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Ayodhya News: आगे नहीं बढ़ सकी वैकल्पिक मंदिर को धरोहर घोषित करने की प्रक्रिया
Tue, 13 Jan 2026 08:26 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 13 Jan 2026 08:26 PM IST
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10-टेंट के बाद राम जन्मभूमि परिसर के इसी वैकल्पिक गर्भगृह में विराजमान रहे रामलला- सोश्ल मीडिय
अयोध्या। राम जन्मभूमि परिसर में जिस वैकल्पिक मंदिर में रामलला करीब चार साल तक विराजमान रहे उसे धरोहर घोषित करने की प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकी है। राम मंदिर ट्रस्ट की योजना के तहत पिछले दिनों पुरातत्व विभाग (पुरातत्व/एएसआई) के अधिकारियों ने मंदिर परिसर का स्थलीय निरीक्षण किया था, लेकिन तकनीकी बिंदुओं पर सहमति न बनने के कारण मामला अटक गया है।
ट्रस्ट के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राम मंदिर निर्माण समिति ने पुरातत्व विभाग को पत्र लिखकर अपनी योजना साझा की थी। इसके तहत पिछले दिनों पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने राम जन्मभूमि परिसर का निरीक्षण किया था। अस्थायी मंदिर, खोदाई में मिले अवशेषों को किस प्रकार संरक्षित किया जाए इसका सुझाव दिया था। हालांकि वैकल्पिक गर्भगृह को धरोहर के रूप में संरक्षित करने की योजना फिलहाल अभी तक आगे नहीं बढ़ सकी है। पुरातत्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि धरोहर घोषित करने के लिए जिस प्रक्रिया का पालन किया जाना होता है, उसमें मंदिर की ऐतिहासिक प्रामाणिकता, निर्माण काल, स्थापत्य शैली और संरचनात्मक अखंडता जैसे तकनीकी मानकों का आकलन अनिवार्य है। उसमें वैकल्पिक गर्भगृह मानकों के अनुरूप नहीं है।
परिसर में पहले से अन्य कई प्राचीन धरोहर हैं जिसमें कुबेर टीला, अंगद टीला, नल और नील टीला शामिल है, जिनका ट्रस्ट ने सुंदरीकरण कराया है। वैकल्पिक गर्भगृह 25 मार्च 2020 से 22 जनवरी 2024 तक ही अस्तित्व में रहा। ऐसे में इसे प्राचीन नहीं कहा जा सकता। खोदाई में मिले अवशेष, जिस टेंट में रामलला 1992 से 2020 तक रहे उसके स्ट्रक्चर को संरक्षित करने का सुझाव दिया गया है।
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ट्रस्ट के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राम मंदिर निर्माण समिति ने पुरातत्व विभाग को पत्र लिखकर अपनी योजना साझा की थी। इसके तहत पिछले दिनों पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने राम जन्मभूमि परिसर का निरीक्षण किया था। अस्थायी मंदिर, खोदाई में मिले अवशेषों को किस प्रकार संरक्षित किया जाए इसका सुझाव दिया था। हालांकि वैकल्पिक गर्भगृह को धरोहर के रूप में संरक्षित करने की योजना फिलहाल अभी तक आगे नहीं बढ़ सकी है। पुरातत्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि धरोहर घोषित करने के लिए जिस प्रक्रिया का पालन किया जाना होता है, उसमें मंदिर की ऐतिहासिक प्रामाणिकता, निर्माण काल, स्थापत्य शैली और संरचनात्मक अखंडता जैसे तकनीकी मानकों का आकलन अनिवार्य है। उसमें वैकल्पिक गर्भगृह मानकों के अनुरूप नहीं है।
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परिसर में पहले से अन्य कई प्राचीन धरोहर हैं जिसमें कुबेर टीला, अंगद टीला, नल और नील टीला शामिल है, जिनका ट्रस्ट ने सुंदरीकरण कराया है। वैकल्पिक गर्भगृह 25 मार्च 2020 से 22 जनवरी 2024 तक ही अस्तित्व में रहा। ऐसे में इसे प्राचीन नहीं कहा जा सकता। खोदाई में मिले अवशेष, जिस टेंट में रामलला 1992 से 2020 तक रहे उसके स्ट्रक्चर को संरक्षित करने का सुझाव दिया गया है।
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