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Ayodhya News: राम की नगरी में शिव की महिमा़...शिवालयों की रोचक दास्तान

Sat, 14 Feb 2026 09:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Sat, 14 Feb 2026 09:46 PM IST
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The glory of Shiva in the city of Ram...the interesting story of Shiva temples
07- कुबेर टीला पर स्थापित ​शिवलिंग-ट्रस्ट
अयोध्या। मर्यादा पुरुपोत्तम प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या केवल रामभक्ति की ही नहीं, बल्कि शिव आराधना की भी अनुपम भूमि है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर जब पूरी रामनगरी हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठती है, तब यहां के प्राचीन शिवालय नागेश्वरनाथ, क्षीरेश्वरनाथ, कुबेरेश्वर महादेव मंदिर...अपनी-अपनी रोचक कथाओं, लोक मान्यताओं और ऐतिहासिक, पौराणिक प्रसंगों के साथ श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। कहीं पौराणिक मान्यताओं की गूंज है तो कहीं लोक परंपराओं का जीवंत स्वरूप, इन शिवालयों की कहानियां आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती हैं। महाशिवरात्रि पर जानें इन मंदिरों का इतिहास...।
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त्रेतायुगीन है कुबेरेश्वर महादेव मंदिर
रामजन्मभूमि परिसर स्थित कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा-अर्चना होगी। अयोध्या का इतिहास विवेचित करने वाले ग्रंथ रुद्रयामल के अनुसार युगों पूर्व यहां धन के देवता कुबेर का आगमन हुआ था। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि के निकट ही ऊंचे टीले पर शिवलिंग की स्थापना की थी। कालांतर में यहां मां पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी, कुबेर सहित कुल नी देवी-देवताओं को प्रतिमा स्थापित की गई और अद्धालुओं के बीच यह स्थल ''''नौ रत्न'''' के नाम से पूजित-प्रतिष्ठित हुआ। सन 1902 में एडवर्ड अयोध्या तीर्थ विवेचनी सभा ने 84 कोस की परिधि में रामनगरी के जिन 148 पुरास्थलों को चिह्नित किया, उनमें से एक कुबेर टीला भी रहा।
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कुश ने की थी नागेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना

राम की पैड़ी परिसर स्थित नागेश्वरनाथ मंदिर का निर्माण भगवान राम के छोटे पुत्र कुश ने करवाया था। पौराणिक मान्यता है कि एक बार भगवान राम के पुत्र कुश सरयू में स्नान कर रहे थे। उस वक्त उनकी बांह से कड़ा निकलकर सरयू में गिर गया। वह कड़ा सरयू में ही रहने वाले नागराज कुमुद को मिल गया जिसे उन्होंने अपनी बेटी को दे दिया। भगवान भोलेनाथ उस दौरान प्रकट हुए और कुमुद की बेटी का विवाह कुश से करवा दिया। कुश ने भगवान शिव से आग्रह किया कि आप अयोध्या में ही रक जाएं और यहीं वास करें। भगवान शिव राम के पुत्र की बात को टाल न सके और वहीं रुक गए। बाद में जहां शिव प्रकट हुए थे, वहीं कुश ने नागेश्वरनाथ का मंदिर स्थापित करवा दिया।
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108 ज्योतिर्लिंगों में से एक है क्षीरेश्वरनाथ मंदिर

108 ज्योतिर्लिंगों में से एक क्षीरेश्वरनाथ मंदिर का पौराणिक, धार्मिक और महत्व है। मान्यता है कि राजा दशरथ ने पुत्र रत्न प्राप्त
करने के लिए क्षीरेश्वरनाथ मंदिर में भगवान शिव का दूध से अभिषेक किया था। अभिषेक के दौरान दूध की धारा बह निकली जो आगे चलकर सागर में बदल गई। तभी से शिवलिंग को क्षीरेश्वरनाथ के नाम से जाना जाता है। क्षीरेश्वरनाथ मंदिर में अभिषेक करने से संतान की प्राप्ति होती है। साथ ही जिनकी आर्थिक स्थिति दयनीय होती है, जिन पर कर्ज होता है, वे क्षीरेश्वर नाथ मंदिर में भगवान शिव का दूध से अभिषेक करते हैं।


पंचमुखी महादेव में स्थापित है पांच मुख वाला शिवलिंग

गुप्तारघाट स्थित पंचमुखी महादेव मंदिर बहुत ही प्राचीन है। यह लाल बलुआ पत्थर से बना हुआ है। इस मंदिर में मुखलिंग मौजूद है। आकृति वाले शिवलिंग की मुखलिंग के नाम से जाना जाता है। मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां महादेव के दर्शन मात्र में ही भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अनादि पंचमुखी महादेव मंदिर में भगवान शिव के तीन स्वरूपों की उपासना की जाती है। पंचमुखी महादेव मंदिर के शिवलिंग में पांच मुख है जो पंचास्य उपासना के पांच नामों को अभिव्यक्त करते हैं।

07- कुबेर टीला पर स्थापित शिवलिंग-ट्रस्ट

07- कुबेर टीला पर स्थापित शिवलिंग-ट्रस्ट

07- कुबेर टीला पर स्थापित शिवलिंग-ट्रस्ट

07- कुबेर टीला पर स्थापित शिवलिंग-ट्रस्ट

07- कुबेर टीला पर स्थापित शिवलिंग-ट्रस्ट

07- कुबेर टीला पर स्थापित शिवलिंग-ट्रस्ट

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