{"_id":"59f8bc164f1c1b97678b858b","slug":"economic-offenses-branch-will-now-investigate-social-welfare-scam","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब आर्थिक अपराध शाखा करेगा समाज कल्याण घोटाले की जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब आर्थिक अपराध शाखा करेगा समाज कल्याण घोटाले की जांच
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Tue, 31 Oct 2017 11:38 PM IST
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ईडी ने नारंग की दो करोड़ उनतीस लाख चवालीस हजार से ज्यादा की संपत्ति एवं बैंक धनराशि को जब्त किया है।
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आजमगढ़। जनपद में वर्ष 2007 से 13 के दौरान समाज कल्याण, प्रोबेशन और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति, पेंशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में 150 करोड़ के घोटाले की जांच शासन की ओर से आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंप दिया गया है।
2.86 करोड़ के घोटाले के साक्ष्य मिले थे। दो थानों में चार एफआईआर दर्ज हुई थी और 34 आरोपी नामजद हुए थे। घोटाले में अभी तक दो लोगों को गिरफ्तार जेल भेजा जा चुका है। घोटाले की जांच अब ईओडब्ल्यू की वाराणसी शाखा करेगी। विभाग की ओर से घोटाले के आरोपी विभाग के बाबू गंगासागर राय को तीन दिन के भीतर बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया है।
समाज कल्याण विभाग में बीते दस वर्षों में 150 करोड़ से अधिक का घोटाला हुआ है। इसमें छात्रवृत्ति, कन्या विद्याधन, विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कई मद शामिल हैं।
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रमाकांत मिश्रा की ओर से मामले की शिकायत करने के बाद तत्कालीन डीएम रणवीर प्रसाद ने मामले की जांच के लिए 2014 में सीडीओ के नेतृत्व में कमेटी बनाई गई थी। जांच कमेटी में शामिल अपर सांख्यिकी अधिकारी सुनील सिंह ने करीब 2.80 करोड़ के घोटाले की पुष्टि की थी।
साथ ही 45 करोड़ के घोटाले के साक्ष्य मिले थे। करीब 50 से अधिक कॉलेजों ने अपने-अपने विद्यालय में छात्रों की संख्या फर्जी/काल्पनिक दिखा और डीसीबी के शाखाओं में फर्जी खाते खुलवाकर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति हड़प ली थी। वर्ष 2012-13 में जनता इंटर कालेज पतिला गौसपुर में महज 72 छात्रों के पंजीकरण हुए थे।
इसके सापेक्ष विद्यालय में 1177 छात्रों को दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति फर्जी खातों के माध्यम से ले ली गई थी। 2.80 करोड़ के घोटाले की पुष्टि होने पर कप्तानगंज थाने में दो, सिधारी और शहर कोतवाली में एक-एक रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
इसमें तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी सहित कुल 34 लोगों को नामजद किया गया था। पुलिस की कार्रवाई भी महज रिपोर्ट दर्ज करने तक ही सिमटकर रह गई थी। बाद में मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई।
साथ ही 22 मार्च 2016 को तात्कालीन डीएम सुहास एलवाई ने मामले की जांच किसी बाह्य संस्था से कराने के लिए प्रमुख सचिव समाज कल्याण विभाग को पत्र भेजा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। शासन की ओर से अंदर ही अंदर मामले को आर्थिक अपराध शाखा को सौंपने की तैयारी की जा रही थी।
सात अक्तूबर को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन की वाराणसी शाखा के एसपी की ओर से समाज कल्याण अधिकारी को भेजे गए पत्र में विभाग के तत्कालीन छात्रवृत्ति पटल सहायक गंगासागर राय को तीन दिन के भीतर बयान दर्ज करने के लिए तलब किया गया है। समीज कल्याण अधिकारी की ओर से गंगासागर राय को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही थी।
मामले में हो चुकी है तीन गिरफ्तारियां
आजमगढ़। करोड़ों के घोटाले में जांच अधिकारी सुनील सिंह की आख्या पर कप्तानगंज थाने में दो, सिधारी और शहर कोतवाली में एक-एक रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसमें तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी सहित कुल 34 लोगों को नामजद किया गया था।
इसमें जिविनि कार्यालय के पटल सहायक धर्म सिंह को 2014-15 में ही गिरफ्तार किया गया था। अभी वो जमानत पर हैं। पिछले दिनों क्राइम ब्रांच ने मामले में प्रोबोशन विभाग के बाबू सुभाष चंद्र और डीसीबी कप्तानगंज के तत्कालीन प्रबंधक हरीराम यादव को गिरफ्तार किया था, जो जेल में हैं।
