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Azamgarh News: लालबिहारी की कहानी लिख रहे इम्तियाज हुसैन

Sat, 28 Oct 2023 11:22 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 28 Oct 2023 11:22 PM IST
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Imtiaz Hussain is writing the story of Lal Bihari
आजमगढ़। लेखपालों ने लाल बिहारी को सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया था। उनके मृतक से जीवित होने तक की कहानी पर फिल्म कागज बन चुकी है। अब उनके जीवन पर दूसरी फिल्म बनने जा रही है, जो 25 करोड़ रुपये के मुआवजे के लिए उनके संघर्ष पर आधारित होगी। इम्तेयाज हुसैन सवाल उठाना चाहते हैं कि मानव के जीवन की कीमत क्या महज 25 करोड़ है।
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लाल बिहारी 30 जुलाई 1976 से 30 जून 1994 तक सरकारी अभिलेखों के मुताबिक मृत रहे। लंबी लड़ाई के बाद प्रशासन ने जून 1994 को उनके अस्तित्व को स्वीकार कर लिया, जीवित घोषित कर दिया। मगर प्रशासन ने इनके मृत होने की फाइल की गायब कर दी। लालबिहारी ने अपने काे जिंदा साबित करने के लिए सितंबर 1986 में विधान सभा में कागज के गोले फेंके। वर्ष 1988 में पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह व कांशीराम के खिलाफ इलाहाबाद से उपचुनाव लड़ा। वर्ष 1989 में पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी के खिलाफ लोकसभा का चुनाव लगा लेकिन न्याय नहीं मिला। उन्होंने अपने भतीजे का अपहरण तक किया ताकि उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। लंबे संघर्ष के लालबिहारी मृतक अभिलेखों में जिंदा हो गए।
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उन्होंने मृतक संघ बनाकर दस्तावेजों में मृत घोषित हो चुके लोगों को जिंदा कराने का संकल्प लिया। अब तक लगभग 1000 से अधिक लोगों को वह कागज में जिंदा करा चुके हैं। लगभग 47 साल की लंबी लड़ाई लड़ी।
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उन्होंने उच्च न्यायालय में 25 करोड़ रुपये के मुआवजे का मुकदमा किया। उच्च न्यायालय ने उनके इस मुकदमे को खारिज करते हुए 10 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया। उसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने उनके ऊपर लगे जुर्माना के साथ ही मुकदमे को भी खारिज कर दिया। उनके जीवन संघर्षों पर फिल्म अभिनेता सलमान खान और सतीश कौशिक कागज फिल्म बनाई। इस फिल्म को लेकर लाल बिहारी नाराजगी जता चुके हैं। उनका कहना है कि फिल्म में उनको गलत तरीके से दिखाया किया गया है। अब उनके जीवन पर दूसरी फिल्म बनने की तैयारी में है। जिसकी कहानी मशहूर फिल्म लेखक इम्तियाज हुसैन लिख रहे हैं। सह निर्देशक विजय भारत होंगे।
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फिल्म निर्माता सतीश कौशिक ने हमारे ऊपर जो फिल्म बनाई थी उसमें उन्होंने मेरे चरित्र को बदल दिया था। उस फिल्म से संतुष्ट नहीं था। उसमें हमारे जीवन के कई पहलुओं को ठीक से दिखाया नहीं गया था। अब दूसरी फिल्म बन रही है जिसे इम्तियाज हुसैन लिख रहे हैं।-लालबिहारी

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हमारी कहानी इस पर आधारित है कि क्या मानव के जीवन का मूल्य महज 25 करोड़ है? जिसने अपना पूरा जीवन खुद को अभिलेखों में जिंदा होने के लिए लगा दिया। क्या वह 25 करोड़ मुआवजे का भी हकदार नहीं है? इसमें हम लालबिहारी के अभिलेखों में जिंदा होने के बाद की कहानी को भी शामिल कर रहे हैं।
इम्तियाज हुसैन, लेखक
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