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आजमगढ़ जेल से तीन बंदी फरार

Fri, 19 Aug 2016 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ Updated Fri, 19 Aug 2016 11:42 PM IST
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 Azamgarh three prisoners escaped from prison
आजमगढ़ जेल से तीन बंदी फरार
शहर के इटौरा मोड़ स्थित जिला कारागार की 22 फुट ऊंची दीवार फांदकर गुरुवार की शाम तीन बंदी फरार हो गए। शाम 7.30 बजे बंदियों की गिनती के समय इसका पता चला तो जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। जानकारी होते ही डीआईजी जेल गोरखपुर रेंज यादुवेंद्र शुक्ल रात में ही जिला जेल पहुंच गए।
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इस मामले में जेलर आरके दोहरे समेत चार बंदी रक्षक हरेकृष्ण, अंबिका यादव, मनीष सिंह और वीरेंद्र यादव निलंबित कर दिए गए हैं। जेल में 32 सीसी कैमरे लगे हैं लेकिन उन्हें चालू नहीं किया गया है। इससे इनकी गतिविधियों की जानकारी नहीं मिल सकी है। तीनों बंदी 2014 में तरवां स्थित हनुमान मंदिर में तीन लोगों की हत्या के बाद मुकुट, आभूषण आदि लूटने के मामले में बंद थे। डीएम सुहास एलवाई ने घटना की मजिस्ट्रेटी जांच का आदेश दिया है। वहीं पुलिस अधीक्षक अजय कुमार साहनी ने बदमाशों को गिरफ्तारी के लिए पांच टीमें गठित की हैं। फरार बंदियों के तार नक्सलियों से भी जुड़े हुए बताए जा रहे हैं।
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डीआईजी जेल यादुवेंद्र शुक्ल ने बताया कि फरार तीनों बंदी गाजीपुर जिले के हैं। इनमें मरदह थाना क्षेत्र के महाहर गांव निवासी प्रकाश मुसहर, गहमर थाना क्षेत्र के मनिया गांव निवासी चंद्रशेखर उर्फ शेखर मुसहर और नंदगंज थाना क्षेत्र के अगस्ता गांव निवासी जितेंद्र मुसहर है। तीनों हत्या के मामले में बंद थे। तीनों की ड्यूटी जेल के भंडारे में थी। गुरुवार को रक्षाबंधन का दिन होने से जेल स्टाफ मुलाकात करने वालों को लेकर व्यस्त रहा जिसका फायदा उठाते हुए इन तीनों बंदियों ने गैस पाइप लाइन की पाइप को काट कर रख लिया था।
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शाम छह बजे स्टाफ बंदियों को भोजन बंटवाने में व्यस्त था। इसका फायदा उठाते हुए तीनों ने योजनाबद्ध तरीके से लोहे का पल्टा मोड़कर पाइप के अगले हिस्से में बांध दिया और उसके सहारे 22 फीट ऊंची दीवार पर चढ़ गए और एक चद्दर को दो भागों में फाड़ कर दूसरी तरफ नीचे उतर गए। शाम 7.30 बजे बैरक में बंदियों की गणना हुई तो उनके फरार होने की सूचना जेल अधीक्षक डा. रामधनी को दी गई। उन्होंने अन्य अधिकारियों को सूचना दी।


डीआईजी कहा कि यहां स्टाफ काफी कम हैं। 73 बंदीरक्षकों की तुलना में महज 53 स्टाफ तैनात हैं। इनमें से गुरुवार को पांच छुट्टी पर थे, शेष अन्य कार्यों में व्यस्त रहे। जेल में 32 कैमरे लगाए पर अभी इन्हें चालू नहीं किया गया है। कैमरों को चालू कराने के लिए संबंधित संस्था राजकीय निर्माण निगम को पत्र लिखा गया पर अभी तक उन्हें चालू नहीं किया गया है। बताया गया बदमाशों की गिरफ्तारी के बाद नक्सलियों की ओर से एसओ तरवां को धमकी दी गई थी। 
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