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पृथ्वी पर उपलब्ध भूजल के मुकाबले भारत में 4 फीसदी शुद्ध जल उपलब्ध : कुलभूषण
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आजमगढ़। राजकीय पॉलिटेक्निक के शिक्षक और जिला विज्ञान क्लब समन्वयक, राज्य भूजल पुरस्कार प्राप्त इंजीनियर कुलभूषण सिंह ने ऑडियो-विजुअल शो के माध्यम से बताया कि पृथ्वी पर उपलब्ध भूजल के मुकाबले भारत में मात्र 4 प्रतिशत ही शुद्ध जल उपलब्ध है, जबकि देश की जनसंख्या विश्व की जनसंख्या का 18 प्रतिशत है।
वे शनिवार को राजकीय पॉलिटेक्निक में जल संरक्षण की समस्या और उसके समाधान पर ऑडियो-विजुअल शो में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने चेतावनी दी कि वर्षा जल का केवल 8 प्रतिशत ही भूगर्भ जल में रिचार्ज हो पाता है, जबकि अधिकतर वर्षा जल पक्की छतों, नालियों और सड़कों से होकर समुद्र में चला जाता है। कार्यशाला में छात्रों को कृषि में जल संरक्षण के उपायों के बारे में भी बताया गया। बताया गया कि ड्रिप सिंचाई में 60 से 70 प्रतिशत पानी बचाया जा सकता है। एक किलोग्राम चावल उगाने में 2000 से 3000 लीटर पानी लगता है, इसलिए दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने की सलाह दी गई।
इंजीनियर कुलभूषण सिंह ने रोजमर्रा के जीवन में पानी की बचत के लिए कई उपाय बताए। उन्होंने कहा कि टंकी के ओवरफ्लो से प्रति मिनट 100 लीटर पानी बर्बाद होता है। कार धोने में सबमर्सिबल पंप से 10 मिनट में 1000 लीटर पानी खर्च होता है, जबकि बाल्टी में पानी भरकर कार धोने से 900 लीटर पानी बचाया जा सकता है। टपकती नल की एक बूंद से प्रतिदिन 5 लीटर पानी बर्बाद होता है। 100 वर्ग फीट की छत पर रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाकर लगभग 1 लाख लीटर पानी भूगर्भ में रिचार्ज किया जा सकता है। छात्रों को नदियों और तालाबों में प्लास्टिक और पॉलीथिन फेंकने से बचने और इनसे ईको-ब्रिक बनाने की जानकारी भी दी गई।
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अंत में छात्रों से जल संरक्षण के लिए रिड्यूस, रियूज, रिचार्ज और रिसाइकल की शपथ भी दिलाई गई। संचालन मोहम्मद आदिल ने किया। अध्यक्षता डीएफओ आकांक्षा जैन ने की। इस दौरान अंशु अस्थाना, अरविंद सिंह, एनसीसी कैप्टन पंकज सिंह, डीएवी डिग्री कॉलेज के एनसीसी एवं एनएसएस के छात्र, बेसिक शिक्षा के शिक्षक निखिल, अंजनी मिश्रा और पंकज आदि उपस्थित रहे।
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वे शनिवार को राजकीय पॉलिटेक्निक में जल संरक्षण की समस्या और उसके समाधान पर ऑडियो-विजुअल शो में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने चेतावनी दी कि वर्षा जल का केवल 8 प्रतिशत ही भूगर्भ जल में रिचार्ज हो पाता है, जबकि अधिकतर वर्षा जल पक्की छतों, नालियों और सड़कों से होकर समुद्र में चला जाता है। कार्यशाला में छात्रों को कृषि में जल संरक्षण के उपायों के बारे में भी बताया गया। बताया गया कि ड्रिप सिंचाई में 60 से 70 प्रतिशत पानी बचाया जा सकता है। एक किलोग्राम चावल उगाने में 2000 से 3000 लीटर पानी लगता है, इसलिए दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने की सलाह दी गई।
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इंजीनियर कुलभूषण सिंह ने रोजमर्रा के जीवन में पानी की बचत के लिए कई उपाय बताए। उन्होंने कहा कि टंकी के ओवरफ्लो से प्रति मिनट 100 लीटर पानी बर्बाद होता है। कार धोने में सबमर्सिबल पंप से 10 मिनट में 1000 लीटर पानी खर्च होता है, जबकि बाल्टी में पानी भरकर कार धोने से 900 लीटर पानी बचाया जा सकता है। टपकती नल की एक बूंद से प्रतिदिन 5 लीटर पानी बर्बाद होता है। 100 वर्ग फीट की छत पर रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाकर लगभग 1 लाख लीटर पानी भूगर्भ में रिचार्ज किया जा सकता है। छात्रों को नदियों और तालाबों में प्लास्टिक और पॉलीथिन फेंकने से बचने और इनसे ईको-ब्रिक बनाने की जानकारी भी दी गई।
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अंत में छात्रों से जल संरक्षण के लिए रिड्यूस, रियूज, रिचार्ज और रिसाइकल की शपथ भी दिलाई गई। संचालन मोहम्मद आदिल ने किया। अध्यक्षता डीएफओ आकांक्षा जैन ने की। इस दौरान अंशु अस्थाना, अरविंद सिंह, एनसीसी कैप्टन पंकज सिंह, डीएवी डिग्री कॉलेज के एनसीसी एवं एनएसएस के छात्र, बेसिक शिक्षा के शिक्षक निखिल, अंजनी मिश्रा और पंकज आदि उपस्थित रहे।