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कहीं जेलर की मदद करना तो मानसिंह को नहीं पड़ा भारी!
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Fri, 26 Jan 2018 12:36 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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जेल परिसर में सरकारी आवास पर बंदी रक्षक मानसिंह पर हुए हमले में जांच में पता चला कि करीब डेढ़ माह पूर्व जेलर एक बंदी रक्षक के मोबाइल पर बात करने की सूचना पर उसे डांट फटकार रहे थे।
तभी बंदी जेलर के साथ बदसलूकी करते हुए उसे बैरक में घसीटकर ले जाने लगे। इस दौरान मानसिंह ने बंदियों के चंगुल से जेलर को छुड़ाया था। पुलिस इस घटना को प्रमुख आधार बनाकर जांच कर रही है।
जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम ने बताया कि जेल के बैरक नंबर तीन में निरुद्ध एक बदमाश करीब डेढ़ माह पूर्व किसी से फोन पर बात कर रहा था। उसे फोन एक बंदी रक्षक ने उपलब्ध कराई थी।
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इसकी जानकारी पर एक जेलर बैरक नंबर तीन के पास पहुंचे और बंदी रक्षक को डांटने लगे। इस दौरान कुछ और बंदी जुट गए और जेलर को घसीटते हुए बैरक में ले जाने लगे। तभी वहां पहुंचे मानसिंह यादव सहित अन्य बंदी रक्षक ने उन्हें बचाया।
इस घटना के बाद से और सख्ती बरती जाने लगी थी, जो बंदियों को नागवार लगी। 22 जनवरी की रात मानसिंह अपनी ड्यूटी समाप्त कर जेल परिसर में बने सरकारी आवास में चला गया। रात करीब साढ़े आठ बजे एक बाइक पर सवार दो बदमाश पहुंचे और मोबाइल की बात पर विवाद करते हुए मानसिंह को गोली मार दी।
गहन जांच पड़ताल के दौरान पुलिस ने बदमाशों की पहचान तो कर ली है, लेकिन घटना के मुख्य वजह का पता अभी तक नहीं चल सका है।
पुलिस की जांच में जेल के भीतर करीब डेढ़ माह पूर्व हुए विवाद को भी प्रमुखता से रखा गया है। सच जानने के लिए संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। - अजय कुमार साहनी, एसपी
मोबाइल के खंगाले जा रहे हैं रिकार्ड
आजमगढ़। बंदी रक्षक मानसिंह यादव पर हुए हमले की घटना के बाद से पुलिस जेल में लगातार तलाशी अभियान चला रही है। दो दिनों के ताबड़तोड़ छापेमारी के दौरान बंदियों के बैरकों से कुल 22 मोबाइल और पांच सिम बरामद हुए।
ऐसे में जेल के भीतर से मिलने वाली मोबाइलों का कॉल डिटेल सर्विलांस सेल की मदद से निकाला जा रहा। ताकि ये पता लगाया जा सके कि जेल में निरुद्ध बदमाश भीतर से आखिर किन-किन लोगों से बातचीत कर रहे थे।
इस बात के पीछे कोई बड़ी घटना को अंजाम देने की साजिश तो नहीं रची जा रही थी। बंदियों के मोबाइल से जिन-जिन लोगों को एक या उससे अधिक बार फोन किया गया है। उन लोगों से भी पुलिस पूछताछ करेगी।
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तभी बंदी जेलर के साथ बदसलूकी करते हुए उसे बैरक में घसीटकर ले जाने लगे। इस दौरान मानसिंह ने बंदियों के चंगुल से जेलर को छुड़ाया था। पुलिस इस घटना को प्रमुख आधार बनाकर जांच कर रही है।
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जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम ने बताया कि जेल के बैरक नंबर तीन में निरुद्ध एक बदमाश करीब डेढ़ माह पूर्व किसी से फोन पर बात कर रहा था। उसे फोन एक बंदी रक्षक ने उपलब्ध कराई थी।
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इसकी जानकारी पर एक जेलर बैरक नंबर तीन के पास पहुंचे और बंदी रक्षक को डांटने लगे। इस दौरान कुछ और बंदी जुट गए और जेलर को घसीटते हुए बैरक में ले जाने लगे। तभी वहां पहुंचे मानसिंह यादव सहित अन्य बंदी रक्षक ने उन्हें बचाया।
इस घटना के बाद से और सख्ती बरती जाने लगी थी, जो बंदियों को नागवार लगी। 22 जनवरी की रात मानसिंह अपनी ड्यूटी समाप्त कर जेल परिसर में बने सरकारी आवास में चला गया। रात करीब साढ़े आठ बजे एक बाइक पर सवार दो बदमाश पहुंचे और मोबाइल की बात पर विवाद करते हुए मानसिंह को गोली मार दी।
गहन जांच पड़ताल के दौरान पुलिस ने बदमाशों की पहचान तो कर ली है, लेकिन घटना के मुख्य वजह का पता अभी तक नहीं चल सका है।
पुलिस की जांच में जेल के भीतर करीब डेढ़ माह पूर्व हुए विवाद को भी प्रमुखता से रखा गया है। सच जानने के लिए संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। - अजय कुमार साहनी, एसपी
मोबाइल के खंगाले जा रहे हैं रिकार्ड
आजमगढ़। बंदी रक्षक मानसिंह यादव पर हुए हमले की घटना के बाद से पुलिस जेल में लगातार तलाशी अभियान चला रही है। दो दिनों के ताबड़तोड़ छापेमारी के दौरान बंदियों के बैरकों से कुल 22 मोबाइल और पांच सिम बरामद हुए।
ऐसे में जेल के भीतर से मिलने वाली मोबाइलों का कॉल डिटेल सर्विलांस सेल की मदद से निकाला जा रहा। ताकि ये पता लगाया जा सके कि जेल में निरुद्ध बदमाश भीतर से आखिर किन-किन लोगों से बातचीत कर रहे थे।
इस बात के पीछे कोई बड़ी घटना को अंजाम देने की साजिश तो नहीं रची जा रही थी। बंदियों के मोबाइल से जिन-जिन लोगों को एक या उससे अधिक बार फोन किया गया है। उन लोगों से भी पुलिस पूछताछ करेगी।