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Ayodhya News: हस्त शिल्प में दक्ष हाेंगी पांच पर्यटन ग्राम की महिलाएं

Fri, 16 May 2025 10:31 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 16 May 2025 10:31 PM IST
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Women of five tourism villages will be skilled in handicrafts
अयोध्या। जिले के पांच पर्यटन ग्राम में महिलाओं को हस्त शिल्प में दक्ष किया जाएगा। रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या आने वाले श्रद्धालु जब इन गांवों में पहुंचेंगे तो उन्हें ग्रामीण पर्यटन का अनोखा और समृद्ध अनुभव होगा। इसके साथ ही इन गांवों में रहने वाली महिलाओं को आय का साधन भी मिलेगा।
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उत्तर प्रदेश ग्रामीण पर्यटन परियोजना एग्री रूरल व गंगे ग्राम रूरल टूरिज्म के तहत जिले में पांच ग्राम पंचायत मसौधा ब्लॉक की अबनपुर सरोहा, तारुन की गौरा घाट, मया की शेरवा घाट, मिल्कीपुर की रमपुरवा और मवई की अमौनी को पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन गांवों में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलने से न केवल स्थानीय लोगों को आय के अतिरिक्त साधन मिल सकेंगे, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी संरक्षण मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक विकास के लिए पर्यटन विभाग की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है।
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इसी क्रम में कार्यदायी संस्था आधारशिला संस्थान की ओर से चयनित पर्यटन गांवों में चरणबद्ध ढंग से हस्त शिल्प में रुचि रखने वाली महिलाओं को अगरबत्ती और धूप बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण से महिलाओं को आय के साधन मिलेंगे। उनके जीवन स्तर में बदलाव आने के साथ आर्थिक समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त होगा। बड़ी संख्या में महिलाएं इसके लिए आगे भी आ रही हैं। अगले चरण में इन महिलाओं को अन्य उत्पादों को बनाने का प्रशिक्षण दिए जाने की भी तैयारी है।
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इस योजना के तहत पर्यटन ग्रामों में होम स्टे और फार्म स्टे का विकास किया जा रहा है। यहां के युवाओं को गाइड के रूप में तैयार किया जा रहा है। महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों के लिए अलग से प्रशिक्षण सत्र आयोजित होंगे। पर्यटकों को सरयू में नौकायन कराने के लिए नाविक भी तैयार किए जाएंगे। ग्रामीणों को अवधी लोक कला की विभिन्न विधाओं में पारंगत करने की भी कार्ययोजना तैयार की गई है।

चयनित पर्यटन ग्रामों से श्रृंगी ऋषि आश्रम, तमसा नदी के गौरा घाट, शिव धाम और अमौनी मठ का जुड़ाव है। यह सभी स्थान स्वयं में आस्था और विश्वास के केंद्र हैं। यहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग अपने नेटवर्क के माध्यम से देश-दुनिया में इन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार भी करेगा, जिससे अन्य राज्यों के श्रद्धालु और विदेशी पर्यटक इन स्थलों पर और ज्यादा संख्या में आ सकें।

यहां पर आने वाले पर्यटक विकसित की गई व्यवस्थाओं के तहत होम स्टे में ठहरेंगे। स्थानीय समितियों के माध्यम से पौराणिक स्थलों के साथ ग्रामीण संस्कृति, कृषि व दुग्ध उत्पादन, बागवानी, ग्रामीण कौशल और ग्रामीण आजीविका के बारे में समझ विकसित कर सकेंगे। साथ ही शहर और महानगरों के प्रदूषण, जाम और व्यस्तता से निकल कर शुद्ध हवा का लुत्फ उठा सकेंगे।


इस प्रोजेक्ट से जुड़े ग्रामीण विकास विशेषज्ञ सुशील श्रीवास्तव बताते हैं कि हस्त शिल्प भारतीय संस्कृति की एक पहचान रही है। मशीनरी युग की वजह से यह कला विलुप्त होती नजर आ रही है। इसे संरक्षित तो करना है। साथ ही इसके माध्यम से उत्पाद तैयार करके हम सबको उपयोग में लाना होगा, जिससे पर्यावरण सुरक्षित रहे। कार्यदायी संस्था के जिला समन्वयक राम नारायण सिंह ने कहा कि हस्त शिल्प से बने उत्पाद पर्यटन ग्रामों में आने वाले पर्यटकों को लुभाएंगे और इनकी बिक्री यहां के ग्रामीणों की आमदनी का माध्यम बनेगी।
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