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Ayodhya News: मेडिकल कॉलेज में जांच पर सॉफ्टवेयर का रोड़ा
Sun, 10 May 2026 11:07 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 10 May 2026 11:07 PM IST
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अयोध्या। मेडिकल कॉलेज में खून जांच में रिपोर्टिंग सॉफ्टवेयर का भी रोड़ा सामने आया है। कॉलेज प्रशासन ने बायोकेमिस्ट्री विभाग की जांच का सरल सॉफ्टवेयर से पंजीकरण कराने का निर्देश दिया है, लेकिन विभागाध्यक्ष ने इसके एचएमआईएस (हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) से इंटीग्रेड न होने का हवाला देते हुए नियम विरुद्ध बताया है। हालांकि, लिखित आदेश मिलने पर इसके उपयोग पर सहमति जताई है। वहीं, विभाग का कहना है कि जिन जांचों के रिजेंट्स उपलब्ध हैं, उन्हें मौजूदा साॅफ्टवेयर से किया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज में खून जांच के लिए पूर्व में सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलटी फंड) से दान स्वरूप दो मशीनें मिली थीं, जिन्हें संचालित किया जा रहा है। बीते दिनों बायोकेमिस्ट्री विभागाध्यक्ष ने इन मशीनों को भी एचएमआईएस से इंटीग्रेटेड सॉफ्टवेयर आईटी डोज के माध्यम से इंटीग्रेट करने की मांग की थी। सूत्रों के अनुसार, एचएमआईएस से इंटीग्रेट होने से जांच का संपूर्ण डाटा महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा के कार्यालय में भी उपलब्ध रहता है।
इस बीच आपूर्तिकर्ता कंपनी ने सभी जांच का पंजीकरण सरल पाथ लैब सॉफ्टवेयर से कराने को कहा। इस पर विभागाध्यक्ष ने प्राचार्य को पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने अवगत कराया कि सरल पाथ लैब सॉफ्टवेयर एचएमआईएस इंटीग्रेट नहीं है। जबकि, शासनादेश के अनुसार इसका एचएमआईएस इंटीग्रेट होना आवश्यक है। सभी मेडिकल कॉलेजों में इस आदेश का अनुसरण किया जा रहा है।
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बगैर इंटीग्रेट के इस सॉफ्टवेयर का उपयोग शासनादेश की अवहेलना होगी। इसके लिए उन्होंने लिखित आदेश की मांग की है। लिखित आदेश मिलने तक विभाग की सभी जांच मौजूदा सॉफ्टवेयर से ही करने का दावा किया है। वहीं, मीडिया प्रभारी डॉ. डीके सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में दोनों सॉफ्टवेयर क्रियाशील है। प्राचार्य अभी छुट्टी पर हैं, उनके आने पर इसका निस्तारण होगा।
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मेडिकल कॉलेज में खून जांच के लिए पूर्व में सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलटी फंड) से दान स्वरूप दो मशीनें मिली थीं, जिन्हें संचालित किया जा रहा है। बीते दिनों बायोकेमिस्ट्री विभागाध्यक्ष ने इन मशीनों को भी एचएमआईएस से इंटीग्रेटेड सॉफ्टवेयर आईटी डोज के माध्यम से इंटीग्रेट करने की मांग की थी। सूत्रों के अनुसार, एचएमआईएस से इंटीग्रेट होने से जांच का संपूर्ण डाटा महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा के कार्यालय में भी उपलब्ध रहता है।
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इस बीच आपूर्तिकर्ता कंपनी ने सभी जांच का पंजीकरण सरल पाथ लैब सॉफ्टवेयर से कराने को कहा। इस पर विभागाध्यक्ष ने प्राचार्य को पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने अवगत कराया कि सरल पाथ लैब सॉफ्टवेयर एचएमआईएस इंटीग्रेट नहीं है। जबकि, शासनादेश के अनुसार इसका एचएमआईएस इंटीग्रेट होना आवश्यक है। सभी मेडिकल कॉलेजों में इस आदेश का अनुसरण किया जा रहा है।
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बगैर इंटीग्रेट के इस सॉफ्टवेयर का उपयोग शासनादेश की अवहेलना होगी। इसके लिए उन्होंने लिखित आदेश की मांग की है। लिखित आदेश मिलने तक विभाग की सभी जांच मौजूदा सॉफ्टवेयर से ही करने का दावा किया है। वहीं, मीडिया प्रभारी डॉ. डीके सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में दोनों सॉफ्टवेयर क्रियाशील है। प्राचार्य अभी छुट्टी पर हैं, उनके आने पर इसका निस्तारण होगा।