यूपी: त्रेतायुग का गौरवशाली प्रसंग दोहराएगी अयोध्या, प्रभु के राजतिलक को नतमस्तक होगी सरकार; ये बनेंगे साक्षी
अयोध्या के दसवें दीपोत्सव में त्रेतायुग के रामराज्याभिषेक प्रसंग की प्रतीकात्मक पुनरावृत्ति होगी। पुष्पक विमान के प्रतीक हेलीकॉप्टर से राम, सीता और लक्ष्मण पहुंचेंगे। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम दरबार में तिलक करेंगे। आयोजन में 30 लाख दीप, 2100 ड्रोन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण होंगे।
विस्तार
अवधपुरी आज फिर त्रेतायुग के उस स्वर्णिम प्रसंग को साकार करने जा रही है, जब वनवास पूरा कर प्रभु श्रीराम माता सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। रामचरितमानस की चौपाई ''अवधपुरी प्रभु आवत जानी, भई सकल सोभा कै खानी'' मानो रामनगरी के वर्तमान स्वरूप में जीवंत हो उठी है। रामकथा पार्क में सजे राम दरबार में राज्य सरकार नतमस्तक होगी और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भगवान श्रीराम का राजतिलक करेंगे।
इस बार का दीपोत्सव इसलिए भी इतिहास में दर्ज होने जा रहा है, क्योंकि पहली बार देश के उपराष्ट्रपति रामनगरी के इस महापर्व के साक्षी बनेंगे। पुनि पुष्पक चढ़ि कपिन्ह समेता, अवध चले प्रभु कृपा निकेता... रामचरितमानस की इन पंक्तियों का भाव शनिवार दोपहर रामकथा पार्क में साकार होगा।
पुष्पक विमान के प्रतीक स्वरूप हेलीकॉप्टर से प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण अयोध्या पहुंचेंगे। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने मंत्रियों व संतों के साथ उनका स्वागत करेंगे। इसके बाद भरत मिलाप का भावपूर्ण प्रसंग होगा। पुष्पवर्षा के बीच प्रभु श्रीराम रामकथा पार्क पहुंचेंगे, जहां भव्य राम दरबार सजा है।
प्रथम तिलक वसिष्ठ मुनि कीन्हा, पुनि सब विप्रन्ह आयसु दीन्हा... त्रेतायुग में महर्षि वशिष्ठ ने प्रभु श्रीराम का प्रथम राजतिलक किया था। उसी प्रसंग की प्रतीकात्मक पुनरावृत्ति दीपोत्सव में होगी। वशिष्ठ की भूमिका में उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रभु श्रीराम का तिलक कर राज्याभिषेक की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे। इससे पहले सुबह 10 बजे साकेत महाविद्यालय से निकलने वाली रामराज्याभिषेक शोभायात्रा में पुष्पक विमान, रथ, घुड़सवार, सैनिकों की टुकड़ियां और रामकथा के विविध प्रसंग रामनगरी को त्रेतायुगीन अवधपुरी का स्वरूप देंगे।
त्रेतायुग का गौरवशाली प्रसंग दोहराने जा रही अयोध्या
रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने जन्मभूमि के प्रति प्रभु श्रीराम के अनुराग को शब्द दिए हैं- ''जद्यपि सब बैकुंठ बखाना, वेद पुरान बिदित जग जाना। जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि, उत्तर दिसि बह सरजू पावनि।'' जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य कहते हैं कि दीपोत्सव में अयोध्या उसी गौरवशाली प्रसंग को अपनी आंखों के सामने दोहराने जा रही है। रामनगरी की सजावट भी इस उत्सव की कथा कह रही है।
तुलसी उद्यान के पास दीपोत्सव की तैयारियां निहार रहे महंत गिरीश दास कहते हैं, अवध में उत्सव है भारी। चौबीसों घंटे रामधुन और कीर्तन से गूंजती रामनगरी का वातावरण त्रेतायुग को सजीव कर रहा है। महंत विवेक आचारी अयोध्या में सजी होर्डिंग पर अंकित रामचरित मानस की पंक्ति पुनि देख अवधपुरी अति पावनि, त्रिबिध ताप भव रोग नसावनि... के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हैं। बोले कि दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति देने वाली इस पुण्यभूमि के दर्शन के लिए आज देश-दुनिया से श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। इसी वैश्विक आस्था का प्रतिबिंब दीपोत्सव में भी दिखाई दे रहा है।
दीपोत्सव में ये होगा आकर्षण
- साकेत महाविद्यालय से श्रीराम राज्याभिषेक यात्रा
- शोभायात्रा में 2500 कलाकारों की ओर से प्रस्तुति
- 17 मंचों पर लोक कलाकारों की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुति
- राम कथा पार्क में श्रीरामराज्याभिषेक समारोह
- राम की पैड़ी पर 30 लाख दीयों का प्रज्ज्वलन
- राम की पैड़ी पर लेजर शो, प्रोजेक्शन मैपिंग, लाइट एंड साउंड शो
- सरयू तट पर ग्रीन आतिशबाजी और 2100 ड्रोन शो
- सरयू तट पर 2147 श्रद्धालुओं की ओर से सामूहिक आरती
- रामकथा पार्क में तीन देशों की रामलीला का मंचन