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Ayodhya News: पुष्पक विमान से आसमान में उड़ने का कर सकेंगे अहसास
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अयोध्या। रामायणकालीन पुष्पक विमान की अनुभूति देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को रामनगरी में सुलभ हो सकेगी। इसके लिए श्रीराम सांस्कृतिक शोध संस्थान न्यास की ओर से निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय रामायण संग्रहालय के लिए वाल्मीकि रामायण में वर्णित पुष्पक विमान का एक विकसित मॉडल तैयार किया जा रहा है। इसमें बैठकर लोग थ्री-डी के जरिये रामायणकालीन पुष्पक विमान यात्रा का आनंद ले सकेंगे। वाइब्रेशन के जरिये आसमान में उड़ने की अनुभूति भी कर सकेंगे।
पुष्पक विमान का मॉडल भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त इंजीनियर तथा वैदिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (विमान शास्त्र) के शोधकर्ता बिजय प्रसाद उपाध्याय तैयार कर रहे हैं, जो मूलरूप से ओडिशा से हैं। हाल ही में उन्होंने अयोध्या के कारसेवकपुरम में न्यास की ओर से आयोजित राष्ट्रीय कार्यकर्ता सम्मेलन में यह मॉडल प्रदर्शित किया है। उनका कहना है कि प्राचीन भारतवर्ष में विमान का प्रयोग होता था। इसका वर्णन प्राचीन इतिहास एवं तकनीकी ग्रंथों में प्राप्त होते हैं जो आज भी उपलब्ध हैं। इसके साथ ही पिछली सदी में विमान विद्या विषय पर प्रसिद्ध विद्वान पंडित शिवकर बापूजी तलपड़े ने शोध कार्य किया है। इन सब कार्यों का अध्ययन कर रामायण में वर्णित पुष्पक विमान के मॉडल को विकसित किया गया है।
उन्होंने बताया कि कोशिश है कि मॉडल में 20-40 लोग एक साथ बैठ सकें। इसे दो मंजिली (डबल डेकर) आकार देने की योजना है। यह रामायणकालीन पुष्पक विमान का एक विकसित मॉडल होगा, जिसमें बैठकर लोगों को पुष्पक विमान की अनुभूति होगी। लोगों को इसमें अर्वाचीन विमान जैसी वाइब्रेशन के साथ आकाश में उड़ने का अहसास होगा। विमान में सवार यात्री वीडियो के माध्यम से युद्ध समाप्ति के बाद श्रीराम और उनकी सेना द्वारा पुष्पक विमान में बैठकर जिस मार्ग से अयोध्या नगरी में वापस लौटे थे, उसकी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
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रामनगरी में संग्रहालय का निर्माण कार्य चल रहा है। उम्मीद है कि अगले साल तक यह बनकर तैयार हो जाएगा। इसमें वीडियो के माध्यम से लोगों को पूरी कहानी की जानकारी हासिल हो सकेगी। साथ ही रामायणकालीन विविध विषयों जैसे— चिकित्सा शास्त्र, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, पुष्पक विमान तथा युद्ध एवं रक्षा शास्त्र की जानकारी सुलभ हो सकेगी।
