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योग से होती है मन और आत्मा शुद्ध
Updated Mon, 24 Jul 2017 11:23 PM IST
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आजमगढ़। वर िष्ठ नागरूिक सेवा संस्थान की आध्यात्मिक चिंतन संगोष्ठी का आयोजन सोमवार को अराजीबाग में अध्यक्ष तीरथ यादव की अध्यक्षता में हुई। उन्होंने कहा कि योग से मन और आत्मा दोनो ही शुद्ध होती है।
उन्होंने कहा कि स्थूल शरीर में सूक्ष्म शरीर भी होता है, जिसे आत्मा कहते है। गीता में भगवान कृष्ण ने कहा कि विद्याओं में आध्यात्म विधा है। यही ज्ञान मानव जीवन के लिए आवश्यक है। वेद में कहा गया है कि आत्म तत्व की जानकारी प्राप्त किए बिना मर जाना आत्महंता होता है। अनिरुद्ध पांडेय ने पतंजलि के अष्टांग योग की उपादेयता पर प्रकाश डाला और मानव जीवन के लिए आवश्यक कहा। इस अवसर पर संरक्षक इंजीनियर रामनरायन शर्मा, डा. मातबर मिश्र, दिलशेर यादव, डा. आरपी श्रीवास्तव, डा. हृदय नरायन पाठक, बंशीधर द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि स्थूल शरीर में सूक्ष्म शरीर भी होता है, जिसे आत्मा कहते है। गीता में भगवान कृष्ण ने कहा कि विद्याओं में आध्यात्म विधा है। यही ज्ञान मानव जीवन के लिए आवश्यक है। वेद में कहा गया है कि आत्म तत्व की जानकारी प्राप्त किए बिना मर जाना आत्महंता होता है। अनिरुद्ध पांडेय ने पतंजलि के अष्टांग योग की उपादेयता पर प्रकाश डाला और मानव जीवन के लिए आवश्यक कहा। इस अवसर पर संरक्षक इंजीनियर रामनरायन शर्मा, डा. मातबर मिश्र, दिलशेर यादव, डा. आरपी श्रीवास्तव, डा. हृदय नरायन पाठक, बंशीधर द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।
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