प्राइवेट संस्थानों ने संभाला मोर्चा

Azamgarh Updated Sun, 16 Dec 2012 05:30 AM IST
किसान जुटाने में असफल रहा किसान मेला
खेती के पीक आवर और भीषण ठंड के चलते किसानों का नहीं हुआ रुझान
कई विभागों का नहीं लगा स्टाल, ज्यादातर ने निभाई औपचारिकता
अमर उजाला ब्यूरो
मऊ। तीन दिनी किसान महोत्सव शनिवार को जैसे तैसे संपन्न हो गया। गेहूं बोआई के अंतिम दौर और सिंचाई के समय इस महोत्सव में भले ही शासन से विकास विभाग के सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि वह अपने स्टाल लगाकर सभी को योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें लाभान्वित करें। लेकिन भीड़ के अभाव और प्रचार प्रसार की कमी के चलते यह महोत्सव सिर्फ औपचारिकता निभाया।
किसान महोत्सव के लिए जीवनराम छात्रावास के मैदान पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों से लेकर किसानों से जुड़े विभिन्न स्टाल भी लगाए गए थे। विभागों के लगे स्टाल ज्यादातर औपचारिकता निभाते रहे। इनमें किसानों और विकास विभाग से जुड़े कई विभागाें का तो पता ही नहीं लगा। लघु सिंचाई विभाग के न रहने से निशुल्क बोरिंग योजना के बार में जानने के लिए किसान भटकते रहे। सिंचाई विभाग का भी कोई पता नहीं चला। बीज अनुसंधान का स्टाल तो लगा था लेकिन उसमें किसानों को जानकारी देने के लिए किसी का पता ही नहीं था। जमालपुर बुलंद निवासी राजेश चौहान का कहना था कि वह महोत्सव में दवा छिड़कने की मशीन खरीदने आए थे लेकिन दो मशीन मांगने पर उन्हें कार्यालय और दुकान का रास्ता दिखाया गया। काझा निवासी गुलाबचंद्र राय ने बताया कि उन्हें बोरिंग की पाइप लेनी थी लेकिन लघु सिंचाई या इस प्रकार की कोई यहां जानकारी न मिलने पर वह घर चले गए। महोत्सव में कुछ दुकानों पर डीएपी और यूरिया की बोरी भी रखी गई थी लेकिन वह सिर्फ दिखावे के लिए ही थी। किसानों द्वारा उसे मांगने पर उन्हें भी दुकानों का ही रास्ता दिखाया गया। एनबीआईएम के लगे स्टाल पर एक दो कर्मचारी थे लेकिन वह बिना तैयारी के चलते किसानों को कुछ भी बता पाने में समर्थ थे। कीटों एवं उपयोगी सुक्ष्मजीवों के बारे में भी जनपद के किसानों को जानकारी नहीं मिल सकी।

निर्वाचन विभाग का स्टाल बना शो पीस
मऊ। किसान महोत्सव में निर्वाचन विभाग का भी स्टाल लगाया गया था। यहां मतदाता सूची तो नहीं थी लेकिन नए मतदाता बनने, नाम काटने और नाम के संसोधन संबंधित फार्म अवश्य थे। सैकड़ों लोग इस महोत्सव में विभिन्न फार्म लिए लेकिन इसे भरकर जमा करने की व्यवस्था न होने के चलते फार्म लेकर लोग अपने घर चले गए। यह स्टाल भी शो पीस ही बना रहा।

उद्यान विभाग में सिर्फ मिर्जा और फूल का बीज
मऊ। उद्यान विभाग के लगे स्टाल पर फल और सब्जियां बाजार की तो बहुत दिखीं लेकिन यहां बीज के लिए किसान भटकते रहे। दुकान पर मिर्चा और एक फूल के बीज को छोड़कर कुछ भी नहीं मिला।


मऊ। किसान महोत्सव में जहां सरकारी विभागों के लगे स्टाल सिर्फ खानापूर्ति करते मिले वहीं प्राइवेट संस्थानों ने कुछ लाज रखी। कुशवाहा सीड्स, नेशनल सीड्स, प्रसाद बीज भंडार, वाटर कूलर, प्राइवेट दुकानों के कृषि यंत्र आदि ने मोर्चा संभालकर महोत्सव की कुछ इज्जत बचाई।

प्रचार प्रसार के अभाव में रंगत हुई फीकी
मऊ। किसान महोत्सव को लेकर भीड़ न जुटने के पीछे एक मुख्य कारण इसके प्रचार प्रसार को लेकर भी रहा। आनन फानन में आए शासनादेश के बाद न तो प्रशासन ने ही इसके प्रचार प्रसार की कोई मुकम्मल व्यवस्था की और नहीं इसके लिए ठोस प्रयास ही किए गए। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि इस मद में कोई अतिरिक्त बजट न होने को लेकर विभागों के आपसी सहयोग से किसान महोत्सव संपन्न कराया गया। बावजूद इसके किसान महोत्सव काफी हद तक सफल रहा।

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