{"_id":"5a5a4bc94f1c1bb03f8b4b61","slug":"111515867081-azamgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज नदियों व सरोवरों में डुबकी लगाएंगे श्रद्धालु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज नदियों व सरोवरों में डुबकी लगाएंगे श्रद्धालु
Updated Sat, 13 Jan 2018 11:41 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़ । मकर संक्रांति के पर्व पर आज नदियों, सरोवरों में लोग डुबकी लगाएंगे। इसके पश्चात खिचड़ी का दान करने के साथ ही उल्लासपूर्ण वातावरण में त्यौहार मनाया जाएगा। जिसकी तैयारी को लेकर शनिवार को बाजारों में काफी रौनक दिखाई दी। लाई, चूड़ा, गट्टा, गुड़ के साथ ही पतंग-मंझे की दुकाने जगह-जगह सजी हुई थी। जिनक खरीदारो की भीड़ उमड़ी हुई थी।
मकर संक्रांति के पर्व का हिन्दू धर्म में अपना अलग ही महत्व है।
मकर संक्रांति पर्व का काफी पौराणिक महत्व है। मान्यता है कि जब सूर्यदेव धनु राशि से मकर राशि में पहुंचते है तो मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। धनु से मकर राशि में सूर्य के जाने का यह भी महत्व होता है कि इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाता है और उत्रायण देवताओं का दिन माना जाता है। जिसके चलते इस दिन श्रद्धालु ताल, पोखरा, सरोवर व नदियों में डुबकी लगाने के साथ ही सुखी खिचड़ी का दान भी करते है। रविवार को पड़ रहे मकर संक्रांति के पर्व की तैयारी शनिवार को घर-घर देखने को मिली। शनिवार को दिन में सूर्य के निकल जाने के बाद तो घर-घर साफ-सफाई के साथ ही अन्य तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाने लगा। बाजारों की रौनक में भी इजाफा देखने को मिला। शहर के साथ ही ग्रामीणांचल में हर तिराहो-चौराहों और बाजारों में लाई, चूड़ा, गट्टा, गुड़, तिल के लड्डू आदि की दुकाने सजी हुई थी। इन दुकानों पर लोगों की भीड़ उमड़ी हुई थी। इसके साथ ही कई लोग मकर संक्रांति पर्व पर बनने वाले खिचड़ी के लिए नये चावल का इंतेजाम करने में भी जुटे देखे गए। उरद की दाल में बने खिचड़ी का इस पर्व पर विशेष महत्व है।
0000000000000000000000
पतंग-मंझा की भी सजी रही दुकाने
आजमगढ़। इस पर्व पर पतंगबाजी का भी अपना एक अलग ही महत्व है। दिन भर क्या बच्चे, क्या बड़े सभी पतंगबाजी का आनंद लेते है। पतंगबाजी करने वालों के लिए जगह-जगह पतंग व मंझे की भी दुकाने सजी हुई थी। जिस पर खरीदार दिन भर जुटे रहे। पतंगबाजी का असली आनंद उठाने वाले बच्चों की टोली इन दुकानों पर अपनी पसंद के पतंग व मंझे की खरीद में दिन भर जुटी रही। शहर में तो अब मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का मुकाबला नहीं होता है, फिर भी आसमान में इतने पतंग उड़ते है कि पूरा आसमान ही लाल, नीली, पीली, हरी पतंगों से रंगीन दिखाई देने लगती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मकर संक्रांति के पर्व का हिन्दू धर्म में अपना अलग ही महत्व है।
मकर संक्रांति पर्व का काफी पौराणिक महत्व है। मान्यता है कि जब सूर्यदेव धनु राशि से मकर राशि में पहुंचते है तो मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। धनु से मकर राशि में सूर्य के जाने का यह भी महत्व होता है कि इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाता है और उत्रायण देवताओं का दिन माना जाता है। जिसके चलते इस दिन श्रद्धालु ताल, पोखरा, सरोवर व नदियों में डुबकी लगाने के साथ ही सुखी खिचड़ी का दान भी करते है। रविवार को पड़ रहे मकर संक्रांति के पर्व की तैयारी शनिवार को घर-घर देखने को मिली। शनिवार को दिन में सूर्य के निकल जाने के बाद तो घर-घर साफ-सफाई के साथ ही अन्य तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाने लगा। बाजारों की रौनक में भी इजाफा देखने को मिला। शहर के साथ ही ग्रामीणांचल में हर तिराहो-चौराहों और बाजारों में लाई, चूड़ा, गट्टा, गुड़, तिल के लड्डू आदि की दुकाने सजी हुई थी। इन दुकानों पर लोगों की भीड़ उमड़ी हुई थी। इसके साथ ही कई लोग मकर संक्रांति पर्व पर बनने वाले खिचड़ी के लिए नये चावल का इंतेजाम करने में भी जुटे देखे गए। उरद की दाल में बने खिचड़ी का इस पर्व पर विशेष महत्व है।
विज्ञापन
0000000000000000000000
पतंग-मंझा की भी सजी रही दुकाने
आजमगढ़। इस पर्व पर पतंगबाजी का भी अपना एक अलग ही महत्व है। दिन भर क्या बच्चे, क्या बड़े सभी पतंगबाजी का आनंद लेते है। पतंगबाजी करने वालों के लिए जगह-जगह पतंग व मंझे की भी दुकाने सजी हुई थी। जिस पर खरीदार दिन भर जुटे रहे। पतंगबाजी का असली आनंद उठाने वाले बच्चों की टोली इन दुकानों पर अपनी पसंद के पतंग व मंझे की खरीद में दिन भर जुटी रही। शहर में तो अब मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का मुकाबला नहीं होता है, फिर भी आसमान में इतने पतंग उड़ते है कि पूरा आसमान ही लाल, नीली, पीली, हरी पतंगों से रंगीन दिखाई देने लगती है।
विज्ञापन