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Azamgarh News: लाइसेंस आयुर्वेद का, इलाज एलोपैथ का, आयुर्वेद के डॉक्टर भी कर रहे ऑपरेशन

Fri, 12 Sep 2025 12:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 12 Sep 2025 12:03 AM IST
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License is of Ayurveda, treatment is of allopathy, Ayurveda doctors are also doing operations
आजमगढ़। जिले में आयुर्वेद विधा में पंजीकरण कराने वाले कई अस्पताल नियमों की अनदेखी करते हुए एलोपैथिक इलाज और ऑपरेशन तक कर रहे हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग के मानकों के अनुसार आयुर्वेद डॉक्टर एलोपैथ की कुछ दवाएं तो लिख सकते हैं, लेकिन ऑपरेशन करने की अनुमति नहीं है।
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जिले में ऐसे अस्पतालों में अब तक दो मरीजों की मौत भी हो चुकी है। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं। आकड़ों पर नजर डालें तो जिले में 49 आयुर्वेद और 11 यूनानी अस्पताल पंजीकृत हैं। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. वीरेंद्र ने बताया कि शासन की ओर से 9 अक्तूबर 2015 को जारी अधिसूचना के तहत आयुर्वेदिक चिकित्सक केवल प्रजनन, शिशु, नवजात और गर्भवती महिलाओं का उपचार एलोपैथ पद्धति से कर सकते हैं, लेकिन उन्हें ऑपरेशन करने की अनुमति नहीं है। अगर आयुर्वेद डॉक्टर ऑपरेशन कर रहा है तो यह पूरी तरह से नियमविरुद्ध और दंडनीय कार्य है। ऐसे मामलों में विभाग कार्रवाई करेगा।
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पथरी ऑपरेशन के बाद हुई थी महिला की मौत
अंबारी। फूलपुर कोतवाली क्षेत्र के जगदीशपुर गांव निवासी माधुरी विश्वकर्मा का ऑपरेशन यश्लोक क्लिनिक में किया गया था। यह अस्पताल आयुर्वेद में पंजीकृत था। हालत बिगड़ने पर 17 अगस्त की भोर में उनकी मौत हो गई। यह क्लीनिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से महज 50 मीटर दूरी पर किराए के मकान में चल रहा था।
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बाद में डॉक्टर ने परिजनों से समझौता कर लिया और शव का अंतिम संस्कार करा दिया। अपर चिकित्साधिकारी अरविंद चौधरी के नेतृत्व में स्वास्थ्य टीम ने मौके पर पहुंचकर केवल क्लिनिक के लेबर रूम को सील किया। जबकि गली में संचालित यश्लोक अस्पताल, जहां ऑपरेशन हुआ था, उसे सील नहीं किया गया। चिकित्सक पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
जच्चा बच्चा की मौत के बाद हुआ था हंगामा
आजमगढ़। मोहब्बतपुर निवासी गुंजा यादव (23) अपने मायके में रह रही थी। मई 2025 में सुबह छह बजे प्रसव पीड़ा होने पर उन्हें मुबारकपुर थाना क्षेत्र के जमुड़ी बाजार स्थित एक क्लीनिक में भर्ती कराया गया। कुछ ही घंटों बाद महिला ने मृत शिशु को जन्म दिया। शिशु के जन्म के बाद उपचार चल ही रहा था कि महिला की भी दम तोड़ दिया। यह अस्पताल भी आयुर्वेद में पंजीकृत था। हालांकि दोनों पक्षों ने आपस में समझौता कर लिया था। वहीं, विभाग भी इस तरफ कोई कार्रवाई नहीं की।

आयुर्वेद विधा के डॉक्टर प्रजनन, शिशु, नवजात, गर्भवती महिलाएं उपचार एलोपैथ विधा से कर सकते हैं, लेकिन ऑपरेशन नहीं कर सकते हैं। यदि ऐसा कोई करता है तो वो गलत है। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. वीरेंद्र, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी।
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