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रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार को लेकर धरना
Updated Fri, 15 Sep 2017 11:47 PM IST
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आजमगढ़। राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के तत्वावधान में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद मदरसा जामियतुर्रशाद के पास म्यांमार में रोहिग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार और कत्लेआम की घटना को लेकर धरना दिया। कौंसिल के वक्ताओं ने केंद्र सरकार से अंर्तराष्ट्रीय प्रभाव से विश्व स्तर पर शांति और सामंजस्य को बढ़ावा दिए जाने की मांग की।
धरने को संबोधित करते हुए कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने कहा कि भारत ने विश्व स्तर पर शांति और सामंजस्य को बढ़ावा देने और स्थापित किए जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आगे कहा कि आज भारत बढ़ते हुए अंर्तराष्ट्रीय प्रभाव और वैश्विक मामलों में एक प्रमुख आवाज है। हमारा देश दुनिया भर में शांतिपूर्ण मिशनों के अग्रणी अभियानों में आगे है। धरने को संबोधित करते हुए शिया धर्मगुरु तहजीबुल हसन ने कहा कि पड़ोसी देशों में शांति और एकता बनाए रखने के प्रयासों के लिए भारत के लिए जरुरी हो जाता है कि म्यांमार के संघीय गणराज्य के रोहिग्या अल्पसंख्यक की स्थिति पर ध्यान दिया जाए। मौलाना इंतखाब आलम ने कहा कि म्यांमार में बहुसंख्यकों के अत्याचार और जुर्म का शिकार रोहिग्यों मुसलमान हो रहे है। जिसके कारण अब तक बीस हजार से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो चुकी है और लाखों लोगों को विस्थापित होने के लिए मजबूर कर दिया गया। केंद्र सरकार से हमारी मांग है कि विश्व पटल पर इनकी आवाज को उठाया जाए। धरने में कारी सईद, इम्तेयाज, डा. आमिर, हफिज, वसीम, नूरुलहुदा आदि उपस्थित रहे।
वहीं निजामाबाद भी शुक्रवार को वामी संघर्ष मोर्चा आजमगढ़ ने तहसील पर प्रदर्शन किया। उपजिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा। संयोजक नदीम खान ने कहा कि म्यांमार सरकार द्वारा निहत्थे लोगों, मासूम बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का सरेआम कत्ल किया जा रहा है। जिससे मजबूर कर रोहंगिया मुसलमान पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने भारत सरकार से मांग करते हुए कहा कि म्यांमार सरकार पर दबाव बना कत्लेआम को रोका जाए और वहां रह रहे हिंदुओं और रोहिंग्या मुसलमानों की सुरक्षा के प्रबंध के साथ उनके पलायन को रोका जाए।
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धरने को संबोधित करते हुए कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने कहा कि भारत ने विश्व स्तर पर शांति और सामंजस्य को बढ़ावा देने और स्थापित किए जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आगे कहा कि आज भारत बढ़ते हुए अंर्तराष्ट्रीय प्रभाव और वैश्विक मामलों में एक प्रमुख आवाज है। हमारा देश दुनिया भर में शांतिपूर्ण मिशनों के अग्रणी अभियानों में आगे है। धरने को संबोधित करते हुए शिया धर्मगुरु तहजीबुल हसन ने कहा कि पड़ोसी देशों में शांति और एकता बनाए रखने के प्रयासों के लिए भारत के लिए जरुरी हो जाता है कि म्यांमार के संघीय गणराज्य के रोहिग्या अल्पसंख्यक की स्थिति पर ध्यान दिया जाए। मौलाना इंतखाब आलम ने कहा कि म्यांमार में बहुसंख्यकों के अत्याचार और जुर्म का शिकार रोहिग्यों मुसलमान हो रहे है। जिसके कारण अब तक बीस हजार से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो चुकी है और लाखों लोगों को विस्थापित होने के लिए मजबूर कर दिया गया। केंद्र सरकार से हमारी मांग है कि विश्व पटल पर इनकी आवाज को उठाया जाए। धरने में कारी सईद, इम्तेयाज, डा. आमिर, हफिज, वसीम, नूरुलहुदा आदि उपस्थित रहे।
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वहीं निजामाबाद भी शुक्रवार को वामी संघर्ष मोर्चा आजमगढ़ ने तहसील पर प्रदर्शन किया। उपजिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा। संयोजक नदीम खान ने कहा कि म्यांमार सरकार द्वारा निहत्थे लोगों, मासूम बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का सरेआम कत्ल किया जा रहा है। जिससे मजबूर कर रोहंगिया मुसलमान पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने भारत सरकार से मांग करते हुए कहा कि म्यांमार सरकार पर दबाव बना कत्लेआम को रोका जाए और वहां रह रहे हिंदुओं और रोहिंग्या मुसलमानों की सुरक्षा के प्रबंध के साथ उनके पलायन को रोका जाए।
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