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हत्या के जुर्म में पिता-पुत्र को उम्रकैद, अर्थदंड
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 10 Apr 2017 11:48 PM IST
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कंधरापुर के बितना दलित बस्ती जोलहापुर में 2009 में मामूली बात को लेकर हुई हत्या के जुर्म में पिता पुत्र को दोषी पाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सोमवार पिता-पुत्र को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही कुल 12 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। इसी मामले के दो अन्य आरोपी फूलमती और रोमी को नाबालिग पाते हुए उसकी पत्रावली अलग कर दी गई है।
कंधरापुर थाना के बितना दलित बस्ती जोलहापुर गांव निवासी नागेंद्र पुत्र भोलानाथ ने 15 जुलाई 2009 को स्थानीय थाने में गांव के चार लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे में कहा था कि गांव के बंशू की भैंस श्रीधर के खेत में चली गई थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद होने लगा। शोर की आवाज पर भाई महेंद्र और उसका भतीजा बबलू तथा दीपक मौके पर पहुंचे। उस दौरान अवैध असलहों के साथ श्रीधर का लड़का कन्हैया और दो बहनें फूलमती और रोमी भी लाठी-डंडा लेकर पहुंची।
विवाद बढ़ने पर श्रीधर और कन्हैया ने जान मारने की नीयत से अपने हाथ में लिए असलहे से फायर कर दिया। गोली लगने से बबलू और दीपक घायल हो गए। साथ ही उसके परिजनों को भी लाठी-डंडे की चोटें आईं। उपचार के दौरान दीपक की मौत हो गई। इस मामले में कंधरापुर थाना पुलिस ने श्रीधर, कन्हैया, फूलमती और रोमी के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
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पुलिस ने विवेचना के दौरान श्रीधर के यहां से असलहे की अवैध फैक्टरी भी बरामद की थी। अभियोजन पक्ष की तरफ से इस मुकदमे की पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता दिनेश कुमार श्रीवास्तव ने वादी समेत 10 गवाहों को अदालत में पेश किया। शामिल गवाहों में महेंद्र, बबलू, बंशू, अनूप कुमार सिंह, डा. यूबी चौहान, हेड कांस्टेबुल मोहम्मद नसीम, विवेचक कमलेश सिंह, मुहर्रिर विनोद कुमार, एसआई धर्मपाल यादव रहे। अदालत ने श्रीधर और कन्हैया को हत्या के जुर्म में उम्रकैद के साथ छह-छह हजार रुपया अर्थदंड, धारा 307 में सात वर्ष और तीन-तीन हजार रुपया जुर्माना, अन्य धारा में दो वर्ष और एक-एक हजार रुपया और पांच-पांच वर्ष और दो-दो हजार अर्थदंड लगाया।
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कंधरापुर थाना के बितना दलित बस्ती जोलहापुर गांव निवासी नागेंद्र पुत्र भोलानाथ ने 15 जुलाई 2009 को स्थानीय थाने में गांव के चार लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे में कहा था कि गांव के बंशू की भैंस श्रीधर के खेत में चली गई थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद होने लगा। शोर की आवाज पर भाई महेंद्र और उसका भतीजा बबलू तथा दीपक मौके पर पहुंचे। उस दौरान अवैध असलहों के साथ श्रीधर का लड़का कन्हैया और दो बहनें फूलमती और रोमी भी लाठी-डंडा लेकर पहुंची।
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विवाद बढ़ने पर श्रीधर और कन्हैया ने जान मारने की नीयत से अपने हाथ में लिए असलहे से फायर कर दिया। गोली लगने से बबलू और दीपक घायल हो गए। साथ ही उसके परिजनों को भी लाठी-डंडे की चोटें आईं। उपचार के दौरान दीपक की मौत हो गई। इस मामले में कंधरापुर थाना पुलिस ने श्रीधर, कन्हैया, फूलमती और रोमी के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
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पुलिस ने विवेचना के दौरान श्रीधर के यहां से असलहे की अवैध फैक्टरी भी बरामद की थी। अभियोजन पक्ष की तरफ से इस मुकदमे की पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता दिनेश कुमार श्रीवास्तव ने वादी समेत 10 गवाहों को अदालत में पेश किया। शामिल गवाहों में महेंद्र, बबलू, बंशू, अनूप कुमार सिंह, डा. यूबी चौहान, हेड कांस्टेबुल मोहम्मद नसीम, विवेचक कमलेश सिंह, मुहर्रिर विनोद कुमार, एसआई धर्मपाल यादव रहे। अदालत ने श्रीधर और कन्हैया को हत्या के जुर्म में उम्रकैद के साथ छह-छह हजार रुपया अर्थदंड, धारा 307 में सात वर्ष और तीन-तीन हजार रुपया जुर्माना, अन्य धारा में दो वर्ष और एक-एक हजार रुपया और पांच-पांच वर्ष और दो-दो हजार अर्थदंड लगाया।