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Ayodhya News: महिलाओं ने सीखी सिलाई, बनाए स्वादिष्ट व्यंजन
Mon, 08 Sep 2025 09:21 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 08 Sep 2025 09:21 PM IST
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33- ग्रामीण महिला प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित करतीं अधिष्ठाता व विभागाध्यक्ष- विश्वविद
कुमारगंज। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय ने पिठला गांव में ग्रामीण महिलाओं के लिए परिधान निर्माण विषय पर 12 दिवसीय कौशल विकास प्रशिक्षण का आयोजन किया। प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश और कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह की पहल पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को शरीर की माप लेने, पेपर पर ड्राफ्टिंग करने और कपड़े की कटिंग के साथ सिलाई व वस्त्रों पर अलंकरण तकनीक के बारे में जानकारी दी गई। महिलाओं ने विभिन्न प्रकार के परिधानों व उपयोगी वस्तुएं जैसे एप्रन, कफ्तान, ब्लाउज व रोटी केस को बनाने का काम किया। अधिष्ठाता डॉ. साधना सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल सिलाई या वस्त्र निर्माण की तकनीकी जानकारी देना ही नहीं बल्कि महिलाओं को उद्यमिता व आत्मनिर्भरता के लिए तैयार करना है। परिधान निर्माण केवल एक कला ही नहीं आज के समय में आर्थिक अवसर और स्वरोजगार का बड़ा माध्यम है।
डाॅ. साधना ने कहा कि कौशल का प्रयोग सही दिशा में किया जाए तो निश्चित रूप से परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया जा सकता है। समाज की महिलाओं को गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को प्रेरित करने की जरूरत है। विभागाध्यक्ष डॉ. पूनम सिंह ने बताया कि सिलाई के क्षेत्र में कई अवसर उपलब्ध हैं। महिलाएं यदि काटने व सिलने की कला में निपुण हों तो घर पर सजावट व अन्य उपयोगी वस्तुओं को बनाकर जीविकोपार्जन कर सकती हैं। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण भी किया गया। इस दौरान सहायक प्राध्यापक डॉ. मनप्रीत कलसी, महिला अध्ययन केंद्र की सदस्य डॉ. अंजना राय, शैल कुमारी व डॉ प्रज्ञा पांडेय मौजूद रहीं।
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प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को शरीर की माप लेने, पेपर पर ड्राफ्टिंग करने और कपड़े की कटिंग के साथ सिलाई व वस्त्रों पर अलंकरण तकनीक के बारे में जानकारी दी गई। महिलाओं ने विभिन्न प्रकार के परिधानों व उपयोगी वस्तुएं जैसे एप्रन, कफ्तान, ब्लाउज व रोटी केस को बनाने का काम किया। अधिष्ठाता डॉ. साधना सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल सिलाई या वस्त्र निर्माण की तकनीकी जानकारी देना ही नहीं बल्कि महिलाओं को उद्यमिता व आत्मनिर्भरता के लिए तैयार करना है। परिधान निर्माण केवल एक कला ही नहीं आज के समय में आर्थिक अवसर और स्वरोजगार का बड़ा माध्यम है।
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डाॅ. साधना ने कहा कि कौशल का प्रयोग सही दिशा में किया जाए तो निश्चित रूप से परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया जा सकता है। समाज की महिलाओं को गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को प्रेरित करने की जरूरत है। विभागाध्यक्ष डॉ. पूनम सिंह ने बताया कि सिलाई के क्षेत्र में कई अवसर उपलब्ध हैं। महिलाएं यदि काटने व सिलने की कला में निपुण हों तो घर पर सजावट व अन्य उपयोगी वस्तुओं को बनाकर जीविकोपार्जन कर सकती हैं। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण भी किया गया। इस दौरान सहायक प्राध्यापक डॉ. मनप्रीत कलसी, महिला अध्ययन केंद्र की सदस्य डॉ. अंजना राय, शैल कुमारी व डॉ प्रज्ञा पांडेय मौजूद रहीं।
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