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बसपा और भासपा को ही महिलाओं पर यकीं
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 13 Feb 2017 12:02 AM IST
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313 प्रत्याशियों पर तीन साल के लिए लगा प्रतिबंध
- फोटो : File Photo
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नारी सशक्तीकरण और महिलाओं को सुरक्षा व्यवस्था देने वाली भाजपा और समाजवादी पार्टी ने इस विधानसभा चुनाव में आधी आबादी (महिलाओं) को चुनाव लड़ने का मौका नहीं दिया है। हालांकि पिछले दिनों भाजपा से गठबंधन में भासपा को मिली मेंहनगर सीट पर मंजू सरोज को टिकट दिया गया। जबकि बसपा ने सगड़ी विधानसभा से वंदना सिंह और मेंहनगर से विद्या चौधरी को प्रत्याशी बनाया है। विद्या चौधरी दो बार विधायक रह चुकी हैं जबकि वंदना सिंह पूर्व विधायक स्व. सर्वेश सिंह सीपू की पत्नी हैं।
भाजपा ने जहां महिला सशक्तीकरण को लेकर बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ कार्यक्रमों पर बल दिया। वहीं, सपा ने महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा और सुविधाओं के लिए अनेक योजनाएं चलाईं। राजनीति में महिलाओं की भागीदारी की बात आई तो दोनों पार्टियों ने जिले में टिकट बंटवारे में महिलाओं को उपेक्षित कर दिया। बहुजन समाज पार्टी ने सगड़ी विधानसभा से वंदना सिंह और मेंहनगर विधानसभा से विद्या चौधरी को टिकट देकर महिलाओं के मनोबल को बढ़ाया है। वहीं, भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल भारतीय समाज पार्टी ने मेंहनगर से मंजू सोनकर पर विश्वास जताया है।
इससे पहले के चुनावों पर नजर डालें तो 1952 के विधानसभा चुनाव में फूलपुर विधानसभा से कांग्रेस की आशालता व्यास ने दलित विधायक के रूप में खाता खोला था। 1957 के चुनाव में लालगंज से कांग्रेस ने सूर्यमुखी को टिकट दिया लेकिन वह छठे स्थान पर रहीं। 1962 के चुनाव में सोशलिस्ट पार्टी ने विजय लक्ष्मी को चुनाव मैदान में उतारा, जो पांचवें स्थान पर रहीं। 1967, 1969, 1974, 1977 और 1980 तक राजनीतिक दलों ने महिलाओं को टिकट नहीं दिया। 1985 में सगड़ी से कांग्रेस ने शारदा सिंह और सीपीआई ने संतोष सिंह (महिला) को चुनाव मैदान में उतारा लेकिन दोनों में शारदा दूसरे और संतोष पांचवें स्थान पर रहीं।
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इसी चुनाव में अतरौलिया से प्रेमबाला को 12वां और मेहनगर से शांति 10वें स्थान पर रहीं। 1989 में सरायमीर विधानसभा से विद्या देवी और लालगंज से शैलकुमारी ने भाग्य आजमाया। शैल तीसरे और विद्या छठे स्थान पर रहीं। 1991 में निजामाबाद विधानसभा से रुचि चुनाव लड़ीं, जो छठे स्थान पर रहीं। गोपालपुर विधानसभा से पुष्पा नौवें स्थान रहीं। 1993 में निजामाबाद विधानसभा से निर्मला और अतरौलिया विधानसभा से कैलाशी देवी चुनाव मैदान में रहीं, जिसमें निर्मला 20वें और कैलाशी देवी 13वें स्थान पर रहीं।
