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Ayodhya News: इच्छाओं और विकारों पर नियंत्रण पाने की साधना है उत्तम तप धर्म

Mon, 21 Sep 2026 11:48 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Mon, 21 Sep 2026 11:48 PM IST
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The practice of gaining control over desires and mental afflictions is the supreme virtue of penance
53- जैन मंदिर में अनुष्ठान में मौजूद सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति कैलाश चंद्र व स्वामी रवींद्रकीर्ति
अयोध्या। जैन मंदिर परिसर में चल रहे दश लक्षण महापर्व के सातवें दिन मंगलवार को धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रही। सातवें दिन उत्तम तप धर्म की आराधना की गई। इस अवसर पर गणिनी प्रमुख माता ज्ञानमती ने प्रवचन करते हुए तप धर्म की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि तप केवल शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि इच्छाओं और विकारों पर नियंत्रण पाने की साधना है। मनुष्य जीवन में संयम, आत्मनियंत्रण और त्याग को अपनाकर आत्मशुद्धि की ओर बढ़ सकता है।
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उन्होंने कहा कि तप के माध्यम से व्यक्ति अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचानता है और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ता है। सातवें दिन मंदिर परिसर में विभिन्न विधान और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान ऋषभदेव का अभिषेक और पूजन किया। रवींद्रकीर्ति स्वामी के सानिध्य में हुए अनुष्ठानों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
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मुंबई हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति कैलाश चंद्र चांदीवाल भी पत्नी के साथ अनुष्ठान में शामिल हुए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर महापर्व में सहभागिता की। समस्त अनुष्ठान प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन के निर्देशन और डॉक्टर जीवन प्रकाश जैन के संचालन में हुए।
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संयम और सात्विकता लाने का आह्वान

जैन मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने कहा कि बाहरी सुख-सुविधाओं की अपेक्षा मन पर नियंत्रण और इंद्रियों पर संयम अधिक महत्वपूर्ण है। तप धर्म मनुष्य को भोग से योग और आसक्ति से आत्मानुशासन की ओर ले जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से महापर्व के दौरान धार्मिक क्रियाओं के साथ अपने आचरण में भी संयम और सात्विकता लाने का आह्वान किया।

53- जैन मंदिर में अनुष्ठान में मौजूद सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति कैलाश चंद्र व स्वामी रवींद्रकीर्ति

53- जैन मंदिर में अनुष्ठान में मौजूद सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति कैलाश चंद्र व स्वामी रवींद्रकीर्ति

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