कटान के डर से उजाड़ रहे अपना आशियाना
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विगत कई दिनों तक बढ़ने के बाद घाघरा का जलस्तर तीन दिनों से लगातार घट रहा है। गुरुवार को भी नदी के जलस्तर में घटाव दर्ज किया गया। जलस्तर घटने के साथ ही नदी की कटान भी तेज हो गई है। नदी तेजी से कृषि योग्य भूमि को काट रही है। जिसे देख ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। वहीं कटान के भय से देवाराखास राजा के मुराली का पुरवा के लोग खुद ही अपना आशियाना उजाड़ रहे हैं। इस पुरवे में 10 लोगों के आशियाने हैं।
नदी के द्वारा तेजी से हो रही कटान को देख दो लोग तीर्थराज पटेल पुत्र महादेव और रामवृक्ष पुत्र वनवारी अपना आशियाना वहां से हटा चुके हैं। जबकि आठ लोगों केे अभी भी उम्मीद है कि कटान रुक जाएगी। वहीं, मुराली, महादेव, बनवारी, रामवृक्ष, परसन, बेलास, राधे, पूजन, लालधर, प्रकाश, लालधर, रामदरश, रामकेवल, लोरिक, लालबचन आदि की लगभग डेढ़ सौ बीघा जमीन विगत पांच दिनों में घाघरा की धारा में विलीन हो चुकी है। तेजी से हो रही कटान को देख देवाराखास राजा के ग्राम प्रधान पल्टन यादव पुरवे में पहुंचे और लोगों को अपने सामान के साथ सुरक्षित दूसरे स्थान पर जाने की सलाह दी।
पशुओं के लिए मच्छरदानी ः बाढ़ प्रभावित गांवों में ग्रामीणों को अपने साथ ही पशुओं की सुरक्षा की भी चिंता सता रही है। देवाराखास राजा पटेल पुरवा के त्रिलोकी, रामप्रसाद, रामवृक्ष वनवारी आदि ने बताया कि पानी दूषित होने से हमें अपने साथ-साथ पशुओं को बीमारी से बचाना भी चुनौती है। लगभग 12 सौ रुपये से बड़ी मच्छरदानी बनवाई है।
डिघिया नाले पर खतरा बिंदु से ऊपर पानी ः बुधवार की शाम चार बजे घाघरा का जलस्तर बदरहुंआ नाले पर 71.72 मीटर और डिघिया नाले पर 70.86 मीटर दर्ज किया गया, जो गुरुवार की शाम चार बजे बदरहुंआ नाले पर 71.65 मीटर और डिघिया नाले पर 70.82 मीटर पर आ गया। जो बदरहुंआ नाले पर खतरा बिंदू 71.68 मीटर से तीन सेमी नीचे और डिघिया नाले पर खतरा बिंदू 70.40 मीटर से 42 सेमी ऊपर है।
बाढ़ से घिरे गांवों में समस्या ही समस्या ः घाघरा के जलस्तर में घटाव के साथ ही बाढ़ के पानी से घिरे गांवों में समस्या बढ़ गई है। संपर्क मार्गों पर चढ़ा बाढ़ का पानी अभी नहीं हटा है। इसके कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि संपर्क मार्ग को ऊंचा कर महुला-गढ़वल बांध से जोड़ा जाए। ग्रामीण रामलखन, रामवृक्ष, अर्जुन, नागेंद्र, चंद्रबली, योगेंद्र, बांकेलाल, सुनील आदि ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या राशन की है। सबसे बड़ी समस्या ईंधन की है, जिससे ग्रामीणों के सामने भोजन पकाने की समस्या खड़ी हो गई।