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इंग्लैंड में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़ फूलों की खेती कर महका रहे जीवन की बगिया
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चिलबिला गांव में बने पालीहाउस में किसान अभिनव सिंह द्वारा की गई जरबेरा पुष्प की खेती।
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। साफ्टवेयर में कुछ भी साफ्ट हो या न हो लेकिन चिलबिला के सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिनव सिंह ने जो किया वह सुंदर भी है और सुगंधित भी। माइक्रोसाफ्ट जैसी कंपनी की नौकरी छोड़कर इग्लैंड से लौटा यह इंजीनियर ने गांव में फूलों की खेती करके लाखों रुपये सालाना कमा रहा है। उनकी वजह से इलाके के 45 परिवारों को रोजगार भी मिला है।
पल्हना ब्लाक के चिलबिला गांव निवासी अभिनव सिंह को वर्ष 2011 में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी मिल गई। कंपनी ने उन्हें इंग्लैंड के रीडिंग शहर भेजा। उनको तकरीबन चार लाख रुपये प्रति माह वेतन मिलते थे। लेकिन उनका मन तो गांव में रमता था। वर्ष 2016 में वह गांव आए तो फिर इंग्लैंड जाने का उनका मन ही नहीं हुआ। वह नई तरह की खेती करने के बारे में सोचने लगे। लोगों ने उनको काफी समझाया लेकिन उन्होंने खेती करने की ठान ली थी। काफी जानकारी जुटाने के बाद जरबेरा पुष्पों की खेती करने का निर्णय किया। उन्होंने करीब डेढ़ एकड़ में पॉलीहाउस का निर्माण 2020 में कराया। इस प्रोजेक्ट में कई तरह की अड़चनें आईं लेकिन उनका हौसला कम नहीं हुआ। इसमें उन्होंने जरबेरा के 25000 पौधे लगाए। इसमें पॉली हाउस बनाने और पौधे लगाने में 58 लाख की लागत आई। औद्यानिक विकास विभाग से 50 फीसद का अनुदान मिला। अभिनव ने बताया कि जरबेरा का एक पौधा लगाने में 35 रुपये का खर्च आता है। जरबेरा की खेती पूर्वांचल में केवल वाराणसी में होती है लेकिन उनकी जरबेरा की खेती का पॉली हाउस सबसे बड़ा है।
प्रतिदिन 3000 फूलों का उत्पादन
आजमगढ़। अभिनव सिंह ने बताया कि जरबेरा के पौधे में तीन माह बाद फूल आने लगते हैं। पौधे पांच साल तक लगातार फूल देते हैं। उनके यहां रोजाना 3000 फूलों का उत्पादन हो रहा है। चार रुपये प्रति पुष्प की की औसत दर से बिक्री होती है। उनके पॉलीहाउस में लाल, सफेद, पीला, गुलाबी, नारंगी रंग के जरबेरा के फूल हैं। उनसे इससे पौने चार लाख रुपये की कमाई हो चुकी है। वाराणसी समेत छह जिलों में फूलों की आपूर्ति हो रही है। गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया व लखनऊ में इसकी मांग है।
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प्रदेश में मिला प्रथम स्थान
आजमगढ़। प्रभारी जिला उद्यान्न अधिकारी दिनेश सिंह ने बताया कि राज्य भवन में प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। इसमें प्रदेश के सभी पॉलीहाउस में खेती करने वाले किसान शामिल हुए थे। प्रदेश में सबसे अच्छा जरबेरा पुष्प की खेती करने के लिए अभिनव सिंह को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। इसके लिए उन्हें सम्मानित किया गया। (संवाद न्यूज एजेंसी)
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पल्हना ब्लाक के चिलबिला गांव निवासी अभिनव सिंह को वर्ष 2011 में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी मिल गई। कंपनी ने उन्हें इंग्लैंड के रीडिंग शहर भेजा। उनको तकरीबन चार लाख रुपये प्रति माह वेतन मिलते थे। लेकिन उनका मन तो गांव में रमता था। वर्ष 2016 में वह गांव आए तो फिर इंग्लैंड जाने का उनका मन ही नहीं हुआ। वह नई तरह की खेती करने के बारे में सोचने लगे। लोगों ने उनको काफी समझाया लेकिन उन्होंने खेती करने की ठान ली थी। काफी जानकारी जुटाने के बाद जरबेरा पुष्पों की खेती करने का निर्णय किया। उन्होंने करीब डेढ़ एकड़ में पॉलीहाउस का निर्माण 2020 में कराया। इस प्रोजेक्ट में कई तरह की अड़चनें आईं लेकिन उनका हौसला कम नहीं हुआ। इसमें उन्होंने जरबेरा के 25000 पौधे लगाए। इसमें पॉली हाउस बनाने और पौधे लगाने में 58 लाख की लागत आई। औद्यानिक विकास विभाग से 50 फीसद का अनुदान मिला। अभिनव ने बताया कि जरबेरा का एक पौधा लगाने में 35 रुपये का खर्च आता है। जरबेरा की खेती पूर्वांचल में केवल वाराणसी में होती है लेकिन उनकी जरबेरा की खेती का पॉली हाउस सबसे बड़ा है।
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प्रतिदिन 3000 फूलों का उत्पादन
आजमगढ़। अभिनव सिंह ने बताया कि जरबेरा के पौधे में तीन माह बाद फूल आने लगते हैं। पौधे पांच साल तक लगातार फूल देते हैं। उनके यहां रोजाना 3000 फूलों का उत्पादन हो रहा है। चार रुपये प्रति पुष्प की की औसत दर से बिक्री होती है। उनके पॉलीहाउस में लाल, सफेद, पीला, गुलाबी, नारंगी रंग के जरबेरा के फूल हैं। उनसे इससे पौने चार लाख रुपये की कमाई हो चुकी है। वाराणसी समेत छह जिलों में फूलों की आपूर्ति हो रही है। गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया व लखनऊ में इसकी मांग है।
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प्रदेश में मिला प्रथम स्थान
आजमगढ़। प्रभारी जिला उद्यान्न अधिकारी दिनेश सिंह ने बताया कि राज्य भवन में प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। इसमें प्रदेश के सभी पॉलीहाउस में खेती करने वाले किसान शामिल हुए थे। प्रदेश में सबसे अच्छा जरबेरा पुष्प की खेती करने के लिए अभिनव सिंह को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। इसके लिए उन्हें सम्मानित किया गया। (संवाद न्यूज एजेंसी)