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Ayodhya News: होर्डिंग पर चमक रहे विज्ञापन, एजेंसी की पहचान गायब
Fri, 16 Oct 2026 11:37 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 16 Oct 2026 11:37 PM IST
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देवकाली हाईवे पर लगा होर्डिंग।
अयोध्या। शहर में होर्डिंग का जाल फैला है, लेकिन इन्हें लगाने वाली एजेंसियों की पहचान दर्ज नहीं है। साकेतपुरी कॉलोनी चौराहे से लेकर देवकाली बाईपास के पास हाईवे किनारे तक लगी दर्जनों होर्डिंग पर एजेंसी का नाम और संपर्क विवरण नहीं है। चूड़ा मंडी और टेढ़ी बाजार चौराहे के पास भी यही स्थिति है। हैरानी की बात यह है कि नियमों की अनदेखी केवल अवैध होर्डिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम की ओर से अधिकृत होर्डिंग पर भी एजेंसियों की पहचान दर्ज नहीं है।
नगर निगम के रिकॉर्ड में विज्ञापन के लिए करीब 160 स्थल अधिकृत हैं, जबकि शहर में 700 से अधिक होर्डिंग पर एजेंसी का नाम, कोड और मोबाइल नंबर दर्ज नहीं है। नगर निगम में 24 विज्ञापन एजेंसियां पंजीकृत हैं। इनमें 22 सक्रिय हैं। नियमों के मुताबिक, होर्डिंग पर एजेंसी का नाम, कोड और मोबाइल नंबर दर्ज होना चाहिए, ताकि विज्ञापन लगाने वाली एजेंसी और उसके संचालक की पहचान हो सके। इसके बावजूद अधिकृत होर्डिंग पर इन विवरणों का अभाव निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
हादसा होने पर एजेंसी की पहचान होगी मुश्किल
होर्डिंग पर विज्ञापन तो नजर आते हैं, लेकिन उन्हें लगाने और संचालित करने वाली एजेंसी की पहचान नहीं मिलती। ऐसे में ढांचे का मालिक कौन है और विज्ञापन किसने लगाया, इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। किसी हादसे की स्थिति में जिम्मेदार एजेंसी की पहचान करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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शहर में अधिकृत स्थलों के अलावा अन्य जगहों पर भी होर्डिंग के ढांचे दिखाई देते हैं। सवाल है कि इन्हें लगाने की अनुमति किसने दी और रातोंरात खड़े होने वाले ढांचों की निगरानी कैसे होती है। जब अधिकृत होर्डिंग पर ही जरूरी विवरण दर्ज नहीं हैं, तो अवैध होर्डिंग लगाने वालों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई की व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
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नगर निगम के रिकॉर्ड में विज्ञापन के लिए करीब 160 स्थल अधिकृत हैं, जबकि शहर में 700 से अधिक होर्डिंग पर एजेंसी का नाम, कोड और मोबाइल नंबर दर्ज नहीं है। नगर निगम में 24 विज्ञापन एजेंसियां पंजीकृत हैं। इनमें 22 सक्रिय हैं। नियमों के मुताबिक, होर्डिंग पर एजेंसी का नाम, कोड और मोबाइल नंबर दर्ज होना चाहिए, ताकि विज्ञापन लगाने वाली एजेंसी और उसके संचालक की पहचान हो सके। इसके बावजूद अधिकृत होर्डिंग पर इन विवरणों का अभाव निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
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हादसा होने पर एजेंसी की पहचान होगी मुश्किल
होर्डिंग पर विज्ञापन तो नजर आते हैं, लेकिन उन्हें लगाने और संचालित करने वाली एजेंसी की पहचान नहीं मिलती। ऐसे में ढांचे का मालिक कौन है और विज्ञापन किसने लगाया, इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। किसी हादसे की स्थिति में जिम्मेदार एजेंसी की पहचान करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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शहर में अधिकृत स्थलों के अलावा अन्य जगहों पर भी होर्डिंग के ढांचे दिखाई देते हैं। सवाल है कि इन्हें लगाने की अनुमति किसने दी और रातोंरात खड़े होने वाले ढांचों की निगरानी कैसे होती है। जब अधिकृत होर्डिंग पर ही जरूरी विवरण दर्ज नहीं हैं, तो अवैध होर्डिंग लगाने वालों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई की व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।