पुष्पक विमान का मॉडल तैयार कर रहे शोधकर्ता बिजय प्रसाद उपाध्याय का कहना है कि प्राचीन भारत में आध्यात्मिक विद्या के साथ-साथ भौतिक विद्या (इंजीनियरिंग) की शास्त्रीय परंपरा रही है। ऋषियों ने इसे विकसित कर प्राचीन प्रौद्योगिकी विषय को उपवेद ‘शिल्पवेद’ के रूप में प्रस्तुत किया हैं। ऋषि भृगु प्रणीत शिल्पवेद के एक दुर्लभ विश्वकोश ‘भृगु शिल्प संहिता’ शास्त्र में प्राचीन इंजीनियरिंग को विस्तारित कर प्रस्तुत किया गया है। इसके साधनखंड अंतर्गत अग्नियान शास्त्र में विमान विद्या का वर्णन है। उन्होंने बताया कि विमान विद्या से संबंधित प्राचीन ग्रंथों में आज महर्षि भरद्वाज कृत यन्त्रसर्वस्व का वैमानिक-प्रकरण, ऋषि अगस्त्य प्रणीत अगस्त्य शिल्प संहिता तथा राजा भोज लिखित ‘समरांगण-सूत्रधार’ आदि ग्रंथ प्राप्त होते हैं। वाल्मीकि रामायण में पुष्पक विमान से संबंधित ऐतिहासिक व तकनीकी जानकारी दी गई है। सीता माता के हरण तथा युद्ध के बाद अयोध्या प्रस्थान के समय पुष्पक विमान का उपयोग किया गया था। पुष्पक विमान का स्वरूप और संरचना कैसी थी, यह जानकारी भी वर्णित है। दो, तीन, चार सींगों जैसे दंत (गियर), चक्र (व्हील) आदि घटकों से मिलकर बनाए गए यंत्रों से संपन्न तथा वर्तुल पुष्प आकार में पुष्पक विमान हुआ करती थी। ऋषि भारद्वाज ने विमान को परिभाषित कर बताया है कि विहंग अर्थात पक्षियों के सदृश्य आकाश में एक देश से दूसरे देश, एक द्वीप से दूसरे द्वीप और एक लोक से दूसरे लोक में जिस यान से जाया जा सकता है, उसे ‘विमान’ कहा गया है।
बिजय प्रसाद उपाध्याय ने बताया कि वर्तमान में पुष्पक विमान के मॉडल पर काम चल रहा है। इसे अंतरराष्ट्रीय रामायण संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा। श्रद्धालु इसमें बैठकर प्राचीन रामायणकालीन पुष्पक विमान की अनुभूति कर सकेंगे। साथ ही थ्री-डी वीडियो के जरिये पुष्पक विमान यात्रा की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। आशा है कि यह लोगों में रोमांच के साथ-साथ अपने पूर्वजों की समृद्ध तकनीकी की अनुभूति उत्पन्न करेगा। इसके साथ ही समृद्धशाली प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की जानकारी प्राप्त हो सकेगी। रामायण, प्राचीन विमान शास्त्रों तथा पूर्व आचार्यों को आधारित कर पुष्पक विमान का मॉडल विकसित किया जा रहा है।
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पुष्पक विमान का मॉडल भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त इंजीनियर तथा वैदिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (विमान शास्त्र) के शोधकर्ता बिजय प्रसाद उपाध्याय तैयार कर रहे हैं, जो मूलरूप से ओडिशा से हैं। हाल ही में उन्होंने अयोध्या के कारसेवकपुरम में न्यास की ओर से आयोजित राष्ट्रीय कार्यकर्ता सम्मेलन में यह मॉडल प्रदर्शित किया है। उनका कहना है कि प्राचीन भारतवर्ष में विमान का प्रयोग होता था। इसका वर्णन प्राचीन इतिहास एवं तकनीकी ग्रंथों में प्राप्त होते हैं जो आज भी उपलब्ध हैं। इसके साथ ही पिछली सदी में विमान विद्या विषय पर प्रसिद्ध विद्वान पंडित शिवकर बापूजी तलपड़े ने शोध कार्य किया है। इन सब कार्यों का अध्ययन कर रामायण में वर्णित पुष्पक विमान के मॉडल को विकसित किया गया है।
