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Ayodhya News: विश्व शांति के संकल्प के साथ शुरू हुआ अनुष्ठान
Tue, 24 Feb 2026 09:33 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 24 Feb 2026 09:33 PM IST
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24ayop 38-- जैन मंदिर रायगंज में अनुष्ठान के शुभारंभ अवसर पर की गई पूजा--संगठन
अयोध्या। रायगंज स्थित दिगंबर जैन मंदिर में विश्व शांति के संकल्प के साथ 21 दिवसीय विशेष अनुष्ठान का शुभारंभ गहन आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। यह आयोजन भगवान ऋषभदेव की जयंती (जन्म कल्याणक) के उपलक्ष्य में संयोजित किया गया है, जिसका मुख्य समारोह 13 मार्च को प्रस्तावित है।
मंदिर के केंद्रीय आगार में स्थापित 31 फीट ऊंची भगवान ऋषभदेव की भव्य प्रतिमा के समक्ष विशेष पूजन-विधान, अभिषेक, मंत्रोच्चार और मौन साधना के बीच विश्व शांति का संकल्प दोहराया गया। लगभग तीन घंटे तक चले अनुष्ठान में साधकों ने सामूहिक प्रार्थना के माध्यम से घृणा को प्रेम और हिंसा को करुणा में रूपांतरित करने की कामना की।
इस आध्यात्मिक अभियान की प्रेरक शक्ति रहीं जैन धर्म की वरिष्ठ साध्वी ज्ञानमती माता, जिन्होंने अपने 72 वर्ष विश्व शांति और साधना को समर्पित किए हैं। उनके साथ उनकी आध्यात्मिक उत्तराधिकारी आर्यिका चंदनामती माता भी उपस्थित रहीं। आयोजन को दिशा देने वाले पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने बीज वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि भगवान ऋषभदेव अहिंसा, करुणा और मानव एकता के महान प्रतीक हैं। उनके आदर्शों से प्रेरित यह 21 दिवसीय अनुष्ठान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वैश्विक समरसता का अभियान है।
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रवींद्रकीर्ति स्वामी ने कहा कि विश्व शांति केवल प्रार्थना से नहीं, बल्कि सक्रिय प्रयासों से संभव है। विभिन्न धर्मों, जातियों और समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित कर मानवीय एकता का संदेश प्रसारित किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर यह निवेदन संबंधित राष्ट्राध्यक्षों और संयुक्त राष्ट्र संघ तक भी पहुंचाया जाएगा।
दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जीवनप्रकाश ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अभियान आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक प्रभाव भी उत्पन्न करेगा। प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन ने बताया की इस अनुष्ठान में दिल्ली, हस्तिनापुर, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, जंबूदीप सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे।
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मंदिर के केंद्रीय आगार में स्थापित 31 फीट ऊंची भगवान ऋषभदेव की भव्य प्रतिमा के समक्ष विशेष पूजन-विधान, अभिषेक, मंत्रोच्चार और मौन साधना के बीच विश्व शांति का संकल्प दोहराया गया। लगभग तीन घंटे तक चले अनुष्ठान में साधकों ने सामूहिक प्रार्थना के माध्यम से घृणा को प्रेम और हिंसा को करुणा में रूपांतरित करने की कामना की।
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इस आध्यात्मिक अभियान की प्रेरक शक्ति रहीं जैन धर्म की वरिष्ठ साध्वी ज्ञानमती माता, जिन्होंने अपने 72 वर्ष विश्व शांति और साधना को समर्पित किए हैं। उनके साथ उनकी आध्यात्मिक उत्तराधिकारी आर्यिका चंदनामती माता भी उपस्थित रहीं। आयोजन को दिशा देने वाले पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने बीज वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि भगवान ऋषभदेव अहिंसा, करुणा और मानव एकता के महान प्रतीक हैं। उनके आदर्शों से प्रेरित यह 21 दिवसीय अनुष्ठान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वैश्विक समरसता का अभियान है।
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रवींद्रकीर्ति स्वामी ने कहा कि विश्व शांति केवल प्रार्थना से नहीं, बल्कि सक्रिय प्रयासों से संभव है। विभिन्न धर्मों, जातियों और समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित कर मानवीय एकता का संदेश प्रसारित किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर यह निवेदन संबंधित राष्ट्राध्यक्षों और संयुक्त राष्ट्र संघ तक भी पहुंचाया जाएगा।
दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जीवनप्रकाश ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अभियान आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक प्रभाव भी उत्पन्न करेगा। प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन ने बताया की इस अनुष्ठान में दिल्ली, हस्तिनापुर, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, जंबूदीप सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे।