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यहां भी अस्पताल बन सकते हैं लाक्षागृह

Tue, 18 Oct 2016 11:52 PM IST
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azamgarh Updated Tue, 18 Oct 2016 11:52 PM IST
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Here you can also become a hospital Lacshagrih
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सरकारी और निजी अस्पतालों में भले ही विभिन्न जांचों के लिए करोड़ों की मशीनें लगी हों लेकिन आग से बचाव के पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था नहीं है। यहां हजारों लोग इलाज के लिए आते हैं लेकिन कभी आग की        घटना हो जाए तो उसके बचाव के इंतजाम नहीं है।
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  फायर अधिकारियों की जांच में यह मामला उजागर होने पर सभी को अग्निशमन यंत्र और संसाधन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही अस्पतालों की स्थिति से प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को भी रिपोर्ट भेजकर अवगत कराया गया है लेकिन अभी तक उनके स्तर से भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।    जिले में स्थित सरकारी अस्पतालों में जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल के अलावा 69 सीएचसी और पीएचसी हैं। जबकि 80 से अधिक प्राइवेट अस्पताल हैं। जिला और महिला अस्पताल में प्रतिदिन 1000 से 1500 सौ की ओपीडी होती है।
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जबकि सीएचसी, पीएचसी में 150 से 200 की ओपीडी होती है। शहर में कई प्राइवेट अस्पताल ऐसे हैं जहां मरीजों की अधिक भीड़ रहती है। बावजूद इसके किसी भी अस्पताल में अग्निशन यंत्र की व्यवस्था नहीं है। अस्पतालों में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था न होना चिंताजनक बात है। बावजूद इसके न तो अस्पताल प्रशासन इस विषय पर गंभीर है और न ही जिला प्रशासन। मुख्य अग्निशमन अधिकारी सुभाष सिंह ने बताया कि प्रमुख सचिव शिक्षा एवं स्वास्थ्य के निर्देश पर सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण किया गया था। इस दौरान जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल सहित अन्य सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में अग्निशमन के पर्याप्त संसाधन नहीं पाए गए। अक्तूबर के पहले सप्ताह में ही इसकी रिपोर्ट प्रमुख सचिव को भेज दी गई है।
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