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सहकारी समितियों पर ताला, डीएपी नदारद

Thu, 03 Nov 2022 12:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 03 Nov 2022 12:03 AM IST
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Lock on cooperatives, DAP missing
अहरौला के हंसनाडीह स्थित सहकारी समिति है बंद। संवाद - फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। रबी के बुआई का सीजन शुरू हो चुका है। लेकिन हाल यह है कि समितियों से उर्वरक गायब है। किसान परेशान हैं। उर्वरक की नई रैक न आने से विभाग किसी प्रकार पुरानी रैक से काम चला रहा है। कुछेक समितियों को छोड़ दिया जाए तो बाकी सब पर ताला लटका हुआ है।
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जनपद में इस बार दो लाख 52 हजार 183 हेक्टेयर में रबी की फसलों की बुआई के आच्छादन लक्ष्य है। फसल की बुआई के समय किसान खेतों में उर्वरक डालते हैं, जिससे की पैदावार अच्छी हो। जो खेत खाली थे उसमें किसान आलू, सरसों की बुआई भी कर रहे हैं। समितियों पर ताला लटकने से वह बाजारों से ऊंचे दामों पर उर्वरक खरीदने का मजबूर हैं। विभाग द्वारा रबी सीजन के लिए उर्वरक का डिमांड भेजा गया लेकिन अभी तक उर्वरक विभाग को उपलब्ध नहीं हो पाया है। पुराने बचे उर्वरक को कुछेक समितियों पर भेजा जा रहा है लेकिन वह किसानों की मांग से काफी कम हैं। किसानों को मजबूरन बाजारों से ऊंचे दामों पर उर्वरक खरीदना पड़ रहा है। जनपद में कुल 238 साधन सहकारी समितियां हैं। इनमें से मात्र 111 समितियां ही काम कर रही हैं। बाकी के कारण बंद पड़ी हुई हैं।
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सरायमीर : विकास खंड मिर्जापुर में 11 साधन सहकारी समितियों की स्थापना की गई थी। इनमें से छह समितियां राजापुर सिकरौर, बस्ती, अबडीहा, मिर्जापुर, पाइंदापुर, सरायमीर निष्क्रिय है। केवल पांच समितियां पेंड्रा, फिरुद्दूनपुर, संजरपुर, मधुरामपुर व खुटौली ही सक्रिय हैं। साधन सहकारी समिति मधुरामपुर व खुटौली के सचिव शंकर यादव ने बताया कि डिमांड भेजी गई है अभी डीएपी नहीं आई है। संजरपुर समिति के सचिव राधेश्याम रावत ने बताया कि संजरपुर में डीएपी खाद 28 अक्तूबर को 390 बोरी आई थी। सभी 390 बोरी का वितरण 29 व 30 अक्तूबर को 196 किसानों में कर दिया गया है। पुन: डीएपी की मांग भेजी गई, अभी नहीं आई है।
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एक सप्ताह पहले आई थी उर्वरक
अहरौला। क्षेत्र के हंसनाडीह स्थित सहकारी साधन समिति के सचिव चंद्रशेखर यादव ने बताया कि एक सप्ताह पहले यहां 350 बोरी डीएपी आई थी। इसे किसानों में बांटी गई। इस समय समिति पर डीएपी नहीं है। इसके अलावा यूरिया उपलब्ध है। डीएपी न होने से समिति बंद है। वहीं, सहकारी समिति रेडहा के सचिव अमित सिंह ने बताया कि एक सप्ताह पहले 500 बोरी डीएपी आई थी। अगले सप्ताह डीएपी आने की संभावना है।
वर्षों से बंद है पिचरी साधन सहकारी समिति
अमिलो। किसान साधन सहकारी समिति पिचरी पर उर्वरक वर्षों से नहीं आती है। समिति भवन पूरी तरह से खंडहर हो गया है। भवन के निर्माण की दरकार है। इस साधन सहकारी समिति में नौ ग्राम पंचायतें आती हैं। सचिव विनोद सिंह ने बताया कि वर्तमान में कोऑपरेटिव बैंक भी बंद है। किसान खाद, बीज बाजार से खरीदने को विवश है। भवन निर्माण के लिए बजट नहीं है। सपा सरकार में चालीस लाख रुपये का बजट आया था, लेकिन वापस चला गया। लगभग दस साल से यह समिति बंद पड़ी हैं। बताया कि जिलाधिकारी को लिख कर भवन निर्माण के लिए भूमि व बजट की व्यवस्था नए सिरे से करने की माग की गई है।

अधिकारी बोले-
डीएपी का नया रैक अभी नहीं आया है। इसके लिए पत्र लिखा गया है। तीन-चार दिन बाद आने की उम्मीद है। स्टाक में पहले से पड़ी डीएपी को समितियों पर भेजा जा रहा है। लेकिन उससे किसानों की मांग पूरी नहीं हो पा रही है। - नरेंद्र सिंह यादव, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता।
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