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Ayodhya News: उद्घाटन की चमक में दब गया महिलाओं की आत्मनिर्भरता का सपना
Wed, 09 Sep 2026 12:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 09 Sep 2026 12:01 AM IST
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पांच साल से खड़ा सीआईसी सेंटर का भवन, परिसर में पसरी अव्यवस्था और खराब रास्ता व गुड़ बनाने के ल
अयोध्या। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय उत्पादों को बाजार देने के लिए बनाया गया कॉमन इनक्यूबेशन सेंटर (सीआईसी) खुद ही बदहाली का शिकार है। वर्ष 2021 में भवन तैयार होने के बाद भी करीब पांच साल तक सेंटर शुरू नहीं हो सका। इसी वर्ष एक फरवरी को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसका वर्चुअल उद्घाटन किया। मशीनों का ट्रायल हुआ, लेकिन इसके बाद सेंटर की गतिविधियां आगे नहीं बढ़ सकीं।
सिविल लाइंस में जिला कृषि कार्यालय के पास बने सेंटर का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण देकर उत्पादन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ना था। यहां हल्दी, चिप्स, कुरकुरे, नमकीन समेत स्थानीय उत्पाद तैयार किए जाने थे। लेकिन महिलाओं के लिए बनाए गए इस केंद्र का मूल काम शुरू होने से पहले ही यहां दूसरे प्रोजेक्ट की गतिविधियां शुरू हो गईं। सेंटर में अस्मिता प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। इसके तहत शहर में करीब 100 फूड स्टॉल लगाए जाने हैं। महिलाओं को स्टॉल उपलब्ध कराने के नाम पर हजारों रुपये ऐंठे जा रहे हैं। संवाद
100 लाख खर्च, पांच साल बाद भी अधूरा
सीआईसी का निर्माण कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड ने कराया। निर्माण पर करीब 100 लाख रुपये खर्च हुए। वर्ष 2021 में भवन तैयार हो गया था लेकिन मशीनरी और अन्य व्यवस्थाएं पूरी करने में वर्षों लग गए। फरवरी में उद्घाटन के समय भी सेंटर पूरी तरह तैयार नहीं था। इसके बावजूद उद्घाटन हुआ और उपलब्ध मशीनों का ट्रायल करा दिया गया। इसके बाद नियमित उत्पादन और प्रशिक्षण जैसी मूल गतिविधियां शुरू नहीं हो सकीं।
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गुड़ की लाइन कागज पर, मशीनों में लग रहा जंग
एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत गुड़ से जुड़े उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए लाइन लगाई जानी थी, लेकिन गुड़ बनाने की लाइन अब तक नहीं लग सकी। हल्दी, चिप्स, कुरकुरे और नमकीन की प्रोसेसिंग व पैकेजिंग के लिए लगी मशीनें भी नियमित इस्तेमाल के अभाव में बंद हैं।
छह जिलों का काम एक ही कंपनी को, चयन पर सवाल
सक्सेस एरो सुपरफूइस प्राइवेट लिमिटेड को छह जिलों के सीआईसी सेंटरों से संबंधित काम दिया गया है। इनमें बस्ती, वाराणसी, कौशांबी, अयोध्या, लखनऊ और कानपुर देहात शामिल हैं। लखनऊ के सेंटर का उद्घाटन होना है। एक ही निजी कंपनी को छह जिलों में काम मिलने से चयन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
खाद्य प्रसंस्करण केंद्र में पानी, दुर्गंध से हाल बेहाल
सीआईसी सेंटर तक पहुंचने का रास्ता बदहाल है। अंदर खाद्य प्रसंस्करण वाले हिस्से में भी सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। हल्दी प्रोसेसिंग के पास बनी नाली का पानी सही से बाहर नहीं निकल पा रहा है। पानी जमा होने से दुर्गंध उठ रही है। जहां खाद्य उत्पाद तैयार किए जाने हैं, वहां जलनिकासी और स्वच्छता की यह स्थिति सेंटर की बुनियादी तैयारियों पर ही सवाल खड़े करती है।