1996 के चुनाव में रंजना यादव फूलपुर से चुनाव मैदान में रही और मेंहनगर से विद्या चौधरी को टिकट मिला। दोनों ही उपविजेता रहीं। 2002 में बसपा ने विद्या चौधरी पर भरोसा जताते हुए मेंहनगर से फिर टिकट दिया। जिसमें विद्या चौधरी को विजय मिली। वहीं, निजामाबाद से विमला और फूलपुर से रंजना यादव तीसरे स्थान पर रहीं। 2007 में विद्या चौधरी बसपा के टिकट पर फिर विजय हासिल की और मंत्री पद पर आसीन हुई। वहीं, 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें मेंहनगर सीट से हार का सामना करना पड़ा। इस बार पार्टी ने एकबार फिर उन पर विश्वास जताते हुए उम्मीदवार बनाया है।
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भाजपा ने जहां महिला सशक्तीकरण को लेकर बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ कार्यक्रमों पर बल दिया। वहीं, सपा ने महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा और सुविधाओं के लिए अनेक योजनाएं चलाईं। राजनीति में महिलाओं की भागीदारी की बात आई तो दोनों पार्टियों ने जिले में टिकट बंटवारे में महिलाओं को उपेक्षित कर दिया। बहुजन समाज पार्टी ने सगड़ी विधानसभा से वंदना सिंह और मेंहनगर विधानसभा से विद्या चौधरी को टिकट देकर महिलाओं के मनोबल को बढ़ाया है। वहीं, भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल भारतीय समाज पार्टी ने मेंहनगर से मंजू सोनकर पर विश्वास जताया है।
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इससे पहले के चुनावों पर नजर डालें तो 1952 के विधानसभा चुनाव में फूलपुर विधानसभा से कांग्रेस की आशालता व्यास ने दलित विधायक के रूप में खाता खोला था। 1957 के चुनाव में लालगंज से कांग्रेस ने सूर्यमुखी को टिकट दिया लेकिन वह छठे स्थान पर रहीं। 1962 के चुनाव में सोशलिस्ट पार्टी ने विजय लक्ष्मी को चुनाव मैदान में उतारा, जो पांचवें स्थान पर रहीं। 1967, 1969, 1974, 1977 और 1980 तक राजनीतिक दलों ने महिलाओं को टिकट नहीं दिया। 1985 में सगड़ी से कांग्रेस ने शारदा सिंह और सीपीआई ने संतोष सिंह (महिला) को चुनाव मैदान में उतारा लेकिन दोनों में शारदा दूसरे और संतोष पांचवें स्थान पर रहीं।
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इसी चुनाव में अतरौलिया से प्रेमबाला को 12वां और मेहनगर से शांति 10वें स्थान पर रहीं। 1989 में सरायमीर विधानसभा से विद्या देवी और लालगंज से शैलकुमारी ने भाग्य आजमाया। शैल तीसरे और विद्या छठे स्थान पर रहीं। 1991 में निजामाबाद विधानसभा से रुचि चुनाव लड़ीं, जो छठे स्थान पर रहीं। गोपालपुर विधानसभा से पुष्पा नौवें स्थान रहीं। 1993 में निजामाबाद विधानसभा से निर्मला और अतरौलिया विधानसभा से कैलाशी देवी चुनाव मैदान में रहीं, जिसमें निर्मला 20वें और कैलाशी देवी 13वें स्थान पर रहीं।
1996 के चुनाव में रंजना यादव फूलपुर से चुनाव मैदान में रही और मेंहनगर से विद्या चौधरी को टिकट मिला। दोनों ही उपविजेता रहीं। 2002 में बसपा ने विद्या चौधरी पर भरोसा जताते हुए मेंहनगर से फिर टिकट दिया। जिसमें विद्या चौधरी को विजय मिली। वहीं, निजामाबाद से विमला और फूलपुर से रंजना यादव तीसरे स्थान पर रहीं। 2007 में विद्या चौधरी बसपा के टिकट पर फिर विजय हासिल की और मंत्री पद पर आसीन हुई। वहीं, 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें मेंहनगर सीट से हार का सामना करना पड़ा। इस बार पार्टी ने एकबार फिर उन पर विश्वास जताते हुए उम्मीदवार बनाया है।