30 लाख से ज्यादा की कटी थी आरसी
आजमगढ़। समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन बाबू गंगासागर राय के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के साथ ही 30 लाख से ज्यादा की आरसी भी कटी थी, लेकिन तहसील प्रशासन की ओर से अभी तक वसूली नहीं की जा सकी है। साथ ही विभाग की ओर से निलंबित बाबू गंगासागर राय पर मेहरबानी दिखाते हुए उसे बहाल भी कर दिया गया था। वो फिलहाल दूसरे जिले में तैनात है।
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2.86 करोड़ के घोटाले के साक्ष्य मिले थे। दो थानों में चार एफआईआर दर्ज हुई थी और 34 आरोपी नामजद हुए थे। घोटाले में अभी तक दो लोगों को गिरफ्तार जेल भेजा जा चुका है। घोटाले की जांच अब ईओडब्ल्यू की वाराणसी शाखा करेगी। विभाग की ओर से घोटाले के आरोपी विभाग के बाबू गंगासागर राय को तीन दिन के भीतर बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया है।
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समाज कल्याण विभाग में बीते दस वर्षों में 150 करोड़ से अधिक का घोटाला हुआ है। इसमें छात्रवृत्ति, कन्या विद्याधन, विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कई मद शामिल हैं।
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रमाकांत मिश्रा की ओर से मामले की शिकायत करने के बाद तत्कालीन डीएम रणवीर प्रसाद ने मामले की जांच के लिए 2014 में सीडीओ के नेतृत्व में कमेटी बनाई गई थी। जांच कमेटी में शामिल अपर सांख्यिकी अधिकारी सुनील सिंह ने करीब 2.80 करोड़ के घोटाले की पुष्टि की थी।
साथ ही 45 करोड़ के घोटाले के साक्ष्य मिले थे। करीब 50 से अधिक कॉलेजों ने अपने-अपने विद्यालय में छात्रों की संख्या फर्जी/काल्पनिक दिखा और डीसीबी के शाखाओं में फर्जी खाते खुलवाकर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति हड़प ली थी। वर्ष 2012-13 में जनता इंटर कालेज पतिला गौसपुर में महज 72 छात्रों के पंजीकरण हुए थे।
इसके सापेक्ष विद्यालय में 1177 छात्रों को दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति फर्जी खातों के माध्यम से ले ली गई थी। 2.80 करोड़ के घोटाले की पुष्टि होने पर कप्तानगंज थाने में दो, सिधारी और शहर कोतवाली में एक-एक रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
इसमें तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी सहित कुल 34 लोगों को नामजद किया गया था। पुलिस की कार्रवाई भी महज रिपोर्ट दर्ज करने तक ही सिमटकर रह गई थी। बाद में मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई।
साथ ही 22 मार्च 2016 को तात्कालीन डीएम सुहास एलवाई ने मामले की जांच किसी बाह्य संस्था से कराने के लिए प्रमुख सचिव समाज कल्याण विभाग को पत्र भेजा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। शासन की ओर से अंदर ही अंदर मामले को आर्थिक अपराध शाखा को सौंपने की तैयारी की जा रही थी।
सात अक्तूबर को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन की वाराणसी शाखा के एसपी की ओर से समाज कल्याण अधिकारी को भेजे गए पत्र में विभाग के तत्कालीन छात्रवृत्ति पटल सहायक गंगासागर राय को तीन दिन के भीतर बयान दर्ज करने के लिए तलब किया गया है। समीज कल्याण अधिकारी की ओर से गंगासागर राय को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही थी।
मामले में हो चुकी है तीन गिरफ्तारियां
आजमगढ़। करोड़ों के घोटाले में जांच अधिकारी सुनील सिंह की आख्या पर कप्तानगंज थाने में दो, सिधारी और शहर कोतवाली में एक-एक रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसमें तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी सहित कुल 34 लोगों को नामजद किया गया था।
इसमें जिविनि कार्यालय के पटल सहायक धर्म सिंह को 2014-15 में ही गिरफ्तार किया गया था। अभी वो जमानत पर हैं। पिछले दिनों क्राइम ब्रांच ने मामले में प्रोबोशन विभाग के बाबू सुभाष चंद्र और डीसीबी कप्तानगंज के तत्कालीन प्रबंधक हरीराम यादव को गिरफ्तार किया था, जो जेल में हैं।
30 लाख से ज्यादा की कटी थी आरसी
आजमगढ़। समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन बाबू गंगासागर राय के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के साथ ही 30 लाख से ज्यादा की आरसी भी कटी थी, लेकिन तहसील प्रशासन की ओर से अभी तक वसूली नहीं की जा सकी है। साथ ही विभाग की ओर से निलंबित बाबू गंगासागर राय पर मेहरबानी दिखाते हुए उसे बहाल भी कर दिया गया था। वो फिलहाल दूसरे जिले में तैनात है।