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Ayodhya News: सीताराम के स्वागत में राम जन्मभूमि पहुंची मां सरयू की धारा
Mon, 02 Jun 2025 11:06 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 02 Jun 2025 11:06 PM IST
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अयोध्या। संध्या की रश्मियों ने जब सरयू की जलधारा को स्वर्णिम कर दिया, तब उस पावन तट पर एक अलौकिक दृश्य जन्म ले रहा था। शंखनाद की गूंज और मंत्रोच्चारण की ध्वनियांं दिव्यता को आमंत्रण दे रही थीं। राम मंदिर परिसर में आठ देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा से पहले सोमवार को सरयू तट से राम मंदिर तक भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जो श्रद्धा, भक्ति और संस्कृति का जीवंत प्रतीक बन गई। इस दृश्य पर संतों ने कहा कि भगवान सीताराम के स्वागत में मां सरयू की धारा राम जन्मभूमि परिसर में पहुंची है।
प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के मुख्य यजमान डॉ. अनिल मिश्र ने मां सरयू की पूजा-अर्चना व अभिषेक किया। सरयू के घाट पर काशी के आचार्य जय प्रकाश त्रिपाठी व अयोध्या के आचार्य पंडित प्रवीण शर्मा, पंडित इंद्रदेव मिश्र आदि आचार्यों ने पूजन की प्रक्रिया संपन्न कराई। करीब एक घंटे तक सरयू तट पर पूजन के बाद पीत वस्त्र में सुशोभित करीब 350 की संख्या में महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर घाट से राम मंदिर के लिए प्रस्थान किया। सिर पर पवित्र कलश धारण किए सैकड़ों मातृशक्तियां, श्रद्धालु और गगन भेदी जयघोष के साथ निकली कलश यात्रा आस्था का चरम प्रदर्शित कर रही थीं।
यह केवल यात्रा नहीं थी, आस्था की एक लहर थी, जो जन-जन के ह्रदय में देवत्व का संचार कर गई। राम मंदिर में सभी कलश यज्ञ मंडप में सुशोभित कर दिए गए। ऐसा लग रहा था जैसे सीताराम के स्वागत में माता सरयू राम जन्मभूमि परिसर में उतर आई हों। कलश यात्रा में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु ज्ञानानंद, स्वामी परमांनद, महंत दिनेंद्र दास, महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज, विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा समेत अन्य शामिल रहे।
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कलश यात्रा के मार्ग को पानी से स्वच्छ किया गया था। जगह-जगह पुष्पवर्षा कर कलश यात्रा का अभिनंदन होता रहा। मार्ग के दोनों ओर खड़े लोग हाथ जोड़कर इस मंजर को आत्मसात कर रहे थे। कलश यात्रा रामपथ होते हुए हनुमानगढ़ी, रामकोट फिर जैसे ही मंदिर परिसर के निकट पहुंची तो समय जैसे ठहर गया। सैकड़ों कलशों के साथ, मातृ शक्तियों व भक्तों की आंखों में प्रभु श्रीराम के दर्शन की तड़प स्पष्ट दिख रही थी। राम मंदिर में विराजमान रामलला के दर्शन कर कई मातृ शक्तियां भाव विह्वल नजर आ रहीं थीं।
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प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के मुख्य यजमान डॉ. अनिल मिश्र ने मां सरयू की पूजा-अर्चना व अभिषेक किया। सरयू के घाट पर काशी के आचार्य जय प्रकाश त्रिपाठी व अयोध्या के आचार्य पंडित प्रवीण शर्मा, पंडित इंद्रदेव मिश्र आदि आचार्यों ने पूजन की प्रक्रिया संपन्न कराई। करीब एक घंटे तक सरयू तट पर पूजन के बाद पीत वस्त्र में सुशोभित करीब 350 की संख्या में महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर घाट से राम मंदिर के लिए प्रस्थान किया। सिर पर पवित्र कलश धारण किए सैकड़ों मातृशक्तियां, श्रद्धालु और गगन भेदी जयघोष के साथ निकली कलश यात्रा आस्था का चरम प्रदर्शित कर रही थीं।
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यह केवल यात्रा नहीं थी, आस्था की एक लहर थी, जो जन-जन के ह्रदय में देवत्व का संचार कर गई। राम मंदिर में सभी कलश यज्ञ मंडप में सुशोभित कर दिए गए। ऐसा लग रहा था जैसे सीताराम के स्वागत में माता सरयू राम जन्मभूमि परिसर में उतर आई हों। कलश यात्रा में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु ज्ञानानंद, स्वामी परमांनद, महंत दिनेंद्र दास, महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज, विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा समेत अन्य शामिल रहे।
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कलश यात्रा के मार्ग को पानी से स्वच्छ किया गया था। जगह-जगह पुष्पवर्षा कर कलश यात्रा का अभिनंदन होता रहा। मार्ग के दोनों ओर खड़े लोग हाथ जोड़कर इस मंजर को आत्मसात कर रहे थे। कलश यात्रा रामपथ होते हुए हनुमानगढ़ी, रामकोट फिर जैसे ही मंदिर परिसर के निकट पहुंची तो समय जैसे ठहर गया। सैकड़ों कलशों के साथ, मातृ शक्तियों व भक्तों की आंखों में प्रभु श्रीराम के दर्शन की तड़प स्पष्ट दिख रही थी। राम मंदिर में विराजमान रामलला के दर्शन कर कई मातृ शक्तियां भाव विह्वल नजर आ रहीं थीं।