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अवैध कब्जा हुई पोखरी की हुई मापी, किया सीमांकन
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आजमगढ़। मुबारकपुर कस्बा में स्थित दो पोखरियों के अस्तित्व बहाली की कवायद शुरू हो गई है। हाईकोर्ट के आदेश पर तहसील प्रशासन कवायद में जुट गया है। इसके तहत सोमवार को राजस्व विभाग की टीम ने पोखरी के भूमि की नापी कराई और उसके दायरे में जो भी मकान आए उनका चिन्हिकरण किया गया। जल्द ही अवैध कब्जे को हटवाने के साथ ही पोखरी को खोदवा कर उसके अस्तित्व को बहाल किया जाएगा।
मुबारकपुर कस्बा के पुरासोफी मुहल्ला स्थित गाटा संख्या 953 रकबा 1.379 हेक्टेयर व गाटा संख्या 1219 रकबा .139 हेक्टेयर सरकारी रिकार्ड में पोखरी के नाम से दर्ज है। लेकिन वर्तमान में उक्त दोनों पोखरियों का अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है और इन्हें पाट कर उस पर बड़ी-बड़ी अटालिकाएं खड़ी की जा चुकी हैं। 2015 में तत्कालीन चेयरमैन डॉ. शमीम द्वारा पोखरी पर हुए अवैध कब्जे को हटवाने की कवायद की गई थी। कुछ लोगों के मकान ध्वस्त भी करवाए गए थे। वर्तमान चेयरमैन द्वारा पुन: पोखरी को पटवा कर उस पर अवैध कब्जा करवा दिया गया। जिस पर मुहल्ला निवासी आमिर फहीम ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर किया। जिस पर 29 सिंतबर 2020 को आदेश पारित हुआ। आदेश में शिकायतकर्ता को तहसील पर प्रस्तुत करने को कहा गया। इस पर आमिर फहीम ने 3 अक्टूबर को तहसील में हाईकोर्ट के निर्देश के साथ पत्र दिया। हाईकोर्ट के आदेश में छह माह के अंदर पोखरी पर से अवैध कब्जा हटवा कर खुदाई करा कर अस्तित्व बहाली का निर्देश था। जिसकी कवायद में तहसील प्रशासन जुट गई है। सोमवार को राजस्व विभाग की टीम फोर्स के साथ मौके पर पहुंची और पोखरी के जमीन की नापी करने के साथ ही उस पर अवैध बने मकानों को चिन्हित भी किया। सदर तहसील प्रशासन की इस कवायद से मौके पर हड़कंप मचा रहा। चिन्हिकरण की कार्रवाई लेखपाल/प्रभारी कानूनगो विनय कुमार के निर्देशन में की गई। आमिर फहीम ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्धारित छह माह के समय सीमा में यदि पोखरी का अस्तित्व बहाल नहीं हुआ तो वे पुन: हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे। उन्होंने ने चिन्हिकरण में भी खेल करने का तहसील प्रशासन पर आरोप लगाया है और बताया कि लगभग 20 घरों पर चिन्हिकरण किया गया है। कुछ बड़े लोगों को इसमें छोड़ भी दिया गया है।
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मुबारकपुर कस्बा के पुरासोफी मुहल्ला स्थित गाटा संख्या 953 रकबा 1.379 हेक्टेयर व गाटा संख्या 1219 रकबा .139 हेक्टेयर सरकारी रिकार्ड में पोखरी के नाम से दर्ज है। लेकिन वर्तमान में उक्त दोनों पोखरियों का अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है और इन्हें पाट कर उस पर बड़ी-बड़ी अटालिकाएं खड़ी की जा चुकी हैं। 2015 में तत्कालीन चेयरमैन डॉ. शमीम द्वारा पोखरी पर हुए अवैध कब्जे को हटवाने की कवायद की गई थी। कुछ लोगों के मकान ध्वस्त भी करवाए गए थे। वर्तमान चेयरमैन द्वारा पुन: पोखरी को पटवा कर उस पर अवैध कब्जा करवा दिया गया। जिस पर मुहल्ला निवासी आमिर फहीम ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर किया। जिस पर 29 सिंतबर 2020 को आदेश पारित हुआ। आदेश में शिकायतकर्ता को तहसील पर प्रस्तुत करने को कहा गया। इस पर आमिर फहीम ने 3 अक्टूबर को तहसील में हाईकोर्ट के निर्देश के साथ पत्र दिया। हाईकोर्ट के आदेश में छह माह के अंदर पोखरी पर से अवैध कब्जा हटवा कर खुदाई करा कर अस्तित्व बहाली का निर्देश था। जिसकी कवायद में तहसील प्रशासन जुट गई है। सोमवार को राजस्व विभाग की टीम फोर्स के साथ मौके पर पहुंची और पोखरी के जमीन की नापी करने के साथ ही उस पर अवैध बने मकानों को चिन्हित भी किया। सदर तहसील प्रशासन की इस कवायद से मौके पर हड़कंप मचा रहा। चिन्हिकरण की कार्रवाई लेखपाल/प्रभारी कानूनगो विनय कुमार के निर्देशन में की गई। आमिर फहीम ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्धारित छह माह के समय सीमा में यदि पोखरी का अस्तित्व बहाल नहीं हुआ तो वे पुन: हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे। उन्होंने ने चिन्हिकरण में भी खेल करने का तहसील प्रशासन पर आरोप लगाया है और बताया कि लगभग 20 घरों पर चिन्हिकरण किया गया है। कुछ बड़े लोगों को इसमें छोड़ भी दिया गया है।
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