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Ayodhya News: सीताराम समेत आठ देव विग्रहों को जीवंत करने की प्रक्रिया शुरू
Tue, 03 Jun 2025 10:28 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 03 Jun 2025 10:28 PM IST
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अयोध्या। सदियों की प्रतीक्षा, अटल आस्था और अगाध श्रद्धा के साथ साकार हो रहा है वह दृश्य, जब रामलला का दरबार अब केवल पत्थर नहीं, बल्कि जीवंत दिव्यता का प्रतिरूप बनने जा रहा है। राम मंदिर परिसर में राम दरबार समेत आठ देव विग्रहों को जीवंत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पांच जून को दूसरे प्राण प्रतिष्ठा समारोह का मुख्य अनुष्ठान होगा।
प्राण प्रतिष्ठा के तीन दिवसीय समारोह के पहले दिन यज्ञ मंडप के बाहर सुबह साढ़े छह बजे से दो घंटे पंचांग पूजन हुआ। नौ बजे यज्ञशाला प्रवेश हुआ। इसके बाद तीन घंटे तक दिगरक्षण, वास्तु पूजा, मंडप पूजन, प्रधान पूजन, अग्नि स्थापन व ग्रह स्थापन किया गया। इसके बाद दोपहर दो बजे से योगिनी पूजन, क्षेत्रपाल पूजन, ग्रहयाज्ञ, आह्वानित देवताओं का हवन, कर्मकुटी व जलाधिवास का अनुष्ठान हुआ। यज्ञशाला में नौ यज्ञ कुंड हैं और जाप में आठ व विभिन्न पाठों के लिए आठ ऋत्विक लगाए गए हैं। सभी अनुष्ठान काशी के आचार्य जय प्रकाश त्रिपाठी, अयोध्या के आचार्य पंडित प्रवीण शर्मा व आचार्य इंद्रदेव मिश्र के नेतृत्व में हो रहा है।
राजा राम की प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के पहले दिन 12 घंटे तक पूजन चला। सुबह मंदिर परिसर में देव विग्रहों की पालकी यात्रा भी निकाली गई। मुख्य यजमान राम मंदिर के ट्रस्टी डाॅण्अ निल मिश्र समेत अन्य यजमानों ने पूजन किया। राम दरबार के विग्रह को अभी ढक कर रखा गया है। यह आवरण पांच जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हटाएंगे। मूर्तियों की आंख पर बांधी पट्टी भी नेत्रोमिलन की प्रक्रिया पूरी कर मुख्यमंत्री खोलेंगे। मंगलवार को ढकी मूर्ति का ही पूजन किया गया।
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राम दरबार के विग्रह, गर्भगृह स्थल और यज्ञ मंडप का पवित्र नदियों के जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद विधि-विधान से गर्भगृह में श्रीरामयंत्र की स्थापना कर सभी अनुष्ठान निर्विघ्न रूप से संपन्न हों, इसकी कामना की गई। अगले चरण में यज्ञ मंडप में ओम भूर्भुवः स्वः भो वरुण, इहागच्छ, इह तिष्ठ, स्थापयामि, पूजयामि, मम पूजां गृहाण... आदि मंत्रोच्चारों के साथ कलश की स्थापना कराई गई। नौ वेदियों पर नौ कलश स्थापित किए गए। अनुष्ठान के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती, युगपुरुष परमानंद, महंत वैदेही बल्लभ शरण, जगद्गुरु श्रीधराचार्य भी मौजूद रहे।
इसलिए होता है जलाधिवास
पूजन के क्रम में ही राम दरबार के गर्भगृह में सीता राम समेत अन्य मूर्तियों का जलाधिवास हुआ। अन्य सात मंदिरों की मूर्ति के जलाधिवास की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिवास वह प्रक्रिया है, जिसमें मूर्ति को विभिन्न सामग्रियों में कुछ समय तक के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि मूर्ति पर शिल्पकार के औजारों से आई चोट इससे ठीक हो जाती है। तमाम दोष खत्म हो जाते हैं। इसी क्रम में जलाधिवास के तहत विग्रह को शास्त्रीय विधि से जल में रखा गया।
