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Ayodhya News: पैसा फूंका, फोटो खिंचाई और बंद कर दिया दवा काउंटर
Thu, 25 Apr 2024 03:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 25 Apr 2024 03:00 AM IST
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जिलाअस्पताल में बंद दवा वितरण कक्ष।
अयोध्या। धन की बर्बादी व कमजोर इच्छाशक्ति का जीता-जागता उदाहरण है जिला अस्पताल की न्यू सर्जरी ओपीडी में खुला दवा वितरण काउंटर। जिम्मेदारों ने मरीजों को सहूलियत देने के नाम पर इसे बनाने में पहले पैसा फूंका। वाहवाही लूटने के लिए उच्चाधिकारियों से इसका उद्घाटन करवाकर फोटो खिंचाई और एक माह के भीतर ही इसे बंद कर दिया। नतीजतन मरीज पुराने ढर्रे पर लंबी जद्दोजहद के बाद दवा लेने को विवश हैं।
जिला अस्पताल के पुराने भवन में मेडिसिन, आर्थो व मानसिक रोग विभाग की ओपीडी संचालित है। जबकि, ब्लड बैंक के सामने बने न्यू सर्जरी भवन में जनरल सर्जरी, ईएनटी व नेत्र रोग विभाग की ओपीडी चलती है। इसी से सटी सर्जरी व ईएनटी और नेत्र रोग विभाग की ओटी भी है। मरीजों को दवा सिर्फ पुराने भवन में स्थित चार नंबर काउंटर पर दी जाती है। यह स्थान संकरा होने से दवा लेने में कठिनाइयों से जूझना पड़ता है। इससे निजात के लिए तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक डॉ. एनपी गुप्ता ने सर्जरी ओपीडी के सामने काफी पैसे खर्च करके नया दवा वितरण कक्ष बनवाया था। 25 फरवरी को तत्कालीन अपर निदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण ने फीता काटकर इसका विधिवत शुभारंभ किया। व्यवस्था कुछ दिन चली और मरीजों ने सुविधा का लाभ भी उठाया, लेकिन प्रमुख अधीक्षक व अपर निदेशक के स्थानांतरण के बाद ही सेवाएं भी ठप हो गईं। बुधवार को इस दवा वितरण कक्ष में ताला लटका मिला।
मानव संसाधनों की कमी का रोना
प्रमुख अधीक्षक डॉ. अरुण प्रकाश श्रीवास्तव का कहना है कि मानव संसाधन की कमी है। आए दिन वीआईपी ड्यूटी होने से फार्मासिस्टों को वहां भी जाना पड़ता है। सवाल किया गया कि इसके बनाने से पहले भी तो मानव संसाधन की कमी रही होगी तो इसे बनाया ही क्यों गया? उन्होंने जवाब दिया कि उस समय की बात, वही लोग जानें। उस बारे में कुछ भी बोलना ठीक नहीं है। फिलहाल वार्ता करके इसे पुन: चालू कराने का प्रयास है।
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जिला अस्पताल के पुराने भवन में मेडिसिन, आर्थो व मानसिक रोग विभाग की ओपीडी संचालित है। जबकि, ब्लड बैंक के सामने बने न्यू सर्जरी भवन में जनरल सर्जरी, ईएनटी व नेत्र रोग विभाग की ओपीडी चलती है। इसी से सटी सर्जरी व ईएनटी और नेत्र रोग विभाग की ओटी भी है। मरीजों को दवा सिर्फ पुराने भवन में स्थित चार नंबर काउंटर पर दी जाती है। यह स्थान संकरा होने से दवा लेने में कठिनाइयों से जूझना पड़ता है। इससे निजात के लिए तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक डॉ. एनपी गुप्ता ने सर्जरी ओपीडी के सामने काफी पैसे खर्च करके नया दवा वितरण कक्ष बनवाया था। 25 फरवरी को तत्कालीन अपर निदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण ने फीता काटकर इसका विधिवत शुभारंभ किया। व्यवस्था कुछ दिन चली और मरीजों ने सुविधा का लाभ भी उठाया, लेकिन प्रमुख अधीक्षक व अपर निदेशक के स्थानांतरण के बाद ही सेवाएं भी ठप हो गईं। बुधवार को इस दवा वितरण कक्ष में ताला लटका मिला।
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मानव संसाधनों की कमी का रोना
प्रमुख अधीक्षक डॉ. अरुण प्रकाश श्रीवास्तव का कहना है कि मानव संसाधन की कमी है। आए दिन वीआईपी ड्यूटी होने से फार्मासिस्टों को वहां भी जाना पड़ता है। सवाल किया गया कि इसके बनाने से पहले भी तो मानव संसाधन की कमी रही होगी तो इसे बनाया ही क्यों गया? उन्होंने जवाब दिया कि उस समय की बात, वही लोग जानें। उस बारे में कुछ भी बोलना ठीक नहीं है। फिलहाल वार्ता करके इसे पुन: चालू कराने का प्रयास है।
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