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Ayodhya News: आंखों में तैर गया काकोरी का मंजर

Sun, 02 Nov 2025 10:09 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Sun, 02 Nov 2025 10:09 PM IST
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The scene of Kakori floated before my eyes
35 -शताब्दी वर्ष होने पर काकोरी कांड की दास्तान सुनाते किस्सागो -संवाद
अयोध्या। अशफाकउल्ला खां मेमोरियल शहीद शोध संस्थान ने काकोरी एक्शन शताब्दी वर्ष पर शहीद अशफाकउल्ला खां के जीवन पर आधारित किस्सागोई का आयोजन किया। नारायण दास खत्री अध्ययन केंद्र रीडगंज में आयोजित कार्यक्रम में इप्टा लखनऊ के दास्तानगो शहजाद रिजवी तथा फरजाना महंदी ने काकोरी का मंजर ताजा कर दिया। उन्होंने शाहजहांपुर से शुरुआत करते हुए वर्ष 1857 के शहीद मौलवी अहमद उल्ला शाह की शहादत और गद्दारों पर रोशनी डाली। साथ ही नौ अगस्त 1925 को हुए काकोरी कांड को बताया।
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बताया कि काकोरी कांड योजना के सूत्रधार रामप्रसाद बिस्मिल थे। उनके साथ अशफाक उल्ला खां, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, बनवारीलाल, मन्मथनाथ गुप्त जैसे क्रांतिकारी थे। इन क्रांतिकारियों का मकसद अंग्रेजी हुकूमत को आर्थिक झटका देना और स्वतंत्रता संग्राम की क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए धन जुटाना था। काकोरी से लखनऊ जा रही सहारनपुर-लखनऊ ट्रेन में ब्रिटिश सरकार का खजाना जा रहा था। क्रांतिकारियों ने ट्रेन रोककर लोहे के बक्से में रखा सरकारी पैसा लूट लिया। यह घटना ने पूरे ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी।
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इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां की और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खां, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा सुनाई। बाकी साथियों को आजीवन कारावास मिला, जबकि चंद्रशेखर आजाद पुलिस के हाथ नहीं आए। अशफाक उल्ला खां को 19 दिसंबर 1927 को फैजाबाद जेल में फांसी दी दी गई।
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सभी श्रोताओं ने उनकी प्रस्तुति की मुक्तकंठ से प्रशंसा किया। दोनों किस्सागो ने काकोरी एक्शन में उनके योगदान और उनके संगठन के उद्देश्यों की सजीव चित्रण किया। श्रोताओं की आंखें नम हो गईं। इस प्रकार से देश के क्रांतिकारी इतिहास को संजोए रखने का यह अनूठा प्रयोग कामयाब रहा।
इस अवसर पर स्वप्निल श्रीवास्तव, रघुवंश मणि, आरडी आनन्द, कृष्ण प्रताप सिंह, सुमन गुप्ता अयोध्या प्रसाद तिवारी, अतीक अहमद, ओमप्रकाश यादव, सत्यभान सिंह, उमेश सिंह, सुदीप गीता,जमशेद फैजाबादी, आशाराम जागरथ सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार, गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। भाकपा के जिला सचिव अशोक तिवारी ने नारायण दास खत्री अध्ययन केंद्र के आरके खत्री समेत सभी लोगों का सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।


हम डाकू नहीं, इंकलाबी हैं
बताया कि ट्रेन से खजाना निकालते समय किसी स्वतंत्रता सेनानी ने यात्रियों से कहां हम किसी को लूटने नहीं आए हैं। इसलिए कोई यात्री बहार न निकले और मेरी तरफ न आए नहीं तो वह मारा जाएगा। लोहे के मजबूत संदूक पर हथौड़े पड़ने लगे लेकिन वह खुल नहीं रहा था। करीब 45 मिनट संघर्ष के बाद संदूक खुला और धन लेकर निकल गए। इस घटना को अंजाम देने के लिए दस लोगों शामिल थे। इन सभी इंकलाबी की उम्र लगभग 17 से 28 वर्ष के बीच थी।
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