र नहीं भेजा है। जबकि इनके आवेदन पर ही मामले की जांच हो रही है।



1927 में तीन बंगलों का आवंटन किया गया था। बाद में 50 साल के लिए इसे बढ़ा दिया गया। अवधि खत्म होने के बाद भी ये लोग यहां काबिज हैं। एक बंगले की जांच मिली थी। इसे खाली कराने की संस्तुति की रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेज दी गई है।
प्रकाश चंद्र, एसडीएम सदर
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