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उन्होंने बताया कि कोशिश है कि मॉडल में 20-40 लोग एक साथ बैठ सकें। इसे दो मंजिली (डबल डेकर) आकार देने की योजना है। यह रामायणकालीन पुष्पक विमान का एक विकसित मॉडल होगा, जिसमें बैठकर लोगों को पुष्पक विमान की अनुभूति होगी। लोगों को इसमें अर्वाचीन विमान जैसी वाइब्रेशन के साथ आकाश में उड़ने का अहसास होगा। विमान में सवार यात्री वीडियो के माध्यम से युद्ध समाप्ति के बाद श्रीराम और उनकी सेना द्वारा पुष्पक विमान में बैठकर जिस मार्ग से अयोध्या नगरी में वापस लौटे थे, उसकी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
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रामनगरी में संग्रहालय का निर्माण कार्य चल रहा है। उम्मीद है कि अगले साल तक यह बनकर तैयार हो जाएगा। इसमें वीडियो के माध्यम से लोगों को पूरी कहानी की जानकारी हासिल हो सकेगी। साथ ही रामायणकालीन विविध विषयों जैसे— चिकित्सा शास्त्र, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, पुष्पक विमान तथा युद्ध एवं रक्षा शास्त्र की जानकारी सुलभ हो सकेगी।
पुष्पक विमान का मॉडल तैयार कर रहे शोधकर्ता बिजय प्रसाद उपाध्याय का कहना है कि प्राचीन भारत में आध्यात्मिक विद्या के साथ-साथ भौतिक विद्या (इंजीनियरिंग) की शास्त्रीय परंपरा रही है। ऋषियों ने इसे विकसित कर प्राचीन प्रौद्योगिकी विषय को उपवेद ‘शिल्पवेद’ के रूप में प्रस्तुत किया हैं। ऋषि भृगु प्रणीत शिल्पवेद के एक दुर्लभ विश्वकोश ‘भृगु शिल्प संहिता’ शास्त्र में प्राचीन इंजीनियरिंग को विस्तारित कर प्रस्तुत किया गया है। इसके साधनखंड अंतर्गत अग्नियान शास्त्र में विमान विद्या का वर्णन है। उन्होंने बताया कि विमान विद्या से संबंधित प्राचीन ग्रंथों में आज महर्षि भरद्वाज कृत यन्त्रसर्वस्व का वैमानिक-प्रकरण, ऋषि अगस्त्य प्रणीत अगस्त्य शिल्प संहिता तथा राजा भोज लिखित ‘समरांगण-सूत्रधार’ आदि ग्रंथ प्राप्त होते हैं। वाल्मीकि रामायण में पुष्पक विमान से संबंधित ऐतिहासिक व तकनीकी जानकारी दी गई है। सीता माता के हरण तथा युद्ध के बाद अयोध्या प्रस्थान के समय पुष्पक विमान का उपयोग किया गया था। पुष्पक विमान का स्वरूप और संरचना कैसी थी, यह जानकारी भी वर्णित है। दो, तीन, चार सींगों जैसे दंत (गियर), चक्र (व्हील) आदि घटकों से मिलकर बनाए गए यंत्रों से संपन्न तथा वर्तुल पुष्प आकार में पुष्पक विमान हुआ करती थी। ऋषि भारद्वाज ने विमान को परिभाषित कर बताया है कि विहंग अर्थात पक्षियों के सदृश्य आकाश में एक देश से दूसरे देश, एक द्वीप से दूसरे द्वीप और एक लोक से दूसरे लोक में जिस यान से जाया जा सकता है, उसे ‘विमान’ कहा गया है।
बिजय प्रसाद उपाध्याय ने बताया कि वर्तमान में पुष्पक विमान के मॉडल पर काम चल रहा है। इसे अंतरराष्ट्रीय रामायण संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा। श्रद्धालु इसमें बैठकर प्राचीन रामायणकालीन पुष्पक विमान की अनुभूति कर सकेंगे। साथ ही थ्री-डी वीडियो के जरिये पुष्पक विमान यात्रा की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। आशा है कि यह लोगों में रोमांच के साथ-साथ अपने पूर्वजों की समृद्ध तकनीकी की अनुभूति उत्पन्न करेगा। इसके साथ ही समृद्धशाली प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की जानकारी प्राप्त हो सकेगी। रामायण, प्राचीन विमान शास्त्रों तथा पूर्व आचार्यों को आधारित कर पुष्पक विमान का मॉडल विकसित किया जा रहा है।