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Ayodhya News: चोरी से पहले ही बेनकाब हो चुकी थी राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था

Wed, 24 Jun 2026 12:09 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Wed, 24 Jun 2026 12:09 AM IST
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The Ram Mandir's security arrangements had already been exposed before the theft.
अयोध्या। राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले से पहले ही प्रवेश द्वारों की सुरक्षा व्यवस्था बेनकाब हो चुकी थी। एक मामले में पुलिस की पुरानी जांच रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार यहां सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में पहले से खामियां थीं, लेकिन उन्हें दूर नहीं किया गया और न ही पुलिस जांच उन कमियों की तह तक पहुंच सकी।
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शहर के शिवपुरम कॉलोनी निवासी आशीष 27 अप्रैल को राम मंदिर में दर्शन के लिए अपने साथियों के साथ गए थे। उनका वीवीआईपी दर्शन का पास बना था। रंगमहल बैरियर से एंट्री करके वह अंदर जा चुके थे। इस बीच वह अपना वाहन खड़ा करने के लिए चले गए और अन्य साथियों के साथ अंदर नहीं जा सके। वह दोबारा आए तो ड्यूटी पर तैनात पंकज कुमार नामक सुरक्षाकर्मी ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। आग्रह करने पर उनसे अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने इसकी शिकायत की थी।
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मामले की जांच थाना रामजन्म भूमि में तैनात सुग्रीव यादव ने की, जिन्होंने मई में अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए, वे स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाले हैं। इसके अनुसार पुलिस घटना के समय ड्यूटी पर तैनात संबंधित सुरक्षाकर्मी की पहचान नहीं कर सकी। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया कि उस पॉइंट पर आखिर किसकी ड्यूटी लगी थी। संबंधित पंकज कुमार नामक सुरक्षाकर्मी के बारे में भी कोई विवरण नहीं उपलब्ध हो सका। फुटेज में भीड़ अधिक होने का हवाला दिया गया और किसी व्यक्ति की पहचान करने में असमर्थता जताई गई। यानी जिस निगरानी तंत्र को सुरक्षा का सबसे मजबूत आधार माना जाता है, वह शिकायत की जांच में कोई ठोस मदद नहीं कर सका। (संवाद)
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कथित चढ़ावा चोरी के बाद गंभीर हो गए सवाल
अब चढ़ावा चोरी की घटना के बाद वही सवाल और गंभीर हो गए हैं। आखिर जिस सुरक्षा व्यवस्था में पहले ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की पहचान तक सुनिश्चित नहीं हो सकी, क्या उसी ढिलाई का फायदा बाद में कथित चढ़ावा चोरों ने उठाया। क्या पहले की शिकायतों से मिले संकेतों को गंभीरता से लिया गया होता तो आज चोरी जैसी घटना टाली जा सकती थी। सवाल यह भी है कि ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की जानकारी पुलिस को क्यों नहीं मिल सकी। क्या ड्यूटी रोस्टर और तैनाती का कोई प्रामाणिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं रहता था? जब सीसीटीवी फुटेज से भी पहचान नहीं हो सकी तो निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी। हालांकि इन सभी सवालों के जवाब के लिए कोई भी पुलिस अधिकारी कुछ बोलने से इन्कार कर रहा है।
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