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नदी के जलस्तर में कमी से कटान हुई तेज

Mon, 06 Sep 2021 10:47 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 06 Sep 2021 10:47 PM IST
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Erosion intensified due to the decrease in the water level of the river
लाटघाट। सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी के जलस्तर में घटोत्तरी और बढोत्तरी का क्रम निरंतर जारी है। सोमवार को डिघिया और बदरहुंआ गेज पर नदी का जलस्तर कम हुआ। इन सबके बीच नदी अभी दोनों ही गेजों पर खतरा बिंदु से ऊपर बनी हुई है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच गांगेपुर रिंग बांध पर कटान तेज हो गई है।
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रविवार को डिघिया गेज पर घाघरा नदी का जलस्तर 71.23 मीटर दर्ज किया गया था जो सोमवार को घटकर 70.56 मीटर हो गया। यहां पर नदी का खतरा बिंदू 70.40 मीटर है। रविवार को बदरहुंआ गेज पर नदी का जलस्तर 71.98 मीटर दर्ज किया गया था। जो सोमवार को घटकर 71.70 मीटर हो गया। यहां पर नदी का खतरा बिंदु 71.68 मीटर है। बदरहुंआ पर दो सेमी और डिघिया पर 56 सेमी खतरा बिंदु से उपर बह रही है। घाघरा नदी के जलस्तर में गिरावट के बाद तेज हुई कटान से गांगेपुर रिंग बांध पर कटान तेज हो गई है। साथ ही देवारा खास राजा गांव की कई बीघा गन्ने की फसल नदी में समा गई। लगातार हो रही कटान से किसान खासे परेशान हैं। घाघरा नदी तेजी से कटान कर रही है। नदी लगातार कटान करते हुए खेतिहर इलाके को अपने में समा रही है, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं। देवारा खास राजा, चक्की, मानिकपुर, सोनौरा, मानिकपुर, बेलहिया जाने वाले रास्ते पर अब भी पानी चल रहा है। जिससे उस पर लोग नाव से आवाजाही कर रहे हैं। मजनू चौक से हसनपुर बनकटा संपर्क मार्ग के पुल पर भी करीब दो फुट पानी रोड पर चढ़ने के कारण मुश्किल से ही राहगीर रास्ते से निकल पा रहे हैं। सैकड़ों बीघा गन्ने व धान की फसलें डूबी हुईं हैं।
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पशुओं के चारे की हुई समस्या
लाटघाट। बाढ़ का पानी भले ही तेजी से घट रहा है। लेकिन देवारा क्षेत्र के पशुओं के समक्ष चारे की समस्या खड़ी हो गई है। पानी में डूबने के कारण हरा चारा नष्ट हो गया है। पशु पालक अपने पशुओं को सूख भूसा खिलाने को विवश हैं। वहीं बहुत से लोग बाढ़ एरिया से बाहर जाकर नाव के सहारे कुछ व्यवस्था कर रहे हैं।
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संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका
लाटघाट। बाढ़ का पानी को धीरे-धीरे कई गांवों से हटने लगा है। लेकिन गांवों के बीच में और बाहर बने गड्ढ़ों में जमा पानी से बदबू उठने लगी है। जिसके कारण लोगों को संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा मंडराने लगा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक गांवों क्लोरिन की गोली का वितरण नहीं किया गया और ना ही दवा का छिड़काव कराया गया है।
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