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मौत के बाद सहायता लेकर पहुंचा प्रशासन
Updated Thu, 26 Oct 2017 11:43 PM IST
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सगड़ी। नगर पंचायत जीयनपुर के बाजार खास मोहल्ला निवासी 60 वर्षीय अमिना खातून की भूखमरी की वजह से बुधवार को मौत हो गई। भूख से तड़पकर अमिना की मौत के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। डीएम के निर्देश पर तत्काल तहसीलदार सगड़ी पीके राय आर्थिक सहायता और राशन लेकर पहुंचे और परिवार में इकलौती बची 45 वर्षीय अमिना की बहन खदीजा को सौंप दिया। उधर बहन की मौत से सदमे में खदीजा गुरुवार को भी किसी से कुछ बात करने की स्थिति में नहीं थी।
बता दें कि वर्ष 1947 में नेमातुल्लाह अपने परिवार के साथ यमन देश चले गए। वहां टेलर का काम करने लगे। वहीं पर उन्हें चार पुत्र और तीन पुत्रियां हुई। वष 1965 में नेमातुल्लाह की मौत हो गई। इसके बाद वर्ष 1970 में नेमातुल्ला की पत्नी हलीमा खातूम अपने बच्चों को लेकर जीयनपुर चली आई और नगर पंचायत जीयनपुर के बाजार खास मुहल्ले में रहने लगी। देखरेख के अभाव में पुश्तैनी मकान जर्जर हो गया। आर्थिक तंगी और भूखमरी की वजह से परिवार के एक-एक सदस्य की मौत होते चली गई। वर्तमान समय में अमिना (60) और बहन खदीजा (45) ही परिवार मयें बची थी। अंग्रेजी, हिन्दी और अरबी भाषा की इन्हें अच्छी जानकारी थी। शादी किसी की नहीं हुई थी। अमिना का भाई किसी तरह से अपना राशनकार्ड बनवाया था। लेकिन वर्ष 2015 में उसकी मौत के बाद वह भी खत्म हो गया। अमिना ने कार्ड बनाने के लिए आवेदन किया था। लेकिन अभी तक कार्ड नहीं बन सका। उसे कुछ दिनों तक समाजवादी पेंशन का 500 रुपये मिलता था। लेकिन सरकार बदलने के साथ ही वह भी बंद हो गया। कहीं से कोई आमदनी और सरकारी सहायता न मिलने की वजह से दोनों बहनों का हाल बेहाल था। भूख से तड़पकर बुधवार को अमिना की मौत हो गई। जबकि बहन खदीजा सदमे में है। भूखमरी से अमिना के मौत की सूचना से हड़कंप मच गया। सूचना पर कोतवाल जीयनपुर पहुंचे और पांच सौ रुपये की आर्थिक मदद और कोटेदार से 25 किलो गेहूं और 25 किलो चावल दिलवाया। जबकि तहसीलदार सगड़ी पीके राय ने उसे एक हजार रुपये नगद और 50 कैिलो गेहूं, 50 किलो चावल दिया। पड़ोसी सैरुनिशा ने बताया कि अमिना ही घर में भोजन बनाती थी। उसकी बहन खदीजा को भोजन तक नहीं बनाने आता है। वह कभी अपने घर से बाहर तक नहीं निकलती है। उसने बताया कि इससे पहले खैरात के पैसे से काम चलता था। लेकिन अब वह भी बंद हो गया था। एसडीएम सगड़ी मुश्रिीलाल ने कहा कि पूर्ति निरीक्षक से खदीजा का कार्ड जल्द बनाने को कहा गया है। साथ ही पूरे मामले की जांच करवाई जा रही है। जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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बता दें कि वर्ष 1947 में नेमातुल्लाह अपने परिवार के साथ यमन देश चले गए। वहां टेलर का काम करने लगे। वहीं पर उन्हें चार पुत्र और तीन पुत्रियां हुई। वष 1965 में नेमातुल्लाह की मौत हो गई। इसके बाद वर्ष 1970 में नेमातुल्ला की पत्नी हलीमा खातूम अपने बच्चों को लेकर जीयनपुर चली आई और नगर पंचायत जीयनपुर के बाजार खास मुहल्ले में रहने लगी। देखरेख के अभाव में पुश्तैनी मकान जर्जर हो गया। आर्थिक तंगी और भूखमरी की वजह से परिवार के एक-एक सदस्य की मौत होते चली गई। वर्तमान समय में अमिना (60) और बहन खदीजा (45) ही परिवार मयें बची थी। अंग्रेजी, हिन्दी और अरबी भाषा की इन्हें अच्छी जानकारी थी। शादी किसी की नहीं हुई थी। अमिना का भाई किसी तरह से अपना राशनकार्ड बनवाया था। लेकिन वर्ष 2015 में उसकी मौत के बाद वह भी खत्म हो गया। अमिना ने कार्ड बनाने के लिए आवेदन किया था। लेकिन अभी तक कार्ड नहीं बन सका। उसे कुछ दिनों तक समाजवादी पेंशन का 500 रुपये मिलता था। लेकिन सरकार बदलने के साथ ही वह भी बंद हो गया। कहीं से कोई आमदनी और सरकारी सहायता न मिलने की वजह से दोनों बहनों का हाल बेहाल था। भूख से तड़पकर बुधवार को अमिना की मौत हो गई। जबकि बहन खदीजा सदमे में है। भूखमरी से अमिना के मौत की सूचना से हड़कंप मच गया। सूचना पर कोतवाल जीयनपुर पहुंचे और पांच सौ रुपये की आर्थिक मदद और कोटेदार से 25 किलो गेहूं और 25 किलो चावल दिलवाया। जबकि तहसीलदार सगड़ी पीके राय ने उसे एक हजार रुपये नगद और 50 कैिलो गेहूं, 50 किलो चावल दिया। पड़ोसी सैरुनिशा ने बताया कि अमिना ही घर में भोजन बनाती थी। उसकी बहन खदीजा को भोजन तक नहीं बनाने आता है। वह कभी अपने घर से बाहर तक नहीं निकलती है। उसने बताया कि इससे पहले खैरात के पैसे से काम चलता था। लेकिन अब वह भी बंद हो गया था। एसडीएम सगड़ी मुश्रिीलाल ने कहा कि पूर्ति निरीक्षक से खदीजा का कार्ड जल्द बनाने को कहा गया है। साथ ही पूरे मामले की जांच करवाई जा रही है। जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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