वर्जन
सीआईसी सेंटर की देखरेख कर रहीं ऋचा बिष्ट ने बताया कि गुड़ की लाइन के लिए अभी शेड बनाया जाना है। उन्होंने कहा कि बिजली का लोड कम होने के कारण अन्य मशीनें नहीं चल पा रही हैं। बिजली की व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी।
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सिविल लाइंस में जिला कृषि कार्यालय के पास बने सेंटर का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण देकर उत्पादन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ना था। यहां हल्दी, चिप्स, कुरकुरे, नमकीन समेत स्थानीय उत्पाद तैयार किए जाने थे। लेकिन महिलाओं के लिए बनाए गए इस केंद्र का मूल काम शुरू होने से पहले ही यहां दूसरे प्रोजेक्ट की गतिविधियां शुरू हो गईं। सेंटर में अस्मिता प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। इसके तहत शहर में करीब 100 फूड स्टॉल लगाए जाने हैं। महिलाओं को स्टॉल उपलब्ध कराने के नाम पर हजारों रुपये ऐंठे जा रहे हैं। संवाद
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100 लाख खर्च, पांच साल बाद भी अधूरा
सीआईसी का निर्माण कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड ने कराया। निर्माण पर करीब 100 लाख रुपये खर्च हुए। वर्ष 2021 में भवन तैयार हो गया था लेकिन मशीनरी और अन्य व्यवस्थाएं पूरी करने में वर्षों लग गए। फरवरी में उद्घाटन के समय भी सेंटर पूरी तरह तैयार नहीं था। इसके बावजूद उद्घाटन हुआ और उपलब्ध मशीनों का ट्रायल करा दिया गया। इसके बाद नियमित उत्पादन और प्रशिक्षण जैसी मूल गतिविधियां शुरू नहीं हो सकीं।
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गुड़ की लाइन कागज पर, मशीनों में लग रहा जंग
एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत गुड़ से जुड़े उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए लाइन लगाई जानी थी, लेकिन गुड़ बनाने की लाइन अब तक नहीं लग सकी। हल्दी, चिप्स, कुरकुरे और नमकीन की प्रोसेसिंग व पैकेजिंग के लिए लगी मशीनें भी नियमित इस्तेमाल के अभाव में बंद हैं।
छह जिलों का काम एक ही कंपनी को, चयन पर सवाल
सक्सेस एरो सुपरफूइस प्राइवेट लिमिटेड को छह जिलों के सीआईसी सेंटरों से संबंधित काम दिया गया है। इनमें बस्ती, वाराणसी, कौशांबी, अयोध्या, लखनऊ और कानपुर देहात शामिल हैं। लखनऊ के सेंटर का उद्घाटन होना है। एक ही निजी कंपनी को छह जिलों में काम मिलने से चयन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
खाद्य प्रसंस्करण केंद्र में पानी, दुर्गंध से हाल बेहाल
सीआईसी सेंटर तक पहुंचने का रास्ता बदहाल है। अंदर खाद्य प्रसंस्करण वाले हिस्से में भी सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। हल्दी प्रोसेसिंग के पास बनी नाली का पानी सही से बाहर नहीं निकल पा रहा है। पानी जमा होने से दुर्गंध उठ रही है। जहां खाद्य उत्पाद तैयार किए जाने हैं, वहां जलनिकासी और स्वच्छता की यह स्थिति सेंटर की बुनियादी तैयारियों पर ही सवाल खड़े करती है।
वर्जन
सीआईसी सेंटर की देखरेख कर रहीं ऋचा बिष्ट ने बताया कि गुड़ की लाइन के लिए अभी शेड बनाया जाना है। उन्होंने कहा कि बिजली का लोड कम होने के कारण अन्य मशीनें नहीं चल पा रही हैं। बिजली की व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी।

पांच साल से खड़ा सीआईसी सेंटर का भवन, परिसर में पसरी अव्यवस्था और खराब रास्ता व गुड़ बनाने के ल