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पिता-पुत्र समेत पांच को उम्रकैद और जुर्माना
ब्यूरो अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Thu, 20 Aug 2015 12:45 AM IST
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अदालत ने लगभग 21 वर्ष पूर्व चाकू मारकर की गई हत्या के मामले में पिता-पुत्र समेत पांच आरोपियों को दोषी पाते हुए उम्र कैद के साथ दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। बुधवार को यह सजा अपर सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार ने सुनाई।
घटना तरवां थाने के ऊंचहुवां गांव की है। इस मामले में ऊंचहुवां गांव निवासी कवलधारी ने 11 अप्रैल 1994 को तरवां थाना में गांव के पांच आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। इस मुकदमें में कहा था कि उसका भाई रामहित पोस्ट आफिस में काम करता था। घटना की शाम लगभग 5.30 बजे वह अपने भतीजे गौरीशंकर के साथ घर लौट रहा था। आबादी की जमीन की रंजीश को लेकर गांव के आरोपियों ने उसे देखकर हमला कर दिया।
जबकि रामजीत ने रामहित के पेट में चाकू मारकर घायल कर दिया। घायलावस्था में उपचार के लिए उसे जिला अस्पताल ले जाया गया जहां रास्ते में उसकी मौत हो गई। तरवां थाना पुलिस ने रामजीत पुत्र सीता राम, मटरु पुत्र सरजू औरी सरजू पुत्र सनोहर, जहीर पुत्र रहीम और जगदीश पुत्र चुनमुन के विरुद्ध आरोप पत्र प्रेषित किया।
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सत्र परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने इस मुकदमे के वादी कवलधारी, गौरीशंकर, डा. वीपी द्विवेदी, निरीक्षक आरआर पाल व सिनोद को बतौर साक्षी अदालत में पेश किया और तर्को को रखा। अदालत ने उभय पक्षों के तर्को को सुनने के बाद नामजद पांचों आरोपियों को हत्या का दोषी पाते हुए उक्त सजा का निर्धारण किया।
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घटना तरवां थाने के ऊंचहुवां गांव की है। इस मामले में ऊंचहुवां गांव निवासी कवलधारी ने 11 अप्रैल 1994 को तरवां थाना में गांव के पांच आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। इस मुकदमें में कहा था कि उसका भाई रामहित पोस्ट आफिस में काम करता था। घटना की शाम लगभग 5.30 बजे वह अपने भतीजे गौरीशंकर के साथ घर लौट रहा था। आबादी की जमीन की रंजीश को लेकर गांव के आरोपियों ने उसे देखकर हमला कर दिया।
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जबकि रामजीत ने रामहित के पेट में चाकू मारकर घायल कर दिया। घायलावस्था में उपचार के लिए उसे जिला अस्पताल ले जाया गया जहां रास्ते में उसकी मौत हो गई। तरवां थाना पुलिस ने रामजीत पुत्र सीता राम, मटरु पुत्र सरजू औरी सरजू पुत्र सनोहर, जहीर पुत्र रहीम और जगदीश पुत्र चुनमुन के विरुद्ध आरोप पत्र प्रेषित किया।
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सत्र परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने इस मुकदमे के वादी कवलधारी, गौरीशंकर, डा. वीपी द्विवेदी, निरीक्षक आरआर पाल व सिनोद को बतौर साक्षी अदालत में पेश किया और तर्को को रखा। अदालत ने उभय पक्षों के तर्को को सुनने के बाद नामजद पांचों आरोपियों को हत्या का दोषी पाते हुए उक्त सजा का निर्धारण किया।