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सफाई में सहभागिता करेंगे बेसिक विद्यालयों के बच्चे

Wed, 17 Mar 2021 11:40 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 17 Mar 2021 11:40 PM IST
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Children from basic schools will participate in cleanliness
आजमगढ़। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में अब काम के तौर पर नहीं बल्कि शिक्षा व नैतिक मूल्यों के तौर पर शिक्षक व अन्य कर्मियों के साथ ही योजनाबद्ध तरीके से छात्र-छात्राएं भी स्कूल परिसर में झाड़ू लगाएंगी और सफाई में अपनी सहभागिता दिखाएंगे। इस संबंध में शासन स्तर से सभी अधिकारियों को दिशानिर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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परिषदीय विद्यालयों के बच्चों द्वारा विद्यालय में झाड़ू लगाते समय का वीडियो अक्सर वायरल होता है। जिम्मेदारों के खिलाफ इस मामले में कार्रवाई भी हो जाती है। होना भी चाहिए कि क्योंकि हर विद्यालय में इस कार्य के लिए एक व्यक्ति की तैनाती रहती है। विद्यालयों में बच्चे पढ़ने के लिए जाते हैं न कि झाड़ू लगाने। लेकिन अब शासन स्तर से विद्यालयों में 15 से 20 मिनट तक विद्यार्थियों को शिक्षकों और स्टाफ के साथ मिलकर झाड़ू लगाकर सफाई में सहभागिता सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया है। इसका मूल उद्देश्य बच्चों में नैतिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। दरअसल, परिषदीय विद्यालयों में मेरा विद्यालय-स्वच्छ विद्यालय की अवधारणा को लागू किए जाने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत छात्र-छात्राओं में उनके माता-पिता, शिक्षकों और समुदाय के प्रति सम्मान और विद्यालय में स्वच्छता के प्रति उनमें नैतिक जिम्मेदारी की भावना विकसित किया जाना है।
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शासन ने कुछ बातों का ध्यान रखने का भी निर्देश दिया है। मसलन, विद्यालयों की साफ-सफाई की गतिविधियां प्रतिदिन 15 से 20 मिनट तक ही सीमित रखने की बात कही गई है। शिक्षकों को स्वच्छता गतिविधियों में किसी बच्चे के साथ भेदभाव न हो, यह व्यवस्था भी सुनिश्चित करने को कहा गया है। निर्देश में यह भी कहा गया है कि विद्यालय में सभी वयस्क न केवल विद्यार्थियों को सफाई अभ्यास में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे बल्कि उनका मार्गदर्शन कर स्वयं भी सक्रिय रूप में प्रतिभाग करेंगे। विद्यालय परिसर में साफ-सफाई के दौरान नोडल शिक्षक उनके साथ रहेंगे। जूनियर सेक्शन के छोटे बच्चों को कठिन कार्य में नहीं लगाया जाएगा। छात्रों को मरम्मत रेट्रो फिटिंग, रेनोवेशन का काम, भारी काम, गहरी सफाई के क्षेत्र जैसे खतरनाक कार्यों में शामिल नहीं किया जाएगा। नियमित अंतराल पर साप्ताहिक रूप से कक्षा, नोडल शिक्षक व्यवहार परिवर्तन संचार का संचालन करेंगे। इसके साथ ही सप्ताह में एक दिन व्यवहार और प्रणालियों पर आडियो-वीडियो या प्रिंट सामग्री जैसे साबुन से हाथ धोने, पानी की बचत, शौचालय का उपयोग, शिष्टाचार आदि के बारे में बताया जाएगा।
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सरकार का यह निर्णय बहुत सराहनीय है। पहले भी बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए पीटी आदि कराई जाती थी। नैतिक शिक्षा के जरिए उन्हें व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता था। लेकिन अब यह सब लगभग बंद हो चुका है। सरकार के इस निर्णय से बच्चों को लाभ मिलेगा। साथ ही स्वच्छता को लेकर उनमें जागरूकता आएगी। - अंबरीश कुमार, बीएसए।
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