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Ayodhya News: दबाव में कुलपति ने अधूरा छोड़ दिया कार्यकाल
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अयोध्या। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल ने अदृश्य दबाव में अपना कार्यकाल अधूरा छोड़ दिया। वह 60 दिनों का अर्जित अवकाश लेकर अपने पिता का इलाज कराने के लिए गई थीं। इस समय वह लुधियाना में प्रवास कर रही हैं। 24 जून को छुट्टी खत्म होने के बाद 25 को लौटना था लेकिन इसके पहले ही उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया।
राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की ओर से प्रो. गोयल के अवकाश पर जाने के बाद आठ मई को जारी आदेश के तहत आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह को अवध विश्वविद्यालय का भी प्रभार सौंपा गया था। इस बीच अवकाश पर चल रहीं प्रो. गोयल ने 26 मई को कुलाधिपति के समक्ष अपना त्यागपत्र प्रस्तुत कर दिया। इसके सात दिनों के बाद राज्यपाल ने तीन जून को इसे स्वीकार करते हुए प्रो. गोयल को कार्यमुक्त कर दिया।
इतना ही नहीं प्रो. गोयल का त्यागपत्र स्वीकार करने के बाद ही कुलाधिपति ने राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 10 के तहत कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति को ही एक बार फिर से अवध विश्वविद्यालय में नियमित कुलपति की नियुक्ति होने, छह माह की अवधि या अग्रिम आदेश, जो भी पहले हो तक के लिए फिर कुलपति नियुक्त कर दिया। इसी के साथ आठ मई को जारी आदेश स्वत: निरस्त हो गया।
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इसी के बाद से अवध विश्वविद्यालय के गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। ऐसा इसलिए भी कि यदि कुलपति प्रो. गोयल 24 जून को अपना अवकाश खत्म होने के बाद फिर से कामकाज संभालती तो अभी 22 नवंबर तक उनका कार्यकाल था। इस तरह उन्होंने अपने कार्यकाल में अभी करीब छह महीने बाकी होने के बावजूद इस्तीफा दे दिया। उनके इस निर्णय के पीछे की वजहों को अब तलाशा जा रहा है।
वैसे तो कुलपति अपने बीमार पिता के इलाज के लिए लंबी छुट्टी पर गई थीं। पहले उनका इलाज लखनऊ के एक अस्पताल में चला। इसके बाद यहां से डिस्चार्ज होने पर कुलपति वापस विश्वविद्यालय परिसर लौट आई थीं। यहां से फिर वह विश्वविद्यालय परिसर के अतिथि गृह में स्थित अपने आवास से सभी सामानों की पैकिंग करवाने के बाद लुधियाना अपने पैतृक शहर चली गईं। इस बीच कुछ प्राेफेसरों के वह संपर्क में भी रहीं। सभी को उनके वापस आने की उम्मीद थी। हालांकि ऐसा हो नहीं सका।
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राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की ओर से प्रो. गोयल के अवकाश पर जाने के बाद आठ मई को जारी आदेश के तहत आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह को अवध विश्वविद्यालय का भी प्रभार सौंपा गया था। इस बीच अवकाश पर चल रहीं प्रो. गोयल ने 26 मई को कुलाधिपति के समक्ष अपना त्यागपत्र प्रस्तुत कर दिया। इसके सात दिनों के बाद राज्यपाल ने तीन जून को इसे स्वीकार करते हुए प्रो. गोयल को कार्यमुक्त कर दिया।
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इतना ही नहीं प्रो. गोयल का त्यागपत्र स्वीकार करने के बाद ही कुलाधिपति ने राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 10 के तहत कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति को ही एक बार फिर से अवध विश्वविद्यालय में नियमित कुलपति की नियुक्ति होने, छह माह की अवधि या अग्रिम आदेश, जो भी पहले हो तक के लिए फिर कुलपति नियुक्त कर दिया। इसी के साथ आठ मई को जारी आदेश स्वत: निरस्त हो गया।
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इसी के बाद से अवध विश्वविद्यालय के गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। ऐसा इसलिए भी कि यदि कुलपति प्रो. गोयल 24 जून को अपना अवकाश खत्म होने के बाद फिर से कामकाज संभालती तो अभी 22 नवंबर तक उनका कार्यकाल था। इस तरह उन्होंने अपने कार्यकाल में अभी करीब छह महीने बाकी होने के बावजूद इस्तीफा दे दिया। उनके इस निर्णय के पीछे की वजहों को अब तलाशा जा रहा है।
वैसे तो कुलपति अपने बीमार पिता के इलाज के लिए लंबी छुट्टी पर गई थीं। पहले उनका इलाज लखनऊ के एक अस्पताल में चला। इसके बाद यहां से डिस्चार्ज होने पर कुलपति वापस विश्वविद्यालय परिसर लौट आई थीं। यहां से फिर वह विश्वविद्यालय परिसर के अतिथि गृह में स्थित अपने आवास से सभी सामानों की पैकिंग करवाने के बाद लुधियाना अपने पैतृक शहर चली गईं। इस बीच कुछ प्राेफेसरों के वह संपर्क में भी रहीं। सभी को उनके वापस आने की उम्मीद थी। हालांकि ऐसा हो नहीं सका।