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Ayodhya News: सावन की फुहारों संग गूंजे 'बम भोले' के जयकारे
Mon, 28 Jul 2025 08:43 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 28 Jul 2025 08:43 PM IST
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अयोध्या। सावन का तीसरा सोमवार... और उस पर मानसून की फुहारें... रामनगरी इस संयोग में जैसे शिवभक्ति के रंग में भीगती नजर आई। अलसुबह से ही शिवालयों की सीढ़ियां श्रद्धालुओं के कदमों से गूंजने लगीं। हर गली, हर मोड़, हर मंदिर के द्वार पर एक ही स्वर गूंज रहा था बोल बम... हर हर महादेव...। शिवालयों में पूरे दिन शिवभक्तों की कतार लग रही। व्यापक सुरक्षा के भी इंतजाम रहे।
सुबह 11 बजे से रिमझिम फुहार पड़ने लगी। यह कोई साधारण दिन नहीं, बल्कि वह अलौकिक क्षण था जब श्रद्धा बादलों सी उमड़ पड़ी और भक्ति सरयू सी बहने लगी। रिमझिम फुहारों ने भक्तों को रोका नहीं, बल्कि भक्ति में और भी भिगो दिया। खुले आकाश के नीचे खड़े श्रद्धालु मानो कह रहे हों, जैसे शिव पर जल चढ़ता है, वैसे ही हम भी आज इस भक्ति की वर्षा में भीगकर पवित्र हो गए।
प्राचीन नागेश्वरनाथ से लेकर क्षीरेश्वरनाथ, हनुमान गढ़ी, रामलला व कनक भवन में भक्तों की लहरें बिना थके, बिना रुके आगे बढ़ती रहीं। कोई सरयू जल लेकर आया, कोई बेलपत्र और धतूरा अर्पण करने, तो कोई बस एक बार शिव के दर्शन से मन की शांति पाने के लिए पहुंचा। पंडितों के मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच हो रहे रुद्राभिषेक, पंचामृत स्नान और दुग्धाभिषेक ने वातावरण को और भी पावन बना दिया। नागेश्वरनाथ में भीड़ का दबाव सबसे अधिक रहा। श्रद्धालुओं को रोक-रोककर जत्थों में दर्शन कराया गया। प्रवेश व निकासी का मार्ग अलग-अलग किया गया था।
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सोमवार दोपहर करीब एक घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश के चलते रामनगरी में जगह-जगह जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। सबसे ज्यादा दिक्कत अयोध्या दर्शन-पूजन करने पहुंचे श्रद्धालुओं को हुई। राम मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने रामपथ पर हुए जलभराव से श्रद्धालुओं को गुजरना पड़ा। हालांकि श्रद्धालुओं की आस्था नहीं डिगी। बस्ती से आए आलोक गुप्ता बोले कि सावन की बारिश और तीसरे सोमवार का योग, यह दुर्लभ अवसर था। मन और आत्मा दोनों का शुद्धिकरण हो गया।
सावन झूला मेले के दूसरे दिन रामलला के दरबार में भी सावन उमड़ आया। सुबह 6:30 बजे जैसे ही राम मंदिर के पट खुले प्रवेश द्वार भक्तों से भर गया। शिव की भक्ति करने अयोध्या पहुंचे श्रद्धालु रामलला के चरणों में श्रद्धा अर्पित करना नहीं भूले। सुबह से लेकर दोपहर तक राम मंदिर में भीड़ का दबाव अधिक रही। दोपहर में बारिश के दौरान भी दर्शन पथ पर श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। सोमवार की देर शाम तक रामलला के दरबार में एक लाख से अधिक श्रद्धालु माथा टेक चुके थे।
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सुबह 11 बजे से रिमझिम फुहार पड़ने लगी। यह कोई साधारण दिन नहीं, बल्कि वह अलौकिक क्षण था जब श्रद्धा बादलों सी उमड़ पड़ी और भक्ति सरयू सी बहने लगी। रिमझिम फुहारों ने भक्तों को रोका नहीं, बल्कि भक्ति में और भी भिगो दिया। खुले आकाश के नीचे खड़े श्रद्धालु मानो कह रहे हों, जैसे शिव पर जल चढ़ता है, वैसे ही हम भी आज इस भक्ति की वर्षा में भीगकर पवित्र हो गए।
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प्राचीन नागेश्वरनाथ से लेकर क्षीरेश्वरनाथ, हनुमान गढ़ी, रामलला व कनक भवन में भक्तों की लहरें बिना थके, बिना रुके आगे बढ़ती रहीं। कोई सरयू जल लेकर आया, कोई बेलपत्र और धतूरा अर्पण करने, तो कोई बस एक बार शिव के दर्शन से मन की शांति पाने के लिए पहुंचा। पंडितों के मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच हो रहे रुद्राभिषेक, पंचामृत स्नान और दुग्धाभिषेक ने वातावरण को और भी पावन बना दिया। नागेश्वरनाथ में भीड़ का दबाव सबसे अधिक रहा। श्रद्धालुओं को रोक-रोककर जत्थों में दर्शन कराया गया। प्रवेश व निकासी का मार्ग अलग-अलग किया गया था।
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सोमवार दोपहर करीब एक घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश के चलते रामनगरी में जगह-जगह जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। सबसे ज्यादा दिक्कत अयोध्या दर्शन-पूजन करने पहुंचे श्रद्धालुओं को हुई। राम मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने रामपथ पर हुए जलभराव से श्रद्धालुओं को गुजरना पड़ा। हालांकि श्रद्धालुओं की आस्था नहीं डिगी। बस्ती से आए आलोक गुप्ता बोले कि सावन की बारिश और तीसरे सोमवार का योग, यह दुर्लभ अवसर था। मन और आत्मा दोनों का शुद्धिकरण हो गया।
सावन झूला मेले के दूसरे दिन रामलला के दरबार में भी सावन उमड़ आया। सुबह 6:30 बजे जैसे ही राम मंदिर के पट खुले प्रवेश द्वार भक्तों से भर गया। शिव की भक्ति करने अयोध्या पहुंचे श्रद्धालु रामलला के चरणों में श्रद्धा अर्पित करना नहीं भूले। सुबह से लेकर दोपहर तक राम मंदिर में भीड़ का दबाव अधिक रही। दोपहर में बारिश के दौरान भी दर्शन पथ पर श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। सोमवार की देर शाम तक रामलला के दरबार में एक लाख से अधिक श्रद्धालु माथा टेक चुके थे।