प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान के लिए उत्सव मूर्ति भी बनाई गई है। राम दरबार समेत सभी आठ मंदिरों की अष्टधातु की उत्सव मूर्ति राम मंदिर ट्रस्ट ने तैयार कराई है। इन्हीं मूर्तियां के साथ पूजन की सभी क्रिया संपन्न कराई जा रही है। अचल मूर्तियों को उनके सिंहासन पर स्थापित कर दिया गया है इसलिए उनको हिलाया नहीं जा सकता है।
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प्राण प्रतिष्ठा के तीन दिवसीय समारोह के पहले दिन यज्ञ मंडप के बाहर सुबह साढ़े छह बजे से दो घंटे पंचांग पूजन हुआ। नौ बजे यज्ञशाला प्रवेश हुआ। इसके बाद तीन घंटे तक दिगरक्षण, वास्तु पूजा, मंडप पूजन, प्रधान पूजन, अग्नि स्थापन व ग्रह स्थापन किया गया। इसके बाद दोपहर दो बजे से योगिनी पूजन, क्षेत्रपाल पूजन, ग्रहयाज्ञ, आह्वानित देवताओं का हवन, कर्मकुटी व जलाधिवास का अनुष्ठान हुआ। यज्ञशाला में नौ यज्ञ कुंड हैं और जाप में आठ व विभिन्न पाठों के लिए आठ ऋत्विक लगाए गए हैं। सभी अनुष्ठान काशी के आचार्य जय प्रकाश त्रिपाठी, अयोध्या के आचार्य पंडित प्रवीण शर्मा व आचार्य इंद्रदेव मिश्र के नेतृत्व में हो रहा है।
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राजा राम की प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के पहले दिन 12 घंटे तक पूजन चला। सुबह मंदिर परिसर में देव विग्रहों की पालकी यात्रा भी निकाली गई। मुख्य यजमान राम मंदिर के ट्रस्टी डाॅण्अ निल मिश्र समेत अन्य यजमानों ने पूजन किया। राम दरबार के विग्रह को अभी ढक कर रखा गया है। यह आवरण पांच जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हटाएंगे। मूर्तियों की आंख पर बांधी पट्टी भी नेत्रोमिलन की प्रक्रिया पूरी कर मुख्यमंत्री खोलेंगे। मंगलवार को ढकी मूर्ति का ही पूजन किया गया।
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राम दरबार के विग्रह, गर्भगृह स्थल और यज्ञ मंडप का पवित्र नदियों के जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद विधि-विधान से गर्भगृह में श्रीरामयंत्र की स्थापना कर सभी अनुष्ठान निर्विघ्न रूप से संपन्न हों, इसकी कामना की गई। अगले चरण में यज्ञ मंडप में ओम भूर्भुवः स्वः भो वरुण, इहागच्छ, इह तिष्ठ, स्थापयामि, पूजयामि, मम पूजां गृहाण... आदि मंत्रोच्चारों के साथ कलश की स्थापना कराई गई। नौ वेदियों पर नौ कलश स्थापित किए गए। अनुष्ठान के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती, युगपुरुष परमानंद, महंत वैदेही बल्लभ शरण, जगद्गुरु श्रीधराचार्य भी मौजूद रहे।
इसलिए होता है जलाधिवास
पूजन के क्रम में ही राम दरबार के गर्भगृह में सीता राम समेत अन्य मूर्तियों का जलाधिवास हुआ। अन्य सात मंदिरों की मूर्ति के जलाधिवास की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिवास वह प्रक्रिया है, जिसमें मूर्ति को विभिन्न सामग्रियों में कुछ समय तक के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि मूर्ति पर शिल्पकार के औजारों से आई चोट इससे ठीक हो जाती है। तमाम दोष खत्म हो जाते हैं। इसी क्रम में जलाधिवास के तहत विग्रह को शास्त्रीय विधि से जल में रखा गया।
प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान के लिए उत्सव मूर्ति भी बनाई गई है। राम दरबार समेत सभी आठ मंदिरों की अष्टधातु की उत्सव मूर्ति राम मंदिर ट्रस्ट ने तैयार कराई है। इन्हीं मूर्तियां के साथ पूजन की सभी क्रिया संपन्न कराई जा रही है। अचल मूर्तियों को उनके सिंहासन पर स्थापित कर दिया गया है इसलिए उनको हिलाया नहीं जा सकता है।