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पुण्यतिथि पर याद किए गए मशहूर शायर कैफी आजमी
Updated Fri, 11 May 2018 12:08 AM IST
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मेजवां। उर्दू के मशहूर शायर कैफी आजमी की 16 वीं पुण्यतिथि गुरुवार को फूलपुर तहसील क्षेत्र के मेजवा गांव स्थित फतेह मंजिल और फूलपुर के कैफी आजमी पायनियर स्कूल में मनाई गई। दोनो स्थानों पर लोगों ने दिवंगत शायर कैफी आजमी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उनके पद चिह्नों पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मिजवां सोसायटी के उपप्रबंधक आशुतोष त्रिपाठी और पायनियर स्कूल के प्रबंधक शिवप्रसाद जायसवाल ने दीप प्रज्वालित कर और श्रद्धा सुमन अर्पित कर किया। शिवप्रसाद जायसवाल ने कहा कि कैफी साहब गांव का विकास चाहते थे। उन्होंने अपनी क्रांतिकारी लेखनी के माध्यम से गरीबों और मजदूरों की आवाज को बुलंद किया है। आशुतोष त्रिपाठी ने कहा कि सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम उनके बताए रास्ते पर चलेंगे। कैफी आजमी चिकनकारी सेंटर इंचार्ज संयोगिता ने कहा कि कैफी साहब ने महिलाओं पर नज्म लिखकर उनके आत्मबल को बढ़ाया है। आज मेजवां गांव में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई परियोजनाओं को संचालित किया जा रहा है। कैफी आजमी के सेवक रहे गोपाल ने कहा कि कैफी साहब जो कहते थे उसे वे जरूर करते थे। आज उनके न रहने पर उनकी कमी लोग महसूस करते हैं। इस दौरान मरहूम शायर के जीवन काल में प्रयोग की जाने वाली वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई गई जिसे देखने के लिए काफी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। अध्यक्षता समाजसेवी मुहम्मद हाशिम और संचालन सुनील प्रजापति, जीतेंद्र मिश्रा ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर निर्मला, आर्यन, अंशुमान, प्रतीक जायसवाल, प्रवेश कुमार, सोनू ठाकुर, अनिरुद्ध, मनोज कुमार, सीताराम, प्रकाश, जयकिशन, आफताब, लल्लन, रामफेर आदि उपस्थित थे।
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कार्यक्रम की शुरुआत मिजवां सोसायटी के उपप्रबंधक आशुतोष त्रिपाठी और पायनियर स्कूल के प्रबंधक शिवप्रसाद जायसवाल ने दीप प्रज्वालित कर और श्रद्धा सुमन अर्पित कर किया। शिवप्रसाद जायसवाल ने कहा कि कैफी साहब गांव का विकास चाहते थे। उन्होंने अपनी क्रांतिकारी लेखनी के माध्यम से गरीबों और मजदूरों की आवाज को बुलंद किया है। आशुतोष त्रिपाठी ने कहा कि सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम उनके बताए रास्ते पर चलेंगे। कैफी आजमी चिकनकारी सेंटर इंचार्ज संयोगिता ने कहा कि कैफी साहब ने महिलाओं पर नज्म लिखकर उनके आत्मबल को बढ़ाया है। आज मेजवां गांव में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई परियोजनाओं को संचालित किया जा रहा है। कैफी आजमी के सेवक रहे गोपाल ने कहा कि कैफी साहब जो कहते थे उसे वे जरूर करते थे। आज उनके न रहने पर उनकी कमी लोग महसूस करते हैं। इस दौरान मरहूम शायर के जीवन काल में प्रयोग की जाने वाली वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई गई जिसे देखने के लिए काफी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। अध्यक्षता समाजसेवी मुहम्मद हाशिम और संचालन सुनील प्रजापति, जीतेंद्र मिश्रा ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर निर्मला, आर्यन, अंशुमान, प्रतीक जायसवाल, प्रवेश कुमार, सोनू ठाकुर, अनिरुद्ध, मनोज कुमार, सीताराम, प्रकाश, जयकिशन, आफताब, लल्लन, रामफेर आदि उपस्थित थे।
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