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कट गए खेत, राशन कार्ड भी नहीं, भूखमरी की कगार पर किसान

Tue, 26 Oct 2021 11:12 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 26 Oct 2021 11:12 PM IST
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Fields cut off, not even ration cards, farmers on the verge of starvation
चक्की गांव के पास नाव का इंतजार करते लोग। - फोटो : AZAMGARH
लाटघाट। सगड़ी तहसील क्षेत्र के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी देवारावासियों के लिए दुस्वप्न से कम नहीं है। प्रतिवर्ष यह देवारावासियों को गहरा जख्म देकर जाती है। इस जख्म को भरने में पूरे साल लग जाते हैं। देेवारावासियों के जख्म जब तक भरते हैं तब तक नदी एक बार फिर उनकी बसी बसाई गृहस्थी को उजाड़ने के लिए दस्तक देती नजर आती है। इस वर्ष दो बार आई बाढ़ ने देवारावासियों को गहरा जख्म दिया है। किसानों के खेत कट गए हैं और वह भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। वहीं बहुत से लोग राशनकार्ड न होने के कारण सरकार की ओर से मिलने वाले मुफ्त राशन का लाभ भी नहीं उठा पा रहे हैं।
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सगड़ी तहसील क्षेत्र के उत्तर घाघरा नदी के कटान से परसिया ग्राम पंचायत के 19 परिवार ऐसे हैं जिनके पास राशन कार्ड नहीं है। और उनकी खेती घाघरा में विलीन हो गई। न तो उनके पास खेती की जमीन है और ना ही राशन कार्ड हैं। जिसके कारण आज यह 19 परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैँ। इनका राशन कार्ड बनाने के लिए अभी तक किसी ने कोई पहल नहीं किया। पहल किया भी तो अब तक नहीं बना। वहीं इस संबंध में खाद्य विभाग अजमतगढ़ प्रभारी ने अभी तक राशन कार्ड के संबंध में किसी प्रकार की कोई जानकारी नहीं दी। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि अगर राशन कार्ड बन गया होता तो हमें भी वर्तमान सरकार के अन्न योजना का लाभ मिलता। राशन कार्ड न होने से हमें इस योजना का लाभ नहीं मिला है। एक तरफ हम इस योजना से वंचित हो रहे हैं और दूसरी तरफ सरयू मैया हमारी खेती को भी काट कर खत्म कर दी हैं। गांव के सुभावती, गोवर्धन, सीता, सुशीला, आत्मा, चंद्रभान, सविता, संगीता, रामकेवल, अनीता, प्रभा, उषा, बरसाती, मंजू देवी, पंजाबी, प्रतिमा, आरती, फूलमती, पप्पू आदि के पास भी तक राशन कार्ड नहीं है।
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20 से 30 प्रतिशत ही बची गन्ने की फसल
लाटघाट। सगड़ी तहसील के उत्तर देवारा एरिया में किसान मुख्यत: गन्ने की खेती करते हैं। महुला गढ़वल बांध के उत्तर 42 किमी क्षेत्र में लगभग सवा लाख की आबादी निवासी करती है। इस क्षेत्र में कुल 103 गांव आते हैं जिसमें 32 गांव नाचिरागी हैं। इस क्षेत्र के किसान मुख्यत: धान और गन्ने की खेती करते हैं। जो दो बार आई बाढ़ के कारण पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। 20 से 30 प्रतिशत ही गन्ने की फसल बची है। संपर्क मार्ग कट गए हैं। जिससे आवागमन की समस्या खड़ी हो गई है।
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जलस्तर में कमी जारी
लाटघाट। उफान के बाद घाघरा नदी के जलस्तर में घटोत्तरी का क्रम निरंतर जारी है। हालांकि यह अभी तक खतरा बिंदू से ऊपर बना हुआ है। सोमवार को डिघिया गेज पर नदी का जलस्तर 71.46 मीटर दर्ज किया गया था जो मंगलवार को घटकर 71.06 मीटर हो गया। यहां पर नदी का खतरा बिंदु 70.40 मीटर है। वहीं बदरहुंआ गेज पर नदी का जलस्तर सोमवार को 72.26 मीटर दर्ज किया गया था जो मंगलवार को घटकर 71.87 मीटर हो गया। यहां पर नदी का खतरा बिंदु 71.68 मीटर है।
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