आजमगढ़। उप्र साहित्य सभा व तमसा काव्य मंच के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार देर शाम मारवाड़ी धर्मशाला परिसर में होली मिलन समारोह और कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान साहित्यकारों ने अपने प्रस्तुतियों से समा बांध दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। विजयेंद्र करुण ने स्वरचित सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों का स्वागत डॉ. रुद्रनाथ चौबे ‘रुद्र’, रत्नेश राय, संतोष पांडेय, शालिनी राय और रितेश पांडेय ने किया। अध्यक्ष दिनेश श्रीवास्तव ‘दानिश’ ने विषय प्रवर्तन करते हुए ‘साहित्य में होली का स्थान’ विषय पर चर्चा की प्रस्तावना रखी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. प्रभुनाथ सिंह ‘मयंक’ ने ऋग्वेद काल से लेकर वर्तमान तक होली के उत्सव के स्वरूप, उसके नामकरण और विदेशों में मनाए जाने की परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके बाद कवि गोष्ठी हुई। उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के मंडल संयोजक संजय कुमार पांडे ‘सरस’ ने कहा कि होली आपसी भाईचारे और सद्भाव का संदेश देता है। तमसा काव्य मंच के अध्यक्ष डॉ. ईश्वर चंद्र त्रिपाठी ने होली को गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक बताते हुए अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मऊ से आए कवि सुरेंद्र सिंह ‘चांस’ ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. प्रवेश सिंह ने आयोजन के लिए बधाई दी। कवि गोष्ठी में पंडित जन्मेजय पाठक, पंडित हरिहर प्रसाद पाठक, अमित श्रीवास्तव एडवोकेट, बृज बाला, सपना बनर्जी, राजेश आदि ने भाग लिया। समारोह के अंत में कुछ साहित्यकारों को संस्था में नई जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं। उत्तर प्रदेश साहित्य सभा में राकेश पांडे ‘सागर’ को उपाध्यक्ष, बृज बाला को संगठन मंत्री तथा संदीप गांधी ‘निहाल’ को सह मंत्री बनाया गया। वहीं तमसा काव्य मंच में महामंत्री का दायित्व भी सौंपा गया।