{"_id":"5713ddfc4f1c1b9d3310fcf9","slug":"darul-uloom-madrassa-aurangzeb-kept-handwritten-koran","type":"story","status":"publish","title_hn":"दारूल उलूम मदरसे में रखी है औरंगजेब की हस्तलिखित कुरान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दारूल उलूम मदरसे में रखी है औरंगजेब की हस्तलिखित कुरान
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 18 Apr 2016 12:33 AM IST
विज्ञापन
दारूल उलूम मदरसे में रखी है औरंगजेब की हस्तलिखित कुरान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जनपद के सगड़ी तहसील क्षेत्र के अंजान शहीद गांव में स्थित मदरसा दारूल उलूम का पुस्तकालय कई ऐतिहासिक धरोहरों केे समेटे हुए है। इस पुस्तकालय में मुगल बादशाह औरंगजेब की हस्तलिखित कुरान आज भी रखी हुई है इसके अलावा कई और भी ऐतिहासिक पुस्तकें और अखबार संजो कर रखे गए है।
औरंगजेब द्वारा लिखित कुरान को काली स्याही से लिखा गया है। पन्नों के खाली स्थानों को सोने के पानी से भरा गया है। यह कुरान डेढ़ हजार पन्नों का है। इसके अलावा पुस्तकालय में कुल 12 हजार के आसपास अन्य पुस्तकें भी हैं। इसी स्थान पर एक पक्का कब्रिस्तान भी है।
कहा जाता है कि 1857 की क्रांति के दौरान एक जवान शहीद हो गया था। उसके शव को दफन कर दिया गया। उक्त शहीद के अंजान होने के कारण उस स्थान का नाम अंजान शहीद पड़ा। मदरसे के नाजिम अब्दुल मन्नान चिश्ती ने बताया कि लगभग 60 वर्ष पहले अपने पिता रफी खान के साथ विद्यालय परिसर में बैठे थे। उसी दौरान उस समय लगभग 45 वर्षीय एक व्यक्ति पहुंचा और कहा कि यह पुस्तक आपके मजहब की है इसलिए इसे रख लें।
विज्ञापन
पुस्तक के पन्नों पर सोने का पानी देख पिता जी की आंखें चुुंधिया गईं। उसने बताया कि वह एक चोर है और चोरी उसका काम है। यह पुस्तक एक सेठ के यहां चोरी के दौरान उसकी तिजोरी में मिली। पुस्तक धार्मिक होने के कारण उसने पन्नों से सोना निकालना मुनासिब नहीं समझा। मन्नान के पिता ने उस धार्मिक पुस्तक को अपने पास रख लिया। इसके अलावा पुस्तकालय में अबुल कलाम आजाद द्वारा उर्दू में निकलने वाला अखबार भी मौजूद है।
विज्ञापन
औरंगजेब द्वारा लिखित कुरान को काली स्याही से लिखा गया है। पन्नों के खाली स्थानों को सोने के पानी से भरा गया है। यह कुरान डेढ़ हजार पन्नों का है। इसके अलावा पुस्तकालय में कुल 12 हजार के आसपास अन्य पुस्तकें भी हैं। इसी स्थान पर एक पक्का कब्रिस्तान भी है।
विज्ञापन
कहा जाता है कि 1857 की क्रांति के दौरान एक जवान शहीद हो गया था। उसके शव को दफन कर दिया गया। उक्त शहीद के अंजान होने के कारण उस स्थान का नाम अंजान शहीद पड़ा। मदरसे के नाजिम अब्दुल मन्नान चिश्ती ने बताया कि लगभग 60 वर्ष पहले अपने पिता रफी खान के साथ विद्यालय परिसर में बैठे थे। उसी दौरान उस समय लगभग 45 वर्षीय एक व्यक्ति पहुंचा और कहा कि यह पुस्तक आपके मजहब की है इसलिए इसे रख लें।
विज्ञापन
पुस्तक के पन्नों पर सोने का पानी देख पिता जी की आंखें चुुंधिया गईं। उसने बताया कि वह एक चोर है और चोरी उसका काम है। यह पुस्तक एक सेठ के यहां चोरी के दौरान उसकी तिजोरी में मिली। पुस्तक धार्मिक होने के कारण उसने पन्नों से सोना निकालना मुनासिब नहीं समझा। मन्नान के पिता ने उस धार्मिक पुस्तक को अपने पास रख लिया। इसके अलावा पुस्तकालय में अबुल कलाम आजाद द्वारा उर्दू में निकलने वाला अखबार भी मौजूद है।