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नहर टूटी, पांच मकान गिरे
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Mon, 26 Sep 2016 11:58 PM IST
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नहर टूटी
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सगड़ी तहसील के लाटघाट से होकर गुजरी शारदा सहायक खंड- 32 की नहर का तटबंध रविवार की रात लगभग साढ़े बारह बजे बलुआ गांव के पास टूट गया। नहर का तटबंध टूटने से बलुआ गांव की दलित बस्ती और चौहान बस्ती के घरों में पानी घुस गया। पानी लगने से पांच मकान गिर गए और क्षेत्र की सैकड़ों बीघे फसल जलमग्न हो गई। फसल डूबने से किसानों को काफी नुकसान हुआ है।
सगड़ी तहसील के बलुआ गांव के पास से गुजरने वाली शारदा सहायक खंड 32 नहर रविवार की रात टूट गई। नगर टूटने के बाद जब गांव स्थित लोगों के घरों में पानी घुसने लगा तो लोग घरों में ताला बंद कर भागने लगे। जिससे गांव में कोहराम मच गया। गांव के बच्चे, बूढ़े और महिला सभी शोर मचाते हुए पशुओं को छोड़ अपनी जान बचाने की गरज से सीवान में पहुंच गए।
सूचना मिलते ही तहसीलदार और जेई मौके पर पहुंच गए। जब लोगों को पानी के भरने के कारण का पता चला तो लगभग 10 किमी दूर स्थित माइनर को बंद किया गया लेकिन इसके बाद भी पानी का बहाव जारी रहा। नहर का तटबंध टूटने से किसानों की सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई। वहीं पानी के कारण गांव के पांच घर धराशाई हो गए। जिसमें श्याम नरायन चौहान, रजिंदर, किशुन और चंद्रदेव का कच्चा मकान शामिल है।
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वहीं सुरेंद्र चौहान, नारद सिंह पटेल, मुस्तकीम, ग्यानचंद, मोती, रामनवल, चंद्रशेखर, मनीराम, तूफानी, सोहनी, दुलारे, अवधेश, रामबचन, रामवृक्ष, सत्यनरायन, रामसमुझ आदि की फसल और घर पानी में डूबे हुए हैं। मौके पर पहुंचे विभाग के जेई कमाल अख्तर ने बताया कि शाही द्वारा नहर के बंधे में अपनी मान बनाई गई थी जिससे नहर कमजोर हुई और टूट गई। इसके अलावा चूहों ने भी नहर के तटबंध को कमजोर करने में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। वहीं ग्रामीणों ने जेई द्वारा बताई गई वजहों को गलत बताते हुए कहा कि नहर की सफाई जेसीबी मशीन से कराई गई। जिसके कारण तटबंध पर लगी ईट जगह से टूट गई और बंधा कमजोर हो गया।
प्राइमरी विद्यालय को बनाया शरण स्थल ः तहसीलदार शिवधर चौरसिया और सिंचाई विभाग के जेई मौके पर पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने गांव से 10 किमी दूर स्थित माइनर को बंद कराया। पंचायत अधिकारी प्रदीप उपाध्याय ने प्राइमरी स्कूल पुरवा में गांव के लोगों के लिए शरण स्थली बनवाया। इसके अलावा, दो प्राइमरी और एक जूनियर स्कूल के कमरों को भी खाली कराया गया है। तहसीलदार शिवधर चौरसिया ने बताया कि लेखपालों को क्षति रिपोर्ट देने का निर्देश दे दिया गया है।
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सगड़ी तहसील के बलुआ गांव के पास से गुजरने वाली शारदा सहायक खंड 32 नहर रविवार की रात टूट गई। नगर टूटने के बाद जब गांव स्थित लोगों के घरों में पानी घुसने लगा तो लोग घरों में ताला बंद कर भागने लगे। जिससे गांव में कोहराम मच गया। गांव के बच्चे, बूढ़े और महिला सभी शोर मचाते हुए पशुओं को छोड़ अपनी जान बचाने की गरज से सीवान में पहुंच गए।
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सूचना मिलते ही तहसीलदार और जेई मौके पर पहुंच गए। जब लोगों को पानी के भरने के कारण का पता चला तो लगभग 10 किमी दूर स्थित माइनर को बंद किया गया लेकिन इसके बाद भी पानी का बहाव जारी रहा। नहर का तटबंध टूटने से किसानों की सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई। वहीं पानी के कारण गांव के पांच घर धराशाई हो गए। जिसमें श्याम नरायन चौहान, रजिंदर, किशुन और चंद्रदेव का कच्चा मकान शामिल है।
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वहीं सुरेंद्र चौहान, नारद सिंह पटेल, मुस्तकीम, ग्यानचंद, मोती, रामनवल, चंद्रशेखर, मनीराम, तूफानी, सोहनी, दुलारे, अवधेश, रामबचन, रामवृक्ष, सत्यनरायन, रामसमुझ आदि की फसल और घर पानी में डूबे हुए हैं। मौके पर पहुंचे विभाग के जेई कमाल अख्तर ने बताया कि शाही द्वारा नहर के बंधे में अपनी मान बनाई गई थी जिससे नहर कमजोर हुई और टूट गई। इसके अलावा चूहों ने भी नहर के तटबंध को कमजोर करने में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। वहीं ग्रामीणों ने जेई द्वारा बताई गई वजहों को गलत बताते हुए कहा कि नहर की सफाई जेसीबी मशीन से कराई गई। जिसके कारण तटबंध पर लगी ईट जगह से टूट गई और बंधा कमजोर हो गया।
प्राइमरी विद्यालय को बनाया शरण स्थल ः तहसीलदार शिवधर चौरसिया और सिंचाई विभाग के जेई मौके पर पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने गांव से 10 किमी दूर स्थित माइनर को बंद कराया। पंचायत अधिकारी प्रदीप उपाध्याय ने प्राइमरी स्कूल पुरवा में गांव के लोगों के लिए शरण स्थली बनवाया। इसके अलावा, दो प्राइमरी और एक जूनियर स्कूल के कमरों को भी खाली कराया गया है। तहसीलदार शिवधर चौरसिया ने बताया कि लेखपालों को क्षति रिपोर्ट देने का निर्देश दे दिया गया है।